प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण को नमन करने के लिए एक बेहद भव्य सांस्कृतिक संध्या “राष्ट्रराग” का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में ‘लोक संस्कृति विकास संस्थान, प्रयागराज’ द्वारा आयोजित यह गरिमामय कार्यक्रम न्यू कैंट स्थित ‘मुख्यालय पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया’ के कोबरा ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान देश के कोने-कोने से आए लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों के जरिए भारत की सांस्कृतिक विविधता और देशभक्ति का ऐसा अनूठा रंग बिखेरा कि वहां मौजूद हर शख्स भावविभोर हो उठा।

दिग्गजों की मौजूदगी में सजा सुरों का कारवां
इस विशेष सांस्कृतिक उत्सव में भारतीय सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बतौर अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेजर जनरल अमित सिंह सोहल (जनरल ऑफिसर कमांडिंग, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया) रहे।
विशिष्ट अतिथियों में 4 डिवीजन (रेड ईगल डिवीजन) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल पी. एस. फोगाट, सेलेक्शन सेंटर ईस्ट के कमांडेंट मेजर जनरल धर्मराज राय और जीपीटी ग्रुप के श्रीगंगाधाम की निदेशक रश्मि त्रिपाठी शामिल हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत में कर्नल विक्रम राणा ने सभी सम्मानीय अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

मौलिश्री की आवाज का जादू और लोक नृत्यों की धूम
खचाखच भरे कोबरा ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। टीवी रियलिटी शो के जरिए देशभर में अपनी पहचान बनाने वाली सुप्रसिद्ध गायिका मौलिश्री गर्ग ने मंच संभालते ही अपनी जादुई आवाज से सबका दिल जीत लिया। उन्होंने जुगनी जी, सजदा, मेरा पिया घर आया, ओ लाल नी, झूम झूम झूम बाबा, दमा दम मस्त कलंदर और छाप तिलक जैसे लोकप्रिय गीतों की मधुर स्वर लहरियां बिखेरकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

इसके बाद पंजाब की धरती से आए सरबजीत और उनके साथी कलाकारों ने जोश से भरे पारंपरिक लोक गीतों और नृत्यों की प्रस्तुति देकर ऑडिटोरियम में नया उत्साह फूंक दिया। वहीं, उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत को दर्शाते पारंपरिक ‘ढेढ़िया’ लोकनृत्य और वाराणसी से आए ‘शिवोहम’ नृत्य दल ने शिवानी मिश्रा के कुशल निर्देशन में भारतीय संस्कृति की एक जीवंत झांकी पेश की। युवा कलाकार सिया और मनु सहित मंच पर आए सभी कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि दर्शकों की तालियों से पूरा हॉल गूंज उठा।

सेना के अफसरों और जवानों ने की मुक्तकंठ से सराहना
कार्यक्रम में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जवान और उनके परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे। सैनिकों और उनके परिजनों ने पूरे उत्साह के साथ हर एक कलाकृति और गीत का आनंद लिया।
मुख्य अतिथि मेजर जनरल अमित सिंह सोहल, वीएसएम ने अपने संबोधन में कहा:
“हमारी भारतीय सेना देश की सीमाओं की रक्षा करने के साथ-साथ हमारी महान सांस्कृतिक विरासत की भी रक्षक और प्रेरणा है। ‘राष्ट्रराग’ जैसे सुंदर और भव्य आयोजन सेना और आम समाज के बीच के रिश्तों को और अधिक मजबूत व आत्मीय बनाते हैं। कलाकारों ने कला के जरिए सैनिकों के प्रति जो सम्मान दिखाया है, वह वास्तव में सराहनीय है।”
विशिष्ट अतिथि मेजर जनरल पी. एस. फोगाट ने कहा:
“भारतीय संस्कृति ही हमारी असली राष्ट्रीय पहचान है। जब कला का उपयोग राष्ट्रभक्ति की भावना को जगाने के लिए किया जाता है, तो उसका असर समाज पर कई गुना बढ़ जाता है। यह प्रयास हमारे युवाओं में देशप्रेम, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को मजबूत करेगा।”
विशिष्ट अतिथि रश्मि त्रिपाठी ने भी इसे सेना के प्रति सम्मान की एक भावपूर्ण और अविस्मरणीय अभिव्यक्ति बताया।

ऐतिहासिक रूप से सफल रहा आयोजन
लोक संस्कृति विकास संस्थान के चेयरमैन शरद कुमार मिश्र, जिन्होंने इस कार्यक्रम का बेहद सफल मंच संचालन भी किया, ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके संस्थान का मुख्य लक्ष्य भारतीय लोक परंपराओं को राष्ट्र की चेतना और गौरव से जोड़ना है। ‘राष्ट्रराग’ के माध्यम से उन्होंने सेना के अद्वितीय त्याग को एक छोटी सी सांस्कृतिक श्रद्धांजलि देने का प्रयास किया है। संपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम का सफल समन्वय शिवानी मिश्रा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथियों, कलाकारों और सहयोगियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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