वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन संस्कृति को कोई पराजित नहीं कर सकता। जो लोग इसे मिटाने की कोशिश करते हैं, वे खुद इतिहास में गुम हो चुके हैं। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम में आयोजित ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में उन्होंने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के साथ हिस्सा लिया।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुजरात के सोमनाथ मंदिर में किए जा रहे कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी देखा गया। मुख्यमंत्री ने काशी और सोमनाथ को भारत की सभ्यता की अमर ज्योति बताया और कहा कि आध्यात्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का विकास भारत के स्वाभिमान को मजबूत कर रहा है।
सनातन की चेतना मंदिर की दीवारों से आगे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सनातन सिर्फ मंदिर की दीवारों तक सीमित नहीं है। यह भारत की चेतना में बसा हुआ है। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि मोहम्मद गोरी, महमूद गजनवी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं ने सनातन स्थलों पर कई बार हमले किए। सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण हुए, बाबा विश्वनाथ धाम को भी नुकसान पहुंचाया गया। लेकिन सनातन की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इन्हें मिटाया नहीं जा सका।
योगी जी ने कहा, “जिन्होंने सनातन को मिटाने की कोशिश की, वे खुद मिट्टी में मिल गए। आज उनके नाम तक लेने वाला कोई नहीं बचा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि विनाश तो क्षणिक होता है, लेकिन सनातन का सृजन शाश्वत है।
काशी और सोमनाथ: भारत की सभ्यागत चेतना के दो स्तंभ
सीएम योगी ने काशी और सोमनाथ को भारत की सांस्कृतिक चेतना के दो महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उत्तर में गंगा किनारे बाबा विश्वनाथ और पश्चिम में सागर तट पर भगवान सोमनाथ। दोनों जगहों ने सदियों तक स्वाभिमान और आध्यात्मिक परंपरा को जीवित रखा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हो रहे विकास कार्यों का जिक्र किया। सोमनाथ मंदिर का सौंदर्यीकरण, काशी विश्वनाथ धाम का विस्तार, महाकाल लोक, अयोध्या राम मंदिर जैसी परियोजनाएं सनातन परंपरा को नई ऊर्जा दे रही हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की कल्पना इन प्रयासों से साकार हो रही है।
सरदार पटेल और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का संकल्प
मुख्यमंत्री ने स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल का उदाहरण दिया। उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। तब भी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने उन्हें पार कर लिया। यह निर्माण दासता से मुक्ति और राष्ट्र के आत्मगौरव का प्रतीक था।
योगी जी ने प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का भी नाम लिया। 75 साल पहले, तब की सरकार के विरोध के बावजूद वे सोमनाथ पुनर्प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे। इससे साफ होता है कि राष्ट्र के प्रतीकों को मजबूत करने का भाव हमेशा से रहा है।
कुछ शक्तियां विकास नहीं देखना चाहतीं
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास को पसंद नहीं करते। उन्होंने सोमनाथ और अयोध्या राम मंदिर निर्माण के दौरान आई बाधाओं का जिक्र किया। लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ये बाधाएं दूर हो रही हैं और आज पूरा देश इन पर्वों को मनाने में जुटा है।
समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल बनाया शिवमय
‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में सिर्फ भाषण ही नहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को आध्यात्मिक गंगा में डुबकी लगाई। कथक नृत्यांगना अंकिता भट्टाचार्या ने शिव तांडव नृत्य पेश किया। डॉ. दिव्या श्रीवास्तव और उनकी टीम ने भगवान सोमनाथ की स्तुति गाई। बनारस घराने के अंशुमान महाराज ने सरोद वादन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस मौके पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मंत्री अनिल राजभर, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, विभिन्न विधायकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
सनातन स्वाभिमान का पुनर्जागरण
यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की जड़ों से जुड़ने का माध्यम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मगौरव को फिर से मजबूत करने का प्रयास है। काशी विश्वनाथ धाम से जुड़े इस महोत्सव ने हजारों लोगों को एक साथ आध्यात्मिक अनुभूति दी।
योगी आदित्यनाथ ने अंत में सभी को संदेश दिया कि सनातन संस्कृति की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि कोई भी आक्रमण या विरोध इसे कमजोर नहीं कर सकता। विकास और संरक्षण के इस सफर में हर भारतीय का योगदान जरूरी है।
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