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60,000 करोड़ की पीएम-सेतु योजना: 1,000 सरकारी आईटीआई होंगे आधुनिक, युवाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण

केंद्र सरकार की पीएम-सेतु योजना (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) के तहत देशभर में 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक बनाया जाएगा। यह योजना युवाओं को उद्योग की मांग के अनुसार विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका […]

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केंद्र सरकार की पीएम-सेतु योजना (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) के तहत देशभर में 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक बनाया जाएगा। यह योजना युवाओं को उद्योग की मांग के अनुसार विश्वस्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराने, उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय ने शनिवार को इस योजना के क्रियान्वयन में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर पुणे में एक बड़ा उद्योग परामर्श कार्यक्रम आयोजित करने की जानकारी दी है।

योजना का उद्देश्य और महत्व

पीएम-सेतु योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी आईटीआई को उद्योग-अनुकूल बनाना है। इससे युवाओं को आधुनिक मशीनों, नई तकनीकों और मांग-आधारित पाठ्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षण मिलेगा। योजना के तहत आईटीआई सरकार के स्वामित्व में रहेंगे, लेकिन उनका संचालन उद्योगों की साझेदारी से होगा। यह मॉडल प्रशिक्षण को वास्तविक बाजार की जरूरतों से जोड़ेगा, अप्रेंटिसशिप के अवसर बढ़ाएगा और नौकरी प्राप्ति को आसान बनाएगा।

हब-एंड-स्पोक मॉडल

योजना में हब-एंड-स्पोक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। इसमें 200 आईटीआई को हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां उन्नत मशीनरी, आधुनिक भवन और नवीनतम तकनीक से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये हब इनोवेशन सेंटर, ट्रेनिंग-ऑफ-ट्रेनर्स सुविधाएं और प्लेसमेंट सेल भी संचालित करेंगे। वहीं, 800 आईटीआई को स्पोक के रूप में जोड़ा जाएगा, ताकि प्रशिक्षण की सुविधा दूर-दराज के जिलों तक पहुंच सके। यह मॉडल पूरे देश में कौशल विकास को समान रूप से विस्तार देगा।

उद्योग भागीदारी और पुणे परामर्श कार्यक्रम

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर इस योजना को आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में पुणे में एक महत्वपूर्ण उद्योग परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में निर्माण, कपड़ा, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल और गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से 50 से अधिक प्रमुख कंपनियां हिस्सा लेंगी।

उद्देश्य उद्योगों को योजना से लंबे समय तक जोड़ना है, ताकि वे प्रशिक्षण के फैसलों, पाठ्यक्रम निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण और संचालन में सक्रिय भूमिका निभा सकें। कार्यक्रम के दौरान कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान होगा। इनमें महाराष्ट्र के व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय (डीवीईटी) के साथ फिएट इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, अनुदीप फाउंडेशन तथा एसडीएन/वाधवानी के बीच साझेदारी शामिल है।

योजना का शुभारंभ और बजट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में इस योजना का शुभारंभ किया था। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसके लिए कुल 60,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। योजना के पहले चरण में कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

यह पहल भारत के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जो कौशल विकास को उद्योग की वास्तविक मांगों से जोड़कर रोजगार के नए द्वार खोलेगी।

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