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Saturday, January 17, 2026

मणिपुर में भारी बारिश और बाढ़ से स्कूल-कॉलेज बंद, कई इलाके जलमग्न

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इम्फाल। मणिपुर में लगातार हो रही भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ ने हालात बिगाड़ दिए हैं। राज्य सरकार ने मंगलवार को सभी स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षिक संस्थानों को बंद करने का ऐलान किया है। यह फैसला इम्फाल घाटी और राज्य के बाकी हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति को देखते हुए लिया गया है।

शिक्षा विभागों की नोटिफिकेशन से साफ हुई बात

मणिपुर बाढ़ 2024 की वजह से यूनिवर्सिटी एंड हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर एल. राधाकांत ने एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें कहा गया कि मौजूदा मौसम की स्थिति के चलते राज्य और केंद्र सरकार के सभी कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हायर एजुकेशन संस्थान 16 सितंबर को बंद रहेंगे। दूसरी तरफ, एजुकेशन (स्कूल) डिपार्टमेंट के डायरेक्टर भोगेंद्र मैतेई ने अलग नोटिफिकेशन में बताया कि सभी सरकारी, प्राइवेट और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल भी मंगलवार को बंद रहेंगे। यह कदम भारी बारिश मणिपुर और उसके असर से बचाव के लिए उठाया गया है।

इरिल और वांगजिंग नदियों का कहर, खेती-बाड़ी बर्बाद

डिजास्टर मैनेजमेंट अधिकारियों के मुताबिक, रविवार रात को इम्फाल घाटी के कई हिस्सों में दो मुख्य नदियां – इरिल और वांगजिंग – ने बांध तोड़ दिए। इससे बड़े इलाकों में बाढ़ आ गई, जिसमें खेती की जमीनें और घर-आबादी डूब गई। लेटेस्ट रिपोर्ट्स बताती हैं कि इम्फाल ईस्ट जिला में इरिल नदी ने फसलें, सड़कें, पुल और घरों को पानी में डुबो दिया। वहीं, थौबल जिले में वांगजिंग नदी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही है, जिससे कई इलाके जलमग्न हो गए।

वांगजिंग कोडोमपोकपी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में लगाया गया रिलीफ कैंप भी पानी से भर गया। मणिपुर फ्लैश फ्लड की चपेट में कई गांव आ गए, जहां सड़क संपर्क कट गया। थौबल नदी पर बना यैरिपोक का आयरन ब्रिज भी बाढ़ के पानी में बह गया।

राहत कार्य तेज, 100 से ज्यादा लोग सुरक्षित

मणिपुर फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज की टीमों ने अब तक 100 से ज्यादा फंसे लोगों को बचाया है। इन्हें इम्फाल ईस्ट के यैरिपोक खोइरोम मयाई लেইकाई में रिलीफ सेंटर ले जाया गया। थौबल जिले के वांगखेम में कांग्रेस के मणिपुर राज्य अध्यक्ष केशम मेघाचंद्र सिंह का घर भी बाढ़ में डूब गया।

मौसम विभाग ने अगले दो दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है। जिला प्रशासन ने लोगों को चेतावनी दी कि बाढ़ वाले इलाकों से न गुजरें और बहते पानी में न उतरें। मणिपुर में बाढ़ सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि यहां की सांप्रदायिक अशांति से जूझ रही जनता पर एक और बोझ है। राज्य की राहत व्यवस्था पहले से ही कमजोर है, जो लोगों की सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है।

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