चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सिर्फ लक्ष्य बनाना काफी नहीं है। उन्हें समय पर पूरा करना और नियमित समीक्षा करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। चंडीगढ़ में सचिवालय में हुई बैठक में उन्होंने विभागों के 5-वर्षीय कार्यान्वयन रोडमैप की समीक्षा की और “विजन टू एक्शन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” प्लानिंग टूल को लॉन्च किया। इस टूल से विभागों को 5 साल के टारगेट साफ दिखेंगे और रिपोर्ट भी एक समान बनेगी।
लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर जोर
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मंगलवार को स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान से जुड़ी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में अलग-अलग विभागों के 5-वर्षीय रोडमैप पर विस्तार से चर्चा हुई।
सीएम सैनी ने स्पष्ट कहा कि हर विभाग को 2030 तक के अपने लक्ष्यों को साल-दर-साल टाइमलाइन के साथ तय करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि लक्ष्य बनाकर रख देने से काम नहीं चलेगा। उन्हें समय पर पूरा करना और नियमित रूप से उनकी समीक्षा करना बहुत जरूरी है। इससे योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होंगी और आम लोगों को उनका फायदा मिल सकेगा।
AI आधारित प्लानिंग टूल का लॉन्च
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने “विजन टू एक्शन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” नाम का प्लानिंग टूल लॉन्च किया। स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू ने बताया कि यह टूल एक्शन प्लान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इस टूल का मुख्य उद्देश्य है कि विभागों के 5 साल के लक्ष्य स्पष्ट रूप से सामने आएं और उनकी रिपोर्ट भी एक जैसी बने। विभागों को साल-दर-साल दिए जाने वाले लक्ष्यों की जानकारी भी आसानी से मिल सकेगी। इससे हरियाणा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में चरणबद्ध तरीके से योगदान दे पाएगा।
5 साल का एक्शन प्लान और विभागों की तैयारियां
बैठक में 2026 से 2030 तक के कार्यों पर चर्चा हुई। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने अपने-अपने 5 साल के प्लान के बारे में जानकारी दी। इसमें उद्योग एवं वाणिज्य विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग समेत कई विभाग शामिल थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले 5 साल बेहद महत्वपूर्ण हैं। अगर योजनाओं को सही तरीके से लागू किया गया तो 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने में हरियाणा अहम भूमिका निभा सकेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि केंद्र सरकार के नीति आयोग के साथ अच्छा तालमेल रखते हुए सभी रिफॉर्म्स पर काम किया जाए।
सीएम सैनी ने कहा कि समय कम है और लक्ष्य बड़े हैं। इसलिए हर विभाग को मजबूत योजना बनाकर आगे बढ़ना होगा। साथ ही यह भी देखना होगा कि तय समय में योजनाओं का जमीनी स्तर पर कितना असर हो रहा है। लगातार नजर रखनी होगी।
एक्शन प्लान के मुख्य बिंदु
मुख्यमंत्री ने एक्शन प्लान पर विस्तार से हिदायतें दीं। उन्होंने कहा कि अगले 5 वर्षों की प्राथमिकताएं साफ-साफ तय की जाएं। उन्हें साल-दर-साल मापने योग्य बनाया जाए ताकि प्रगति की नियमित समीक्षा हो सके।
समय-सीमाएं यथार्थवादी होनी चाहिए लेकिन महत्वाकांक्षी भी। योजनाएं ऐसी हों जो जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला सकें। विभागों के बीच बेहतर समन्वय, लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट जवाबदेही और मजबूत मॉनिटरिंग तंत्र विकसित करने पर जोर दिया गया। इससे एक्शन प्लान का समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
शिक्षा विभाग के लिए विजन 2047
बैठक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अपने विजन के बारे में जानकारी दी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा विजन 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर नई शिक्षा नीति के तहत काम किया जाए। हर साल पूरी तत्परता से काम करते हुए वांछित लक्ष्य हासिल करने पर फोकस रहे।
उच्चतर शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई ताकि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा आसानी से मिल सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को देश के प्रतिष्ठित आईआईटी जैसे संस्थानों की तरह ग्रेडिंग में लाने के लिए नई शिक्षा नीति के अनुसार काम हो।
विश्वविद्यालयों के सौंदर्यीकरण पर भी ध्यान दिया जाए। बेहतर काम करने वाले विश्वविद्यालयों को शिक्षा में सुधार के लिए 5-5 करोड़ रुपये की ग्रांट दी जाएगी।
