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नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव

Sachin Tendulkar Bastar Visit: नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बदलाव की मिसाल बनी बस्तर में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने आदिवासी बच्चों के साथ समय बिताया। बुधवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में पहुंचे सचिन तेंदुलकर ने बच्चों संग रस्साकशी और अन्य खेल गतिविधियों में हिस्सा लिया।

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Sachin Tendulkar Bastar Visit: नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बदलाव की मिसाल बनी बस्तर में क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने आदिवासी बच्चों के साथ समय बिताया। बुधवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के छिंदनार गांव में पहुंचे सचिन तेंदुलकर ने बच्चों संग रस्साकशी और अन्य खेल गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आज मैं आपसे ज्यादा खुश हूं, क्योंकि बच्चों से मिला दिल से प्यार अमूल्य है। यह दौरा नक्सल मुक्त बस्तर की ओर बढ़ते कदम और खेल के जरिए युवाओं के विकास की कहानी को मजबूत करता है।

सचिन तेंदुलकर का बस्तर दौरा: उम्मीद की नई किरण

भारत रत्न सचिन तेंदुलकर का छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में पहला दौरा कई मायनों में खास रहा। वर्षों तक नक्सल प्रभाव के कारण चर्चा में रहने वाला दंतेवाड़ा जिला अब खेल सुविधाओं और युवा विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सचिन तेंदुलकर ने अपने फाउंडेशन के जरिए यहां खेल मैदानों के विकास में योगदान दिया है। बुधवार को छिंदनार गांव पहुंचकर उन्होंने स्थानीय आदिवासी बच्चों के साथ मैदान में उतरकर खेला।

यह घटना न सिर्फ बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाई, बल्कि पूरे इलाके में उत्साह का माहौल बना दिया। सचिन तेंदुलकर बस्तर विजिट के दौरान बच्चों के साथ रस्साकशी खेलते नजर आए, जिससे हर कोई प्रभावित हुआ।

नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव
नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव

छिंदनार गांव में यादगार पल

दंतेवाड़ा के छिंदनार गांव में बुधवार को एक अनोखा नजारा देखने को मिला। जहां कभी हिंसा की खबरें आती थीं, वहां अब बच्चों की हंसी गूंज रही थी। सचिन तेंदुलकर जब बच्चों के बीच पहुंचे तो पूरा गांव उत्सव में बदल गया। उन्होंने आदिवासी बच्चों संग रस्साकशी की, वॉलीबॉल और अन्य खेल गतिविधियों में शामिल हुए।

बच्चों के लिए यह पल सपने जैसा था। जो खिलाड़ी उन्हें टीवी पर दिखता था, वही आज उनके साथ मैदान में खेल रहा था। बच्चों की आंखों में चमक और चेहरों पर खुशी साफ नजर आ रही थी। सचिन तेंदुलकर भी बच्चों की संगत में पूरी तरह सहज दिखे।

नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव
नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव

सचिन तेंदुलकर ने क्या कहा?

मंच से बच्चों और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए सचिन तेंदुलकर ने कहा, “आज मैं आप लोगों से ज्यादा खुश हूं। आपसे मुझे दिल से प्यार मिला है। यह मेरे लिए बहुत खास अनुभव है।” उन्होंने सरकार और प्रशासन का आभार जताया, जिनके सहयोग से उनके फाउंडेशन ने यहां काम किया।

सचिन ने अपने बचपन की याद ताजा करते हुए बताया कि जब उन्हें पता चला कि बस्तर के कई स्कूलों में खेल के मैदान नहीं हैं, तो उन्हें अपना बचपन याद आ गया। इसी वजह से उन्होंने इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया।

नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव
नक्सल मुक्त बस्तर में बच्चों संग रस्साकशी करते नजर आए सचिन तेंदुलकर, बोले- बच्चों से मिला प्यार अमूल्य अनुभव

सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की पहल

सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन मन्न देशी फाउंडेशन और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर दंतेवाड़ा में 50 खेल मैदानों का विकास कर रहा है। इनमें से कई मैदान तैयार हो चुके हैं, जहां क्रिकेट, वॉलीबॉल, एथलेटिक्स जैसी गतिविधियां हो सकती हैं। यह ‘मैदान कप’ पहल का हिस्सा है, जिसका मकसद बच्चों में खेल की आदत विकसित करना और उन्हें सकारात्मक दिशा देना है।

सचिन ने भावुक होकर परिवार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी अंजलि फाउंडेशन की कप्तान हैं, बेटी सारा इससे जुड़ी हुई हैं, जबकि बेटा अर्जुन क्रिकेट प्रतिबद्धताओं के कारण इस बार नहीं आ पाए।

बस्तर में बदलाव की तस्वीर

यह दौरा नक्सल प्रभावित बस्तर में सकारात्मक बदलाव की मिसाल पेश करता है। खेल सुविधाओं के विकास से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और इलाके की छवि धीरे-धीरे नई बन रही है। स्थानीय लोग और प्रशासन इस पहल को सराह रहे हैं।

सचिन तेंदुलकर बस्तर विजिट ने साबित किया कि खेल सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और सपनों को पूरा करने का जरिया भी हो सकता है। दंतेवाड़ा के छिंदनार जैसे गांव अब उम्मीद और प्रगति की कहानी कह रहे हैं।

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