लखनऊ। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं ने कमाल कर दिखाया है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी पांच महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों ने 2019 से अब तक 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया है। 3.88 लाख से ज्यादा महिलाएं इनसे जुड़ी हैं और रोजाना करीब 12.5 लाख लीटर दूध इकट्ठा कर रही हैं।
महिलाओं की ताकत से बदल रहा गांवों का चेहरा
उत्तर प्रदेश के गांवों में महिलाओं की आर्थिक ताकत अब नई कहानी लिख रही है। जहां पहले दूध सिर्फ घर की जरूरत पूरी करने तक सीमित था, वहां आज महिलाएं संगठित होकर बड़े पैमाने पर कारोबार चला रही हैं। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए बनी इन पांच कंपनियों ने न सिर्फ महिलाओं को आय का मजबूत जरिया दिया है, बल्कि पूरे ग्रामीण इलाके की अर्थव्यवस्था को भी नई रफ्तार दी है।
इन कंपनियों का नेटवर्क अब 31 जनपदों के 6,603 गांवों तक पहुंच चुका है। योजना है कि इसे और बढ़ाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को फायदा मिले। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गांवों का आर्थिक चेहरा तेजी से बदल रहा है। घर-घर रोजगार का मॉडल अब हकीकत बनता दिख रहा है।
दूध के कारोबार से आत्मनिर्भरता की नई राह
महिलाओं को सिर्फ स्वयं सहायता समूहों तक बांधकर रखने के बजाय उन्हें कंपनी चलाने और असली कारोबार से जोड़ने का नतीजा अब साफ नजर आ रहा है। गांव की महिलाएं दुग्ध उत्पादन को नियमित कमाई का साधन बना रही हैं। दूध इकट्ठा करने और बेचने की सही व्यवस्था होने से उन्हें पास ही बाजार मिल रहा है। इससे पशुपालन भी सिर्फ घरेलू काम न रहकर पक्की आर्थिक गतिविधि बन गया है।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि दुग्ध उत्पादक महिलाएं अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभर रही हैं। महिला समूहों से बनी कंपनियां महिलाओं को उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी चेन से जोड़ रही हैं। इसका सीधा फायदा उनकी आय और गांव की आर्थिक हलचल पर दिख रहा है।
रोजाना 12.5 लाख लीटर दूध का संग्रहण
इन महिला दुग्ध उत्पादक कंपनियों की सक्रियता का अंदाजा इसी से लग जाता है कि रोजाना करीब 12.5 लाख लीटर दूध इकट्ठा हो रहा है। बड़ी संख्या में महिलाएं पशु पालकर नियमित दूध उपलब्ध करा रही हैं। संगठित तरीके से दूध जमा होने की वजह से उसे बाजार तक पहुंचाना भी आसान हो गया है।
महिलाएं सिर्फ दूध देने तक सीमित नहीं हैं। समूहों के जरिए वे सामूहिक रूप से आर्थिक कामकाज सीख रही हैं और कारोबार की समझ बढ़ा रही हैं। इससे गांव की महिलाओं में उद्यमिता की भावना भी मजबूत हो रही है। यह सफल मॉडल अब 31 जनपदों के साढ़े छह हजार से ज्यादा गांवों तक फैल चुका है और इसे और बढ़ाने पर काम चल रहा है।
योगी सरकार के बाद कारोबार में तेजी
महिला समूहों की इन पांच कंपनियों ने 2019 से अब तक 5,716.26 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि महिलाओं को संगठित कारोबारी मॉडल से जोड़ने की कोशिश अब बड़े आर्थिक नतीजे दे रही है। योगी सरकार आने के बाद से 3.88 लाख से अधिक महिलाओं की भागीदारी ने इस मॉडल को मजबूत आधार दिया है।
इससे गांवों में रोजगार और आय के नए रास्ते खुल रहे हैं। पशुपालन, दूध संग्रहण और उससे जुड़े कामों में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था भी तेज हो रही है। घर बैठे काम मिलने से महिलाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा।
घर-घर रोजगार से गांवों में नया बदलाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर खास जोर दिया जा रहा है। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए स्वयं सहायता समूहों को आजीविका के कामों से जोड़ने के साथ उन्हें असली कारोबार की तरफ बढ़ाया जा रहा है। मकसद साफ है – गांव की महिलाएं बाहर जाकर नौकरी ढूंढने के बजाय अपने इलाके में ही कमाई कर सकें।
दुग्ध उत्पादन इस दिशा में बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। पहले पशुपालन सिर्फ घर की जरूरत के लिए था, अब उसे संगठित तरीके से आय और कारोबार का आधार बनाया जा रहा है। महिला समूहों की कंपनियां इसी बदलाव की मिसाल हैं।
वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य की ओर
प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महिला समूहों की भूमिका को बड़े आर्थिक लक्ष्य से भी जोड़ा जा रहा है। महिलाओं को उद्यम, उत्पादन और बाजार से जोड़ने से गांवों में आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ रहा है। इससे परिवारों की खरीद क्षमता बढ़ रही है और स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
महिला समूहों की पांच कंपनियों का हजारों करोड़ का कारोबार और लाखों महिलाओं की भागीदारी साबित करती है कि स्वयं सहायता समूह अब सिर्फ बचत और छोटे कर्ज तक सीमित नहीं रहे। वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में असली कारोबारी इकाइयों के रूप में अपनी जगह बना रहे हैं। आजीविका मिशन के जरिए यूपी वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लक्ष्य की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।
महिलाओं की दुग्ध शक्ति से गांवों में समृद्धि
इतने बड़े पैमाने पर दूध संग्रहण की व्यवस्था महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को नए मुकाम पर ले जा रही है। एक तरफ पशुपालन को बढ़ावा मिल रहा है, दूसरी तरफ महिलाओं को अपनी मेहनत का सही दाम मिल रहा है। नियमित आय होने से वे परिवार की आर्थिक जरूरतों में ज्यादा मजबूत भूमिका निभा पा रही हैं।
ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित पांच मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां हैं – बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड।
ये कंपनियां इन जिलों में काम कर रही हैं – बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, बलिया, चंदौली, गाजीपुर, मिर्जापुर, संत रविदास नगर, सोनभद्र, वाराणसी, प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर, अयोध्या, फतेहपुर, अमेठी, कानपुर नगर, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर।
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