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‘सत्ता की लिप्सा में हुए भारत के टुकड़े’, विभाजन विभीषिका दिवस पर लखनऊ में गरजे सीएम योगी आदित्यनाथ

लखनऊ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने मौन यात्रा निकाली और कांग्रेस पर शत्रु संपत्ति की बंदरबांट का आरोप लगाते हुए सशक्त भारत का आह्वान किया।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 1947 में हुए देश के विभाजन को मानव इतिहास का सबसे वीभत्स और क्रूर अध्याय करार देते हुए कहा कि सत्ता की प्रचंड लिप्सा के कारण एक महान सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के राज्यस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह करोड़ों परिवारों के विस्थापन, असीम यातनाओं और भयानक नरसंहार का एक अमिट दर्दनाक इतिहास है। उन्होंने आह्वान किया कि देशवासियों को अपनी विविध क्षेत्रीय पहचानों से ऊपर उठकर सर्वप्रथम ‘भारतीय’ होने का गौरव महसूस करना चाहिए और आंतरिक विभाजनकारी ताकतों को परास्त कर एक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।

कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राजधानी लखनऊ में एक ऐतिहासिक मौन पदयात्रा निकाली गई। हजरतगंज स्थित लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के उपरांत शुरू हुई यह यात्रा लोकभवन तक पहुँची। लगभग आधा किलोमीटर लंबी इस मौन यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं ‘देश नहीं झुकने देंगे, फिर देश नहीं बंटने देंगे’ का संदेश लिखा पोस्टर हाथों में थामे नज़र आए। उनके साथ उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, सांसद बृजलाल, पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक डॉ. नीरज बोरा और जयदेवी सहित कई जनप्रतिनिधि और विस्थापित परिवारों के सैकड़ों प्रतिनिधि मौजूद थे।

इतिहास को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रखें, आने वाली पीढ़ियों को सच्चाई बताएं

समारोह में प्रदर्शित डिजिटल चित्रों और प्रामाणिक अभिलेखों की प्रदर्शनी का गहन अवलोकन करने के बाद मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाना केवल अतीत के पन्नों को पलटने या किसी अकादमिक औपचारिकता तक सीमित नहीं है। इतिहास का वास्तविक उद्देश्य हमें अतीत के गौरव से परिचित कराने के साथ-साथ पूर्व में हुई गंभीर ऐतिहासिक भूलों से सीख लेकर उन्हें भविष्य में न दोहराने की सख्त चेतावनी देना है।

सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का राष्ट्रीय निर्णय इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है। वर्तमान पीढ़ी और भावी संतानों को यह निष्पक्षता से बताया जाना आवश्यक है कि वे कौन सी परिस्थितियाँ थीं जिन्होंने देश को विभाजन की विभीषिका में झोंका, इसके पीछे कौन से राजनीतिक दल व कौन से चेहरे दोषी थे, उन दोषियों को क्या सजा मिली और उस अदूरदर्शी फैसले का खामियाजा देश को किस रूप में चुकाना पड़ा। उन्होंने प्रदेश के प्रबुद्ध नागरिकों और अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को इस त्रासदी के ऐतिहासिक तथ्यों से अवश्य अवगत कराएं।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: मुख्य बिंदु व आंकड़े

  • विस्थापन व त्रासदी: करोड़ों हिंदुओं, सिखों, बौद्धों व जैनों का पलायन
  • पंजाब में नरसंहार: अकेले पंजाब क्षेत्र में लाखों निर्दोषों की शहादत
  • प्राचीन अर्थव्यवस्था: 16वीं-17वीं सदी में वैश्विक GDP में भारत का अंश 24-25%
  • पुनर्वास कार्य: लखीमपुर खीरी में ~16,000 विस्थापितों को नागरिकता
  • पीलीभीत व रामपुर: बांग्लादेश व पाक से आए विस्थापितों को भूमि अधिकार

