काठमांडू। नेपाल में तिब्बत से आई विनाशकारी बाढ़ से मची भीषण तबाही में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 270 हो गया है, जबकि 800 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। भोटेकोशी नदी के उफान में बहे कई जिलों से शव मिलने का सिलसिला जारी है, जिससे मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
नदियों के मुहाने पर बसे जिलों में भारी तबाही
चीन के तिब्बती क्षेत्र से शुरू हुए इस जलप्रलय ने सीमा पार नेपाल के इलाकों में भारी तबाही मचाई है। नेपाल पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, नदियों के बहाव क्षेत्र में आने वाले कई जिलों से शव बरामद किए जा रहे हैं।
- चितवन: सबसे ज्यादा 108 शव दक्षिणी मैदानी क्षेत्र के चितवन जिले से मिले हैं।
- नवलपरासी ईस्ट: यहां से 62 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं।
- धाडिंग और रसुवा: धाडिंग से 27 और रसुवा जिले से 17 शव बरामद किए गए हैं।
बाढ़ के प्रचंड वेग ने आवासीय बस्तियों, सीमावर्ती कस्टम ऑफिस और पावर ग्रिड को तहस-नहस कर दिया है, जिसके कारण 800 से ज्यादा लोगों से संचार संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के दर्जनों कर्मचारी और विदेशी नागरिक बेपता
‘इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल’ (IPPAN) के मुताबिक, बाढ़ के कारण कई जलविद्युत परियोजनाओं के कर्मचारी लापता हैं:
- अपर त्रिशूली-1 (216 MW): निर्माण क्षेत्र में कार्यरत ‘एंड्रिट्ज हाइड्रो’ के 76 कर्मचारी बेपता हैं, जिनमें से आधे विदेशी और आधे नेपाली नागरिक हैं। इसके अलावा प्रोजेक्ट डेवलपर कंपनी के 11 और 8 दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता हैं।
- रसुवागढ़ी (111 MW): इस परियोजना में काम कर रहे 51 लोगों का कोई सुराग नहीं लग पाया है।
- मैलुंग खोला (5 MW): पावरहाउस में काम कर रहे 8 कर्मचारी अचानक आई बाढ़ में बह गए।
- रसुवा भोटेकोशी (120 MW): सिविल कांट्रैक्टर ‘सिनोहाइड्रो’ के 2 कर्मचारी लापता बताए जा रहे हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 300 भारतीय लापता
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने काठमांडू में आयोजित ‘एनडीटीवी वर्ल्ड अन्वीक्षा समिट’ में पुष्टि की कि इस आपदा में लगभग 300 भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें से ज्यादातर श्रद्धालु रसुवा के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे।
विदेश मंत्री ने दुख जताते हुए कहा कि महज कुछ ही घंटों में कई शहर पूरी तरह बर्बाद हो गए और हजारों परिवार बेघर हो गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 500 से अधिक विदेशी नागरिक फंसे हुए हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। नेपाल सरकार विभिन्न देशों के दूतावासों के साथ मिलकर लापता विदेशियों का पता लगाने और रेस्क्यू ऑपरेशन को तेज करने में जुटी है।
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