Cervical Pain: आज की इस भागदौड़ भरी और आधुनिक जिंदगी में हमारे रहन-सहन और काम करने के तरीकों में बहुत बड़ा बदलाव आया है। दफ्तरों में लगातार घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करना, स्मार्टफोन की स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रखना और शारीरिक गतिविधियों (वॉक या एक्सरसाइज) में कमी आना अब हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी ये आदतें आपकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक साबित हो रही हैं?
इन्हीं खराब आदतों की वजह से आजकल लोगों में गर्दन के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘सर्वाइकल’ कहा जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो बीमारी पहले केवल ढलती उम्र या बुजुर्गों में देखी जाती थी, आज उसकी चपेट में युवा और कम उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
क्या होता है सर्वाइकल और क्यों होता है यह दर्द?
चिकित्सीय दृष्टिकोण से समझें तो हमारी गर्दन के भीतर रीढ़ की हड्डी का जो ऊपरी हिस्सा होता है, उसे ‘सर्वाइकल स्पाइन’ कहा जाता है। यह हिस्सा हमारी गर्दन को मजबूत सहारा देने के साथ-साथ उसे चारों तरफ आसानी से घुमाने में मदद करता है। इस सर्वाइकल स्पाइन में कुल सात छोटी-छोटी हड्डियां होती हैं, जिनके बीच में लचीली डिस्क मौजूद होती हैं। ये डिस्क किसी भी तरह के झटके को सोखने और गर्दन की मूवमेंट को स्मूथ बनाए रखने का काम करती हैं।
जब हमारी गलत आदतों के कारण इन छोटी हड्डियों, डिस्क या उनके आस-पास की नसों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है, तो गर्दन में तेज दर्द, खिंचाव और अकड़न की समस्या पैदा हो जाती है। इसी स्थिति को सर्वाइकल का नाम दिया गया है। कई मामलों में यह दर्द सिर्फ गर्दन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे बढ़कर कंधों, पूरे हाथ और हाथों की उंगलियों तक फैल जाता है।
गलत पोस्चर और मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल है बड़ी वजह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि काम करते या बैठते समय शरीर का गलत पोस्चर (तरीका) सर्वाइकल की सबसे मुख्य वजहों में से एक है।
- लैपटॉप पर काम: कंप्यूटर पर घंटों काम करते समय जब हमारी गर्दन लगातार आगे की ओर झुकी रहती है, तो मांसपेशियों पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है।
- स्मार्टफोन का असर: मोबाइल देखते समय जब हम लगातार सिर नीचे झुकाए रखते हैं, तो गर्दन की हड्डियों पर शरीर के वास्तविक वजन की तुलना में बहुत अधिक भार पड़ता है।
इसके अलावा, बिना ब्रेक लिए घंटों एक ही पोजीशन में बैठे रहना, सोते समय बहुत ऊंचे या सख्त तकिए का इस्तेमाल करना, गलत तरीके से लेटना, अचानक कोई भारी वजन उठा लेना या गर्दन पर कभी कोई पुरानी चोट लगना भी सर्वाइकल की समस्या को काफी बढ़ा देता है।
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
सर्वाइकल की शुरुआत आमतौर पर गर्दन में बहुत हल्के दर्द और सामान्य जकड़न के साथ होती है।
- सुबह सोकर उठने के बाद गर्दन को दाएं-बाएं घुमाने या झुकाने में तेज तकलीफ होना।
- कंधों में लगातार भारीपन या दर्द का बने रहना।
- सिर के पिछले हिस्से में भारीपन महसूस होना।
- हाथों, बांहों या उंगलियों में अजीब सी झनझनाहट या सूनापन महसूस होना।
यदि यह दर्द लंबे समय तक लगातार बना रहे या हाथों की मांसपेशियां कमजोर होने लगें, तो इसे सामान्य थकान समझकर टालने की भूल बिल्कुल न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी होता है।
कैसे करें बचाव? अपनी आदतों में करें ये छोटे बदलाव
सर्वाइकल जैसी कष्टदायक समस्या से सुरक्षित रहने के लिए आपको अपनी दैनिक जीवनशैली में कुछ बेहद आसान सुधार करने होंगे:
- सटीक पोस्चर: ऑफिस में काम करते समय हमेशा अपनी कुर्सी पर सीधे बैठें और कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन को अपनी आंखों के बिल्कुल सामने (आई-लेवल पर) रखें।
- शारीरिक मूवमेंट: लगातार घंटों तक सीट पर न बैठे रहें। हर आधे या एक घंटे में अपनी जगह से उठें, थोड़ा टहलें और गर्दन को हल्का सा आराम दें।
- मोबाइल का सही उपयोग: फोन चलाते समय गर्दन को बहुत ज्यादा नीचे झुकाने की बजाय मोबाइल को थोड़ा ऊपर उठाकर आंखों के समानांतर लाने का प्रयास करें।
- व्यायाम और तकिया: रोजाना गर्दन की हल्की स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज करें। सोते समय हमेशा ऐसे आरामदायक और पतले तकिए का चयन करें जिससे आपकी गर्दन प्राकृतिक और सही स्थिति में रहे।
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