सत्ता लोलुपता के कारण निर्दोष नागरिकों ने चुकाई विभाजन की भारी कीमत

1947 के उस दौर को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत को स्वतंत्रता तो मिली, परंतु उसके साथ ही देश के भूगोल पर एक गहरा घाव भी दे दिया गया। पंजाब और बंगाल के ऐतिहासिक एवं आर्थिक रूप से समृद्ध हिस्सों को काट कर नवगठित पाकिस्तान के सुपुर्द कर दिया गया। उन क्षेत्रों में सदियों से निवास कर रहे गैर-मुस्लिम समुदाय—हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन—अपनी ही पैतृक जन्मभूमि पर अचानक बेगाने और असुरक्षित हो गए।

लाखों परिवारों को रातों-रात अपनी चल-अचल संपत्ति, व्यापार और घर-बार छोड़कर शरणार्थी शिविरों की ओर भागना पड़ा। इस पलायन के दौरान जो निर्मम नरसंहार और माताओं-बहनों पर अत्याचार हुए, वे आज भी रोंगटे खड़े कर देते हैं। अकेले पंजाब क्षेत्र में लाखों निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। शरणार्थियों से भरी ट्रेनों में हुए सुनियोजित सांप्रदायिक हमलों और हिंसा की घटनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्दोष लोगों ने उस सत्ता लिप्सा की कीमत अपने खून से चुकाई। विभाजन का यह दर्द केवल उसी दौर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश को आगे चलकर दशकों तक आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के रूप में इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

आर्थिक वैभव और शक्ति के बावजूद आंतरिक फूट के कारण भारत गुलाम बना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत के समृद्ध इतिहास और उसकी तत्कालीन आर्थिक शक्ति का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमारे देश के पास कभी भी बौद्धिक क्षमता, सैन्य पराक्रम या धन-धान्य की कोई कमी नहीं रही। 16वीं और 17वीं शताब्दी के प्रामाणिक वैश्विक आर्थिक आंकड़ों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि उस युग में दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था (वैश्विक जीडीपी) में अकेले भारत की हिस्सेदारी लगभग 24 से 25 प्रतिशत हुआ करती थी।

भारत विश्व का सबसे संपन्न और वैभवशाली राष्ट्र था, और यही अकूत धन-संपदा विदेशी आक्रांताओं के आकर्षण का मुख्य कारण बनी। मुख्यमंत्री ने यक्ष प्रश्न उठाते हुए पूछा कि जब हमारे पास शौर्य, बुद्धि और अपार संपत्ति सब कुछ था, तो आखिर भारत सदियों तक गुलामी की बेड़ियों में क्यों जकड़ा रहा? इसका उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सबसे बड़ी दुर्बलता हमारा आंतरिक विभाजन और आपसी अंतर्विरोध था।

जब समाज जाति, क्षेत्र, पंथ और भाषा के आधार पर छिन्न-भिन्न हो जाता है और जब एक वर्ग यह सोचकर चुप बैठ जाता है कि आक्रमण किसी दूसरे समुदाय या क्षेत्र पर हो रहा है, तब षड्यंत्रकारी और आक्रामक ताकतों को पैर जमाने का अवसर मिल जाता है। इसी संकीर्ण सोच और आंतरिक फूट ने एक विराट सनातन राष्ट्र को कमजोर किया और समय-समय पर इसके भौगोलिक टुकड़े होते चले गए।

संकीर्ण अस्मिताओं से ऊपर उठकर ‘सर्वप्रथम भारतीय’ होने का भाव जगाएं

आज़ादी की लड़ाई के अमर नायकों को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, पंडित राम प्रसाद बिस्िमल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशन सिंह, महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जैसे अनगिनत महापुरुषों ने भारत की स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

पूर्ववर्ती सरकारों पर राजनीतिक प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थाओं, योजनाओं और सार्वजनिक स्थलों का नामकरण केवल एक विशिष्ट राजनीतिक परिवार के नाम पर कर दिया गया, जबकि देश की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले असंख्य गुमनाम क्रांतिकारियों के योगदान को इतिहास के पन्नों में उपेक्षित कर दिया गया।