सीएम सैनी ने कहा कि वर्ष 2047 तक विश्वविद्यालयों में सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत तक पहुंचना चाहिए। वर्तमान में यह 31 प्रतिशत है। नई शिक्षा नीति के तहत हर जिले में मॉडर्न संस्कृति महाविद्यालय खोले जाएंगे। इनके लिए 2028 तक जरूरी कैम्पस तैयार कर लिए जाएंगे।
50 प्रतिशत कोर्स कौशल से जुड़े होंगे। शिक्षा नीति के लाभ एक ही पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की ग्रेडिंग आसानी से हो सके।
बच्चों और युवाओं पर फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा विजन 2047 के तहत बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए श्रम विभाग के माध्यम से विशेष अभियान चलाए जाएंगे। अल्पायु के बच्चों को लोकल स्तर पर ज्ञान बढ़ाने के लिए अच्छे संस्थानों, उद्योगों और केंद्रों का भ्रमण कराया जाएगा।
उच्च शिक्षा में लड़कियों की ड्रॉपआउट दर कम करने पर बल दिया जाएगा। दिव्यांग बच्चों के लिए हर जिले में स्कूल खोलने का काम किया जाएगा।
हर स्कूल और कॉलेज की हर महीने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी। शिक्षण संस्थानों में सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, पेयजल, शौचालय, साइंस लैब और अतिरिक्त कक्ष बढ़ाने पर काम होगा। कक्षा 8 से ही बच्चों में ज्ञान और कौशल विकसित करने पर जोर रहेगा।
युवाओं को तकनीकी शिक्षा में निपुण बनाने के लिए प्रदेश में चार नए पॉलिटेक्निक खोले जाएंगे। गुरुग्राम, खेड़ी तलवाना महेंद्रगढ़ और नारायणगढ़ में जमीन का चयन हो चुका है। महिलाओं को तकनीकी शिक्षा के लिए ज्यादा प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि उनकी तकनीकी कौशल दर 17 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो सके।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग का रोडमैप
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा विजन 2047 के तहत राज्य को औद्योगिक विकास, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार में आगे लाने का व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है।
उद्देश्य है हरियाणा को सतत, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक हब बनाना। 2030 तक एमएसएमई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना, लॉजिस्टिक्स सिस्टम बेहतर बनाना और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देना शामिल है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए हर जिले में स्टार्टअप लायजन अधिकारी नियुक्त किए जा रहे हैं। 5 हजार से अधिक नए स्टार्टअप पंजीकरण का लक्ष्य रखा गया है।
उद्योगों को सरल और तेज सेवाएं देने के लिए 30 मई 2026 तक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया जाएगा। इससे स्वीकृति का समय 50 प्रतिशत तक कम हो सकेगा। एमएसएमई के लिए अनुपालन बोझ कम करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने पर जोर है।
क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास, PADMA योजना, प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर रूफटॉप जैसी पहलें चल रही हैं। PPP मॉडल से लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूती दी जा रही है।
वैश्विक स्तर पर हरियाणा की पहचान मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय रोड शो, ब्रांडिंग और निवेशक सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इससे 2030 तक निर्यात दोगुना करने का लक्ष्य है।
युवाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए 100 स्किल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उद्योगों के साथ प्रशिक्षण और प्लेसमेंट पर फोकस रहेगा। एमएसएमई के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किए जाएंगे।
सरकार एमएसएमई को आसान ऋण, क्रेडिट गारंटी, वेंचर कैपिटल फंड और टैक्स प्रोत्साहन जैसी मदद दे रही है।
2030 तक करीब 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इन योजनाओं से हरियाणा औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।
बैठक में मौजूद प्रमुख अधिकारी
बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, गृह सचिव सुधीर राजपाल, पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल और विभिन्न विभागों के उच्च अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी विभागों से अपील की कि वे मिलकर बेहतर तरीके से काम करें, नई सोच अपनाएं और आगे की तैयारी पहले से करें। इससे प्रदेश की तरक्की की रफ्तार और तेज हो सकेगी।
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