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बिना गड्ढा खोदे और बिना पानी दिए उगेंगे पेड़! दंतेवाड़ा में ग्रामीणों ने एक दिन में बना डाले 1 लाख से अधिक ‘सीड बॉल’

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में जिला प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर एक दिन में 1 लाख से अधिक सीड बॉल बनाए हैं। जानिए कैसे इस तकनीक से बंजर पहाड़ियों को हरा-भरा किया जाएगा।

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रायपुर/दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले को पूरी तरह हरा-भरा बनाने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने मिलकर एक अभूतपूर्व पहल की है। इस साझा प्रयास के तहत जिले में एक दिवसीय ‘सीड बॉल निर्माण महाअभियान’ का आयोजन किया गया, जो एक बड़े जन-आंदोलन में बदल गया।

इस महाअभियान में स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं, स्कूली विद्यार्थियों, किसानों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस सामूहिक श्रमदान का सुखद परिणाम यह रहा कि मात्र एक ही दिन के भीतर 1 लाख से अधिक सीड बॉल तैयार कर लिए गए।

क्या होते हैं सीड बॉल और कैसे काम करती है यह तकनीक?

सीड बॉल (बीज गेंद) निर्माण वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने का एक बहुत ही सरल, वैज्ञानिक और जन-सहभागी तरीका है।

  • इसके तहत स्थानीय जलवायु के अनुकूल पेड़ों के बीजों को उपजाऊ मिट्टी और जैविक खाद (कंपोस्ट) के एक विशेष मिश्रण में लपेटकर छोटी-छोटी गोल गेंदें बना ली जाती हैं।
  • इन तैयार गेंदों को बारिश के मौसम में खाली, दुर्गम या बंजर जमीनों और पहाड़ियों पर बिखेर दिया जाता है।

जैसे ही बारिश का पानी इन सीड बॉल पर पड़ता है, मिट्टी और खाद के आवरण से बीजों को जरूरी नमी और पोषण मिल जाता है। इसके बाद ये बीज प्राकृतिक रूप से अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। इस आधुनिक तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक वृक्षारोपण की तरह न तो गड्ढे खोदने की मेहनत करनी पड़ती है, न ही पौधों को नियमित सिंचाई (पानी देने) की जरूरत होती है और न ही महंगे ट्री-गार्ड लगाने पड़ते हैं। इस वजह से बेहद कम लागत और न्यूनतम संसाधनों में बहुत बड़े क्षेत्र में हरियाली विकसित की जा सकती है।

बिना गड्ढा खोदे और बिना पानी दिए उगेंगे पेड़! दंतेवाड़ा में ग्रामीणों ने एक दिन में बना डाले 1 लाख से अधिक 'सीड बॉल'
बिना गड्ढा खोदे और बिना पानी दिए उगेंगे पेड़! दंतेवाड़ा में ग्रामीणों ने एक दिन में बना डाले 1 लाख से अधिक ‘सीड बॉल’

स्थानीय प्रजातियों के बीजों का हुआ चयन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन मंत्री श्री केदार कश्यप के दिशा-निर्देशों के अनुसार, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में इस पूरे महाअभियान की पुख्ता कार्ययोजना तैयार की गई थी। कृषि विभाग ने इस अभियान के लिए दंतेवाड़ा की स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुकूल विशेष प्रजातियों के बीजों का चयन किया। इनमें मुख्य रूप से महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, चार और खमार जैसी महत्वपूर्ण स्थानीय वन प्रजातियां शामिल हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों और महिला स्व-सहायता समूहों को पहले सीड बॉल तैयार करने का तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया।

बंजर पहाड़ियों पर फैलेगी हरियाली, ग्रामीणों को मिलेगी आजीविका

जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए इन 1 लाख से अधिक सीड बॉल को अब वन विभाग और स्थानीय ग्राम समितियों के आपसी सहयोग से जिले के चिन्हित वन क्षेत्रों, बंजर पहाड़ियों और अनुपजाऊ भूमियों में बिखेरा जाएगा। इस रचनात्मक कार्य से न केवल दंतेवाड़ा का हरित आवरण (ग्रीन कवर) बढ़ेगा, बल्कि मिट्टी के कटाव को रोकने, भूजल स्तर को सुधारने और क्षेत्र की जैव विविधता को अक्षुण्ण बनाए रखने में भी बड़ी मदद मिलेगी। इसके अलावा, भविष्य में जब ये सीड बॉल बड़े पेड़ों का रूप ले लेंगे, तो इनसे प्राप्त होने वाले लघु वनोपज (माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस) से स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और आर्थिक स्थिति को भी बड़ी मजबूती मिलेगी।

इस महाअभियान में विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की जनभागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि यदि प्रशासनिक संकल्प और वैज्ञानिक तकनीकों को जनता का साथ मिल जाए, तो पर्यावरण संरक्षण के बड़े से बड़े लक्ष्यों को भी आसानी से हासिल किया जा सकता है।

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