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Monday, May 23, 2022

HM अमित शाह की बडी पहल, J&K में शहीद हुए 4 सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को दी नौकरी

नई दिल्ली /खुशबू पाण्डेय : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू और कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं में शहीद हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को जम्मू में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति आदेश सौंपे। इस अवसर पर जम्मू –कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह तथा जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह भी मौजूद थे। बाद में अमित शाह ने शहीद सुरक्षाकर्मियों के परिजनों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के इन बहादुर सुरक्षाकर्मियों द्वारा दिखाए गए साहस और प्रतिबद्धता पर पूरे राष्ट्र को गर्व है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री केंद्र शासित प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अक्टूबर 2021 में जम्मू और कश्मीर की अपनी पिछली यात्रा के दौरान श्रीनगर में शहीद निरीक्षक परवेज अहमद डार के घर गए थे और 2019 में उन्होने शहीद इंस्पेक्टर अरशद खान की पत्नी को नियुक्ति पत्र सौंपा था।

—अमित शाह ने जम्मू में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति आदेश सौंपे
—सुरक्षाकर्मियों द्वारा दिखाए गए साहस और प्रतिबद्धता पर राष्ट्र को गर्व

गृह मंत्री ने कई मौकों पर और मंचों पर जम्मू और कश्मीर में शांति बहाल करने में जम्मू और कश्मीर पुलिस की भूमिका की सराहना की है। अमित शाह ने जिन लोगों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति आदेश प्रदान किए उनमें पूजा देवी को जम्मू जिले में पंचायत सचिव नियुक्त किया गया है। वे स्वर्गीय सार्जेंट रोहित कुमार की पत्नी हैं। सार्जेंट रोहित कुमार को जून 2011 में जम्मू और कश्मीर कार्यकारी पुलिस में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त किया गया था। वे अपने करियर की शुरुआत से ही आतंकवाद विरोधी अभियानों से जुड़े रहे और आतंकवाद विरोधी ग्रिड में सबसे आगे रहे।

उनकी वीरतापूर्ण कार्रवाई के लिए उन्हें 07 जुलाई 2017 को कांस्टेबल के पद से सार्जेंट के रूप में पदोन्नत किया गया था। 12 जनवरी 2022 को कुलगाम जिले के एक पुलिस दल ने सेना के साथ, कुलगाम के गांव सहपोरा परिवान (Sehpora Pariwan) में आतंकवादियों की मौजूदगी की विशेष सूचना पर घेराबंदी की और तलाशी अभियान शुरू किया। जब नागरिकों को निकाला जा रहा था तब आतंकवादियों ने पुलिस पार्टी पर गोलीबारी की जिसके परिणामस्वरूप सेना के तीन जवान और सार्जेंट रोहित कुमार घायल हो गए, जिन्होंने बाद में दम तोड़ दिया। इस मुठभेड़ में पाकिस्तान के एक खूंखार आतंकवादी बाबर का भी सफाया कर दिया गया था।

हैड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब शाह के बेटी इफरा याकूब को नौकरी

सुश्री इफरा याकूब को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में अर्दली सह चौकीदार (Orderly cum Chowkidar) के पद पर नियुक्त किया गया है। वे स्वर्गीय हैड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब शाह के बेटी हैं। हैड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब शाह फरवरी 1992 में जम्मू-कश्मीर सशस्त्र पुलिस में कांस्टेबल के रूप में शामिल हुए थे। 13 अगस्त 2014 को अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद हैड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब शाह एक पुलिस जिप्सी में अपने कंपनी मुख्यालय बिजबेहरा, अनंतनाग जा रहे थे तब पुलवामा के गलांदर पंपोर में आतंकवादियों ने उनकी गाड़ी पर हमला किया। इस घटना में हैड कांस्टेबल मोहम्मद याकूब शाह ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। वे अपने पीछे वृद्ध माता-पिता, पत्नी, नाबालिग बेटे और बेटी छोड़ गए।

कांस्टेबल बशीर अहमद शेख के पुत्र आबिद बशीर को फ़ोलोवर बनाया

आबिद बशीर को जम्मू-कश्मीर पुलिस में फ़ोलोवर (Follower) के पद पर नियुक्त किया गया है। वे स्वर्गीय कांस्टेबल बशीर अहमद शेख के पुत्र हैं। कांस्टेबल बशीर अहमद शेख को जुलाई 1991 में जम्मू-कश्मीर कार्यकारी पुलिस में कांस्टेबल के रूप में नियुक्त किया गया था और वे अपनी मृत्यु तक श्रीनगर जिले में तैनात रहे। 29/30 जनवरी 2000 की मध्यरात्रि के दौरान, आतंकवादियों ने रबीतर ब्रिज, गांदरबल में एक पुलिस दल पर हमला किया जिसमें कांस्टेबल बशीर अहमद शेख ने प्राण दे दिये। वे अपने पीछे पत्नी और नाबालिग बेटे व बेटी को छोड़ गए थे।

फ़ोलोवर मुश्ताक अहमद के पुत्र मोहसिन को दी नौकरी

मोहसिन मुश्ताक को जम्मू-कश्मीर पुलिस में फ़ोलोवर (Follower) के रूप में नियुक्ति दी गई है। वे दिवंगत फ़ोलोवर मुश्ताक अहमद के पुत्र हैं। मुश्ताक अहमद मई 1990 में जम्मू-कश्मीर पुलिस में शामिल हुए थे और वे अपनी मृत्यु तक जेकेएपी (JKAP) की 8वीं बटालियन में तैनात रहे। 09 मई 1993 को आतंकवादियों ने बांदीपोरा में मुख्य मार्ग कुनान पर बीएसएफ के एक गश्ती दल पर गोलीबारी की। सुरक्षा बलों ने जवाबी फायरिंग की जिसमें एक आतंकवादी मारा गया, हालांकि क्रॉस फायर में फ़ोलोवर मुश्ताक अहमद की भी मृत्यु हो गई। मृतक अपने पीछे वृद्ध माता-पिता और एक पुत्र छोड़ गए थे जो उस समय केवल चार माह का था।

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