चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्य सभा सांसद तरुण चुग ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि राज्य में कृषि और ग्रामीण विकास की धीमी रफ्तार की वजह बजट या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि भगवंत मान सरकार की नीयत, नीतियों और प्रशासनिक क्रियान्वयन की पूर्ण विफलता है।
तरुण चुग के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पंजाब के अन्नदाताओं की आय में इजाफा करने, खेती-किसानी के आधुनिक ढाँचे को विकसित करने और ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करने के लिए ‘बीज से बाजार’ (Seed to Market) तक का एक मजबूत तंत्र तैयार किया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा फसल विविधीकरण, पराली निस्तारण, खाद्य प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क, मूल्य संवर्धन (Value Addition), ब्रांडिंग, आसान बैंकिंग ऋण और स्वयं सहायता समूहों के प्रोत्साहन के लिए भारी बजटीय प्रावधान किए गए हैं। इसके बावजूद, राज्य सरकार की ढिलाई और प्रशासनिक अक्षमता के चलते इन महत्वाकांक्षी योजनाओं का पूरा लाभ पंजाब के किसानों तक नहीं पहुँच पा रहा है।
केंद्र ने जारी किया फंड, लेकिन खर्च करने में पिछड़ी मान सरकार
राज्य सभा में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए लिखित उत्तरों का हवाला देते हुए तरुण चुग ने बताया कि वर्ष 2022-23 से 2025-26 की अवधि के दौरान केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र और अवशेष प्रबंधन के लिए पंजाब के खाते में बड़े पैमाने पर वित्तीय आवंटन किया।
- कुल स्वीकृत राशि : ₹1,246.25 करोड़ (फसल विविधीकरण व पराली हेतु)
- जारी की गई केंद्र राशि : ₹974.41 करोड़
- मान सरकार द्वारा खर्च : ₹827.12 करोड़
चुग ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार ने ₹974.41 करोड़ जारी कर दिए थे, तो पंजाब सरकार ₹827.12 करोड़ ही क्यों खर्च कर पाई? जो सरकार उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का भी पूरा इस्तेमाल न कर सके, उससे किसानों की खुशहाली की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
पराली को समस्या से संसाधन में बदलने का प्रयास
तरुण चुग ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने वायु प्रदूषण का कारण बनने वाली पराली की समस्या का स्थायी और स्थायी समाधान ढूंढने के लिए कदम उठाए हैं:
- मशीनरी पर सब्सिडी: आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर किसानों को 50 प्रतिशत तक और कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC) को 80 प्रतिशत तक की सहायता दी जा रही है।
- बायो-एनर्जी प्रोजेक्ट्स: बायो-सीएनजी और बायो-ऊर्जा इकाइयों के लिए आपूर्ति श्रृंखला खड़ी करने को 65 फीसदी तक पूंजीगत अनुदान दिया जा रहा है।
- फसल विविधीकरण: पानी की अधिक खपत वाली धान की फसल पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अंतर-मंत्रालयी समिति के माध्यम से इन योजनाओं की प्रगति का जायजा ले रही है, लेकिन पंजाब सरकार की इच्छाशक्ति की कमी के चलते अपेक्षित परिणाम धरातल पर नहीं दिख रहे।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में ₹1,663 करोड़ की परियोजनाएं
फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) सेक्टर के आंकड़ों को सामने रखते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि 2014 से पूर्व पंजाब में केवल 8 प्रसंस्करण इकाइयों को मंजूरी प्राप्त थी। वहीं, मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान 49 नई इकाइयों को स्वीकृति दी गई है।
प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत राज्य में कुल 79 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनकी कुल लागत ₹1,663.76 करोड़ है। इसके लिए ₹454.98 करोड़ की केंद्रीय सहायता राशि स्वीकृत की गई, जिसमें से ₹378.62 करोड़ पहले ही हस्तांतरित किए जा चुके हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कृषि उपज का मूल्य बढ़ाना और स्थानीय युवाओं को रोजगार देना है।
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण और स्व-सहायता समूहों को संबल
तरुण चुग ने बताया कि ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना’ (PMFME) के तहत पंजाब में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं:
- 3,506 सूक्ष्म इकाइयों को स्वीकृति: लगभग ₹1,309 करोड़ मूल्य की योजनाएं तैयार की गईं।
- बैंकिंग ऋण सहायता: विभिन्न बैंकों द्वारा लगभग ₹990 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए गए।
- स्वयं सहायता समूह (SHG): 1,404 महिला समूहों को बीज पूंजी (Seed Capital) प्रदान की गई।
- इन्क्यूबेशन सेंटर: पटियाला में नई प्रयोगशाला व इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किया गया।
इसके साथ ही स्थानीय कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और राष्ट्रीय विपणन (Marketing) के लिए केंद्र सरकार ने पूरा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया है।
पंजाब को एग्रो-इंडस्ट्रियल हब बनाने का विजन
तरुण चुग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लक्ष्य पंजाब को महज पारंपरिक धान-गेहूं के चक्र तक सीमित रखने का नहीं है, बल्कि राज्य को खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और ग्रामीण उद्यमिता का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब का किसान मेहनती है, लेकिन राज्य सरकार की नीतियों की विफलता उसे पीछे ढकेल रही है। यदि मान सरकार केंद्र की सभी योजनाओं को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ लागू करे, तो पंजाब पुनः देश का सबसे समृद्ध कृषि-औद्योगिक राज्य बन सकता है।
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