भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को हुई। बैठक में प्रदेश के विकास और जन कल्याण के लिए कुल 26 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक की महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें लोक निर्माण विभाग के कामों के लिए सबसे बड़ी राशि 26,311 करोड़ रुपये शामिल है। साथ ही चिकित्सा शिक्षा, आंगनवाड़ी केंद्रों के विद्युतीकरण और सिंचाई जैसी जरूरी योजनाओं को भी बढ़ावा मिला। पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति में बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जो अब 1,550 रुपये से बढ़कर 10,000 रुपये प्रतिमाह हो गई है।
बैठक का सार और प्रमुख फैसले
मंत्रि-परिषद की यह बैठक मंत्रालय में संपन्न हुई। बैठक वंदे मातरम गान से शुरू हुई। कैबिनेट ने प्रदेश की सड़कों, भवनों, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए। इन फैसलों से बुनियादी ढांचा बेहतर होगा और आम लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
लोक निर्माण विभाग की विभिन्न परियोजनाओं के लिए 26,311 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। यह राशि अगले पांच वर्षों यानी 2026 से 2031 तक के कामों के लिए है। इसमें सड़कों के नवीनीकरण, मरम्मत, नए कार्यालयों का निर्माण और पुराने भवनों की देखभाल शामिल है।
लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को मिली स्वीकृति
कैबिनेट ने शाजापुर जिले की लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 155 करोड़ 82 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इस परियोजना से शाजापुर तहसील के 17 गांवों और उज्जैन जिले की तराना तहसील के 7 गांवों को लाभ मिलेगा। कुल 24 गांवों में करीब 9,200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
परियोजना के तहत लखुंदर नदी पर शाजापुर जिले में मक्सी के पास पहले से बने जलाशय से 24.37 मीट्रिक घन मीटर पानी का उपयोग किया जाएगा। इससे किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिल सकेगी और खेती की उत्पादकता बढ़ेगी।
लोक निर्माण विभाग के लिए विस्तृत स्वीकृति
लोक निर्माण विभाग के कामों के लिए कुल 26,311 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मदें शामिल हैं:
- मुख्यालय, मंडल और संभागीय कार्यालयों की स्थापना, अनुरक्षण और मरम्मत के लिए 6,180 करोड़ 57 लाख रुपये।
- केंद्रीय सड़क अधोसंरचना निधि से संबंधित योजनाओं के लिए 6,925 करोड़ रुपये।
- एफ-टाइप उच्च श्रेणी के सरकारी आवास और गैर-आवासीय भवनों के रखरखाव के लिए 1,680 करोड़ रुपये।
- भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के लिए 6,500 करोड़ रुपये।
- मुख्य जिला मार्गों, जिला मार्गों और अन्य मार्गों के नवीनीकरण के लिए 5,000 करोड़ रुपये।
- भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान और अन्य भुगतानों के लिए 25 करोड़ 50 लाख रुपये।
ये फैसले प्रदेश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करेंगे। सड़कें बेहतर होंगी, सरकारी भवन सुधरेंगे और विकास कार्यों की गति बढ़ेगी।
पिछड़ा वर्ग विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण संशोधन
कैबिनेट ने पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन को मंजूरी दी। दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे मध्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को अब हर साल 100 नए छात्रों को लाभ मिलेगा। इनमें 50 सीटें स्नातक स्तर और 50 सीटें स्नातकोत्तर स्तर के लिए रखी गई हैं।
पहले से योजना का लाभ ले रहे विद्यार्थियों को उनके कोर्स पूरा होने तक सहायता जारी रहेगी। छात्रवृत्ति की राशि में बड़ा बदलाव किया गया है। पहले मिलने वाली 1,550 रुपये मासिक छात्रवृत्ति अब बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है।
योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी को पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र होना चाहिए और अभिभावकों की वार्षिक आय निर्धारित सीमा के अंदर होनी चाहिए। यह फैसला पिछड़ा वर्ग के मेधावी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मजबूती
चिकित्सा शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए दो बड़ी स्वीकृतियां दी गई हैं। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में पीजी सीट वृद्धि योजना के तहत रेडियोथेरेपी विभाग की ओपीडी, लीनियर मशीन बंकर, बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट और कैथ लैब के निर्माण के लिए 79 करोड़ 16 लाख रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इसमें 14 करोड़ 8 लाख रुपये की कार्योत्तर स्वीकृति भी शामिल है।
श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के लिए 174 करोड़ 80 लाख रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। पहले यह राशि 164 करोड़ 49 लाख रुपये थी। इन कामों से प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
आंगनवाड़ी केंद्रों का विद्युतीकरण
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत 38,901 आंगनवाड़ी भवनों में बाहरी विद्युतीकरण के लिए 80 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई। यह स्वीकृति 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-27 से 2030-31 तक के लिए है।
प्रदेश में कुल 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 38,901 केंद्रों में अभी बिजली की व्यवस्था नहीं है। विद्युतीकरण के बाद इन केंद्रों में ट्यूबलाइट, बल्ब, पंखा, कूलर, स्मार्ट टीवी और वॉटर प्यूरीफायर जैसी सुविधाएं लगाई जा सकेंगी। इससे बच्चों को बेहतर वातावरण में पूर्व शिक्षा मिल सकेगी और विभाग की योजनाओं का बेहतर संचालन होगा।
लक्ष्य के अनुसार 38,814 विभागीय भवनों, धरती आबा योजना के 69 भवनों और जिला खनिज फंड से बने 18 भवनों सहित कुल 38,901 आंगनवाड़ी भवनों को कवर किया जाएगा।
बैठक में लिए गए अन्य फैसले
कैबिनेट ने चिकित्सा शिक्षा, आंगनवाड़ी और सिंचाई योजनाओं के लिए कुल 490 करोड़ रुपये की अतिरिक्त स्वीकृति भी दी। सभी फैसले प्रदेश के समग्र विकास को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। इन योजनाओं से सड़कें, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सुधार होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जन कल्याण और विकास पर जोर दिया गया। फैसलों से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
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