सीएम योगी ने दोटूक शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान पंजाबी, बंगाली, मराठी, तमिल, कन्नड़, मलयाली या उत्तर प्रदेशीय हो सकती है, परंतु हमारी राष्ट्रीय अस्मिता केवल और केवल ‘भारतीय’ है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग समाज को जातियों और क्षेत्रों के आधार पर बांटने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं, वे अनजाने में उन देशविरोधी ताकतों के हाथों का खिलौना बन रहे हैं जो भारत को पुनः कमजोर देखना चाहती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों या पुलिस बलों का दायित्व नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का यह परम कर्तव्य है कि वह देश की आंतरिक एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखे।

सीएए पर फैलाया गया भ्रम, विपक्ष ने की उपद्रव कराने की साजिश

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विस्तृत संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इस मानवीय कानून को लेकर विरोधी दलों ने देश भर में योजनाबद्ध तरीके से अफवाहें और भ्रम फैलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून का एकमात्र उद्देश्य पड़ोसी देशों—पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान—में धार्मिक उत्पीड़न और अत्याचार झेलकर भारत आए प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई) को सम्मानजनक भारतीय नागरिकता प्रदान करना था।

इस कानून में किसी भी भारतीय नागरिक की संपत्ति, ज़मीन या नागरिकता छीनने का कोई दूर-दूर तक प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक के समीकरण साधने के लिए देश भर में हिंसक आंदोलनों और उपद्रव की पटकथा लिखी गई। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ, कानपुर, मेरठ, संभल, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे संवेदनशील जिलों में उपद्रव कराने के कुत्सित प्रयास किए गए। हालांकि, राज्य सरकार की मुस्तैद कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कड़ाई के कारण असामाजिक तत्वों के मंसूबे पूरी तरह नाकाम कर दिए गए और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही।

वोट बैंक की राजनीति के लिए मौन रहा विपक्ष, यूपी सरकार ने दिया विस्थापितों को हक

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तुष्टिकरण की संकीर्ण राजनीति के कारण इन दलों ने हमेशा विस्थापितों के मानवीय अधिकारों की उपेक्षा की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बांग्लादेश या पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार और हिंसक हमले होते हैं, तब ये राजनीतिक दल मौन धारण क्यों कर लेते हैं? विभाजन के बाद भारत आए लाखों शरणार्थी परिवार दशकों तक केवल एक वैध पहचान पत्र और ज़मीन के मालिकाना हक के लिए सरकारी दफ़्तरों के चक्कर काटते रहे, परंतु पिछली सरकारों ने उनके पुनर्वास के लिए कोई गंभीर कदम नहीं उठाए।

इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए विस्थापित परिवारों की सुध ली है:

  • पीलीभीत जिला: बांग्लादेश से आए हजारों विस्थापित परिवारों के वर्षों पुराने राजस्व अभिलेखों व दस्तावेजों को दुरुस्त कर उन्हें विधिवत भूमि के मालिकाना पट्टे और कानूनी अधिकार पत्र सौंपे गए।
  • लखीमपुर खीरी जिला: पड़ोसी देशों से प्रताड़ित होकर आए लगभग 16,000 हिंदू विस्थापितों को प्रक्रिया पूरी कर सम्मानजनक भारतीय नागरिकता और सुविधाएं प्रदान की गईं।
  • रामपुर जिला: पाकिस्तान से आए पीड़ित परिवारों के कानूनी दस्तावेजों के निस्तारण और नागरिकता प्रदान करने की त्वरित प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है।

शत्रु संपत्ति पर कांग्रेस का रहा ‘बंदरबांट’, सपा पर भी कसे तंज

विभाजन के समय भारत छोड़कर पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्तियों (शत्रु संपत्ति) का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 1947 के तुरंत बाद कांग्रेस सरकार का नैतिक दायित्व था कि वह पाकिस्तान से अपना सब कुछ गंवाकर भारत आए हिंदू-सिख शरणार्थियों को शत्रु संपत्तियों पर बसाती और उनकी खोई हुई संपत्तियों का मुआवजा देती।

