तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को अपना पहला भाषण देते हुए सनातन धर्म को लोगों को बांटने वाला बताते हुए उसे खत्म करने की बात कही। यह बयान नए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की मौजूदगी में दिया गया। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में DMK की करारी हार के बाद यह बयान सामने आया है, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। बीजेपी ने इसे तीखा हमला बताया है।
उदयनिधि का पहला भाषण और विवादित टिप्पणी
डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में पहली बार बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि “लोगों को बांटने वाले सनातन धर्म को खत्म कर देना चाहिए।”
उन्होंने अपने भाषण में DMK के पुराने नेताओं अन्नादुरई, करुणानिधि और एमके स्टालिन का धन्यवाद दिया। उदयनिधि ने कहा कि DMK सत्ता में हो या विपक्ष में, तमिलनाडु की भलाई के लिए काम करती रहेगी। उन्होंने सीएम विजय से सहयोग की अपील की और कहा कि दोनों एक ही कॉलेज में पढ़े हैं, लेकिन राजनीति में वे सीनियर हैं।
इसी भाषण के बीच उन्होंने सनातन पर अपनी टिप्पणी दोहराई। इससे पहले 2023 में डिप्टी सीएम रहते हुए उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना मलेरिया और डेंगू से की थी और कहा था कि इन्हें मिटाना चाहिए। उस समय भी बड़े विवाद हुए थे और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
VIDEO | Chennai, Tamil Nadu: "Sanathanam that divides people should be abolished," says LoP Udhayanidhi Stalin.
Source: Third Party
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/uHH7CEQmeP
— Press Trust of India (@PTI_News) May 12, 2026
चुनाव परिणाम और नई भूमिका
हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में DMK को भारी हार का सामना करना पड़ा। पूर्व सीएम एमके स्टालिन चुनाव हार गए और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। अभिनेता विजय की तमिलागा वेट्ट्री कझगम (TVK) ने सरकार बनाई और विजय नए मुख्यमंत्री बने। उदयनिधि स्टालिन को अब DMK का नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है।
विधानसभा में उदयनिधि ने कहा, “यह मेरे LoP के तौर पर पहला मौका है। मैं चाहता हूं कि हम TN की भलाई के लिए मिलकर काम करें।”
वंदे मातरम और तमिल थाई वास्थु का मुद्दा
उदयनिधि ने शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम गाए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में ऐसा नहीं होता, लेकिन तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने 2023 के गवर्नर आरएन रवि के वॉकआउट का भी उल्लेख किया, जहां तमिल राज्य गान पहले गाया गया था।
बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया
उदयनिधि के बयान पर बीजेपी ने तेजी से जवाब दिया। बीजेपी प्रवक्ता सीआर केसवन ने इसे “जहरीला बकवास” बताया। उन्होंने कहा कि बार-बार गलती करने वालों को याद रखना चाहिए कि तमिलनाडु के राज्य प्रतीक में मंदिर का गोपुरम है। तमिलनाडु के लोग अपनी आस्था का अपमान नहीं भूलते और न माफ करते हैं।
केसवन ने उदयनिधि को “तमिलनाडु के राहुल गांधी” कहा और आरोप लगाया कि वे बांटने वाली राजनीति करते हैं। उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और सेंगोल का जिक्र करते हुए कहा कि डीएमके की परंपरा ऐसी ही रही है। साथ ही कार्तिगई दीपम और दीपावली जैसे त्योहारों पर पार्टी के रुख का भी जिक्र किया।
चुनाव परिणाम और राजनीतिक पृष्ठभूमि
हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके को भारी हार का सामना करना पड़ा। एमके स्टालिन अपनी सीट हार गए और पार्टी सत्ता से बाहर हो गई। इसके बाद उदयनिधि स्टालिन को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।
डीएमके लंबे समय से द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा को आगे बढ़ाती रही है। उदयनिधि के परिवार की राजनीति में भी यह मुद्दा अक्सर चर्चा में रहता है। इस बार उन्होंने विपक्ष की बेंच से बोलते हुए फिर से सनातन पर सवाल उठाया।
क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार
यह बयान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में नई सरकार बनी है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार में सनातन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है। कई लोग इसे चुनावी हार के बाद विपक्ष की रणनीति मान रहे हैं, जबकि डीएमके इसे अपनी मूल विचारधारा से जोड़कर देखती है।
उदयनिधि स्टालिन ने अपने भाषण में डीएमके को सिर्फ विपक्षी पार्टी नहीं बल्कि ताकतवर विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी चाहे सत्ता में हो या बाहर, तमिलनाडु के लोगों के लिए लड़ती रहेगी।
तमिलनाडु की राजनीति में सनातन, जाति, भाषा और सांस्कृतिक मुद्दे लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। उदयनिधि का यह बयान इन मुद्दों को फिर से सुर्खियों में ला गया है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

