लखनऊ/अदिति सिंह। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को राज्य विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विस्तृत चर्चा का प्रस्ताव रखा। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इन दलों ने लोकसभा में अधिनियम के संशोधन का विरोध किया, जिससे महिलाओं को 33 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण 2029 में लागू करने का मौका प्रभावित हुआ। मुख्यमंत्री ने महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया और विपक्ष पर आधी आबादी के उन्नयन में बाधक बनने का आरोप लगाया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र की जरूरत
उत्तर प्रदेश विधानसभा में बुलाए गए इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर खुली चर्चा करना था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश के सबसे बड़े विधानमंडल के रूप में उत्तर प्रदेश की विधानसभा को महिलाओं के स्वावलंबन और सशक्तीकरण में आने वाली बाधाओं को चिन्हित करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, जिसे महिला आरक्षण विधेयक के नाम से भी जाना जाता है, सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था। इसका उद्देश्य लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए लगभग 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है। यह आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आरक्षित सीटों पर भी लागू होगा। हालांकि, अधिनियम का पूरा प्रभाव नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही आता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में भारतीय संसद में महिलाओं की संख्या करीब 15 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा में यह आंकड़ा 11-12 प्रतिशत के आसपास है। यदि 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होता है तो आधी आबादी को उनके अधिकारों के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।
विपक्ष पर मुख्यमंत्री का तीखा हमला
योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर आरोप लगाया कि इन दलों ने लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि संशोधन का मकसद 2029 में ही आरक्षण लागू करना था, लेकिन विपक्षी दलों के रुख से यह प्रक्रिया प्रभावित हुई।
16-17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश महत्वपूर्ण प्रस्ताव गिर जाने के बाद विपक्षी सदस्यों ने एक-दूसरे को बधाई दी और नारेबाजी की। मुख्यमंत्री ने इसे “कलंक” बताते हुए कहा कि जो लोग काले कर्मों से राजमहल सजाते हैं, वे इतिहास में कलंक बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि पूरा सदन और पूरा देश इस आचरण से आहत हुआ है।
महिलाओं के सशक्तीकरण में केंद्र सरकार की भूमिका
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के लिए शुरू की गई योजनाओं का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जनधन योजना के तहत स्वतंत्र भारत में पहली बार महिलाओं के नाम पर जीरो बैलेंस बैंक खाते खोले गए। करीब 30 करोड़ महिलाओं को इस योजना का लाभ मिला। पहले महिलाओं को योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था और बीच में कमीशन कट जाता था।
कोविड काल में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लाभ सीधे महिलाओं के खातों में पहुंचने लगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने उस समय भी इन योजनाओं का मजाक उड़ाया और 15 लाख रुपये वाले पुराने वादे का मुद्दा उठाकर महिलाओं का अपमान किया।

स्वच्छ भारत अभियान और महिलाओं की गरिमा
योगी आदित्यनाथ ने स्वच्छ भारत अभियान को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जोड़कर देखा। अक्टूबर 2014 में शुरू हुए इस अभियान के तहत ‘हर घर शौचालय’ बनाए गए। पूरे देश में 12 करोड़ शौचालय बने, जबकि उत्तर प्रदेश में 2 करोड़ 61 लाख शौचालय बनाए गए।
उन्होंने बताया कि सपा शासन के ढाई वर्ष में केवल 40-41 लाख शौचालय बन पाए थे, जबकि डबल इंजन सरकार के आने के बाद डेढ़ वर्ष में ही दो करोड़ से अधिक शौचालय तैयार हो गए। पहले महिलाएं खुले में शौच के लिए मजबूर थीं और समाजवादी पार्टी के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं भी हुईं जहां महिलाओं की गरिमा का अपमान हुआ। स्वच्छ भारत अभियान ने न सिर्फ महिलाओं की गरिमा बचाई बल्कि बीमारियों जैसे इंसेफेलाइटिस से होने वाली मौतों को भी काफी हद तक कम किया।
आवास योजना और मालिकाना अधिकार
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे देश में 4 करोड़ गरीब परिवारों को आवास दिए गए, जिनमें उत्तर प्रदेश के 65 लाख परिवार शामिल हैं। सपा सरकार में एक भी आवास नहीं बना, जबकि पिछले 9 वर्षों में 65 लाख आवास बनाए गए और इनमें अधिकांश महिलाओं के नाम पर हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों को उनके मकान का पूर्ण मालिकाना अधिकार भी मुख्य रूप से महिलाओं के नाम पर दिया जा रहा है। पूरे देश में तीन करोड़ परिवारों को यह अधिकार मिला है, जिनमें उत्तर प्रदेश में एक करोड़ से अधिक परिवार शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की महिला कल्याण योजनाएं
2017 में सरकार बनते ही मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शुरू की गई। अब तक 6 लाख बेटियों की शादी इस योजना के तहत हो चुकी है। कन्या सुमंगला योजना के माध्यम से बेटी के जन्म से स्नातक तक की पढ़ाई के लिए 25,000 रुपये का पैकेज दिया जा रहा है, जिसका लाभ 26 लाख बेटियों को मिल रहा है।
इन योजनाओं का भी विपक्ष ने विरोध किया था। इसके अलावा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद की। उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप स्थापित हुए हैं, जिनमें आधे से ज्यादा महिलाओं द्वारा संचालित हैं।
उज्ज्वला योजना और स्वास्थ्य सुविधाएं
कांग्रेस और सपा शासन में एलपीजी सिलेंडर मिलना मुश्किल था और काला बाजार में महंगे दामों पर बिकते थे। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10 करोड़ महिलाओं को फ्री एलपीजी कनेक्शन दिए गए। आयुष्मान भारत योजना के तहत 50 करोड़ महिलाओं को 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। लखपति दीदी योजना से 3 करोड़ महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश में ई-सखी और बैंकिंग सखी गांव-गांव में काम कर रही हैं। बुंदेलखंड से वाराणसी तक महिलाएं मिल्क प्रोड्यूसर समूहों, स्टार्टअप और विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही हैं।
सपा का इतिहास और महिलाओं के प्रति रुख
योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के 1995 के स्टेट गेस्ट हाउस कांड का जिक्र किया, जिसमें प्रदेश की पहली दलित मुख्यमंत्री मायावती के साथ अपमानजनक व्यवहार हुआ था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने मायावती जी को समर्थन देकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की। बदायूं जैसी घटनाओं पर सपा नेताओं के बयानों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधी आबादी के उन्नयन, सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से जुड़े हर प्रगतिशील कदम का विपक्ष ने विरोध किया है। उन्होंने विपक्ष को “महिलाओं के श्राप से शापित” बताते हुए कहा कि कांग्रेस की दुर्गति सबके सामने है और सपा भी उसी रास्ते पर चल रही है।
महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व की जरूरत
वेलफेयर स्कीम्स से आगे बढ़कर अब महिलाओं को नीति-निर्धारण और कानून-निर्माण में प्रभावी भागीदारी मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से बेहतरीन प्रदर्शन कर रही हैं, तो उन्हें राजनीतिक ताकत भी देनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस चर्चा से महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर और प्रभावी बहस हो सकेगी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में कई काम हुए हैं, लेकिन राजनीतिक आरक्षण के माध्यम से उनकी निर्णायक भागीदारी बढ़ेगी।
यह विशेष सत्र महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण पर राष्ट्रीय स्तर की बहस को उत्तर प्रदेश में ले जाने का प्रयास है। मुख्यमंत्री ने सभी दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा करें ताकि महिलाओं को उनका हक मिल सके।
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