इसके विपरीत, तत्कालीन कांग्रेस सरकारें और उनके नेता शत्रु संपत्तियों की अवैध सुरक्षा और उनमें आपसी ‘लूट-खसोट व बंदरबांट’ करने में व्यस्त रहे। उन्होंने महमूदाबाद के नवाब की अर्बों रुपये की शत्रु संपत्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि उस अवैध कब्जे को बचाने के लिए कांग्रेसी नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी थी। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह आज भी उन तत्वों की वकालत और पैरोकारी कर रही है, जिनकी ऐतिहासिक भूमिका देश के विभाजन और उसकी अखंडता को नुकसान पहुँचाने में रही है।

सोशल मीडिया के दौर में सतर्क रहें नागरिक, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के लिए हों एकजुट

डिजिटल युग की नई सुरक्षा चुनौतियों पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भारत विरोधी तत्व और समाज विरोधी ताकतें सोशल मीडिया व विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भ्रामक सूचनाएं (डिसइन्फॉर्मेशन) फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे समय में हर जागरूक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का खंडन करे, सही और प्रामाणिक तथ्यों को समाज के सामने लाए और राष्ट्रविरोधी एजेंडे को विफल करे।

उन्होंने कहा कि आज भारत आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरी तरह सुरक्षित है, ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के विजन के साथ तेज़ी से प्रगति कर रहा है और विश्व की सबसे तेजी से उभरती आर्थिक महाशक्तियों में शुमार हो चुका है। इस अभूतपूर्व विकास यात्रा को निर्बाध जारी रखने के लिए समाज के हर वर्ग को अपनी सहभागिता दर्ज करानी होगी।

समतावादी परंपरा, सामाजिक समरसता और आर्थिक आत्मनिर्भरता ही राष्ट्र निर्माण का आधार

राष्ट्र की आंतरिक मजबूती का खाका खींचते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई भी देश तब तक शक्तिशाली नहीं बन सकता जब तक उसका पूरा समाज एक समरस पहचान के साथ संगठित न हो। उन्होंने सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध स्थापित ‘खालसा पंथ’ तथा मध्यकालीन संत स्वामी रामानंद जी की ‘जाति-पाति पूछै न कोई, हरि को भजै सो हरि का होई’ की समतावादी सामाजिक परंपरा का विशेष उल्लेख किया।

सीएम योगी ने समाज से अपील की कि वे जातिगत विद्वेष, ऊंच-नीच और छुआछूत की कुरीतियों को पूरी तरह त्याग दें। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति निष्ठापूर्वक भारत माता के प्रति समर्पित है, वह हमारा सहोदर भाई है।

इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय संप्रभुता की पहली शर्त बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी समाज या राष्ट्र आर्थिक रूप से स्वावलंबी बने बिना अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रख सकता। इसीलिए राज्य सरकार अपनी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से किसानों, सूक्ष्म व लघु उद्यमियों (MSME), हस्तशिल्पियों, महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बना रही है।

विकसित भारत @2047 का सपना तब पूरा होगा जब विकसित होगा उत्तर प्रदेश

अपने संबोधन के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय संकल्प का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी (100 वर्ष) मनाएगा, तब ‘विकसित भारत’ का संकल्प तभी साकार होगा जब देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश पूर्णतः विकसित बनेगा। और उत्तर प्रदेश का विकास तभी संभव है जब राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश का प्रत्येक जिला, तहसील और गाँव आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेगा।

विकसित राष्ट्र की परिभाषा गढ़ते हुए सीएम योगी ने कहा कि असली विकास तब माना जाएगा जब समाज का अंतिम गरीब व्यक्ति गरीबी की रेखा से बाहर निकलेगा, मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आएगा, हर पारंपरिक दस्तकार और कारीगर एक सफल उद्यमी बनेगा, किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाकर समृद्ध होगा और हर परिवार अपने बच्चों को स्वावलंबन का संस्कार देगा।

विभाजन विभीषिका का यह स्मरण दिवस हमें अतीत की भयानक भूलों से सीख लेकर, राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बंधकर, आने वाली पीढ़ियों को सही इतिहास से अवगत कराने और एक सुरक्षित, समृद्ध, सशक्त व विकसित भारत के निर्माण में अपना सर्वस्व अर्पित करने का महान अवसर प्रदान करता है।

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