रायपुर। छत्तीसगढ़ की प्राचीन हथकरघा परंपरा और कोसा सिल्क को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ के खास मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के हथकरघा उत्पादों और पारंपरिक कोसा के लिए ‘कोशल फैब’ (Koshal Fab) नामक एक नए और प्रीमियम ब्रांड का औपचारिक शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के हथकरघा वस्त्रों को एक संगठित और मजबूत पहचान प्रदान करना है।
आधुनिक डिजाइन और विपणन से बढ़ेंगी संभावनाएं
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में पीढ़ियों से करघों पर कपड़ा बुन रहे कारीगरों के हुनर को अब नया विस्तार मिलेगा। ‘कोशल फैब’ ब्रांड के माध्यम से राज्य के बुनकरों की कला को आधुनिक डिजाइनों, आकर्षक पैकेजिंग और बेहतर मार्केटिंग नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे स्थानीय शिल्पकारों और बुनकर परिवारों के सीधे बड़े बाजारों तक पहुँचने का रास्ता साफ होगा।
हथकरघा हमारे देश की सभ्यता, संस्कृति और विरासत को एक सूत्र में पिरोने वाली विधा है।
हथकरघा से निर्मित हमारे जांजगीर-चांपा की कोसा की साड़ी और बस्तर के सिल्क की पूरे देश और दुनिया में धूम हैं।#NationalHandloomDay pic.twitter.com/GdpRLLmkLp
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) August 7, 2026
संस्कृति का संरक्षण और बुनकरों की आय में वृद्धि
यह पहल केवल कपड़ों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक धरोहर, शिल्प कला और बुनकरों के श्रम का सम्मान है। इससे पारंपरिक बुनाई से जुड़े परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, आय के नए स्रोत बनेंगे और युवा पीढ़ी को भी इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी। ‘कोशल फैब’ छत्तीसगढ़ी कोसा को राष्ट्रीय पटल पर एक विशिष्ट पहचान दिलाएगा।
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