नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। महिला थाना, पिंक बूथ, रानी झांसी स्क्वाड, वामिका पेट्रोलिंग वाहन, ऑल-वुमन पीसीआर वैन और सशक्ति कार्यक्रम जैसी पहलों के जरिए राजधानी में एक सुरक्षित और संवेदनशील पुलिसिंग व्यवस्था बनाई जा रही है। जून 2026 में शुरू हुए पहले पूर्ण महिला थाने के साथ ही दिल्ली पुलिस का चार ‘P’ मॉडल – प्रिवेंशन, प्रोटेक्शन, प्रॉम्प्ट इन्वेस्टिगेशन और पार्टिसिपेशन – महिलाओं के लिए भरोसा बढ़ा रहा है। ये प्रयास महिलाओं को बिना डर के सार्वजनिक जीवन जीने में मदद कर रहे हैं।
दिल्ली पुलिस का पहला महिला थाना शुरू
19 जून 2026 को नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के सब्जी मंडी इलाके में दिल्ली पुलिस का पहला पूर्ण महिला थाना शुरू किया गया। स्पेशल सीपी लॉ एंड ऑर्डर जोन-1 देवेश श्रीवास्तव ने इसकी जानकारी दी। यह थाना पूरे नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच करेगा। पहले से चल रही क्राइम अगेंस्ट वुमन (CAW) सेल को भी इसी थाने में शामिल कर लिया गया है।
इस थाने में मुख्य रूप से महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। यहां घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, छेड़छाड़, पीछा करना, यौन उत्पीड़न, रेप और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई और जांच होती है। इसका मुख्य उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक ऐसा माहौल देना है जहां वे बिना किसी डर या झिझक के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
दिल्ली पुलिस का चार ‘P’ वाला सिद्धांत
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के अनुसार, महिलाओं की सुरक्षा के लिए चार ‘P’ की नीति अपनाई जा रही है। ये हैं – प्रिवेंशन (अपराध रोकना), प्रोटेक्शन (सुरक्षा प्रदान करना), प्रॉम्प्ट इन्वेस्टिगेशन (त्वरित जांच) और पार्टिसिपेशन (समाज की भागीदारी)।
पुलिस की मौजूदगी से अपराधों को रोका जा रहा है। जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद दी जाती है। कई रेप और पॉक्सो मामलों में 15 से 20 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल की गई है। कुछ मामलों में 10 से 40 दिनों के भीतर दोषियों को सजा भी मिली है। यह तरीका महिलाओं के मामलों में तेजी और संवेदनशीलता ला रहा है।
राजधानी में 116 पिंक बूथ स्थापित
दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की मदद के लिए 116 पिंक बूथ बनाए हैं। इन बूथों पर महिला पुलिसकर्मी तैनात रहती हैं जो तुरंत सहायता पहुंचाती हैं। जनवरी 2026 में दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में मिरांडा हाउस कॉलेज के सामने पहला विशेष पिंक बूथ शुरू किया गया था। यह क्षेत्र छात्राओं की बड़ी संख्या के कारण संवेदनशील माना जाता है।
ये पिंक बूथ मिनी कंट्रोल रूम की तरह काम करते हैं। यहां सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर, वायरलेस सेट और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। महिलाएं यहां ई-एफआईआर दर्ज करा सकती हैं, साइबर अपराध की शिकायत कर सकती हैं, खोए सामान की रिपोर्ट दे सकती हैं और आपात स्थिति में मदद मांग सकती हैं। कई बूथ 24 घंटे चलते हैं और पूरी तरह महिला कर्मियों द्वारा संचालित होते हैं।
रानी झांसी स्क्वाड: महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष टीम
दिल्ली पुलिस ने ‘रानी झांसी स्क्वाड’ नाम की विशेष टीम बनाई है। यह टीम महिला पुलिसकर्मियों की है जो स्कूटी और अन्य वाहनों से कॉलेजों, बस स्टॉप, बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में गश्त करती है। स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि इसका उद्देश्य महिलाओं और छात्राओं के बीच सुरक्षा का भरोसा बढ़ाना और छेड़छाड़, स्टॉकिंग जैसी घटनाओं को रोकना है।
यह स्क्वाड कई संवेदनशील जगहों पर चौबीसों घंटे सक्रिय रहती है। सोशल मीडिया और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इसकी मौजूदगी से महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है।
छात्राओं के लिए ‘वामिका’ पेट्रोलिंग वाहन
दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में पढ़ने वाली छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने ‘वामिका’ नाम का विशेष पेट्रोलिंग वाहन शुरू किया है। यह महिला सुरक्षा के लिए समर्पित गश्ती वाहन है जो विश्वविद्यालय क्षेत्र और आसपास लगातार निगरानी रखता है।
वामिका का मकसद छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना, उनकी शिकायतों का तुरंत समाधान करना और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करना है। यह महिला-केंद्रित पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ऑल-वुमन पीसीआर वैन और हेल्पलाइन
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में ऑल-वुमन पीसीआर वैन तैनात की गई हैं। इनमें केवल महिला पुलिसकर्मी होती हैं जो संकट में फंसी महिलाओं को तत्काल मदद पहुंचाती हैं। इसके अलावा महिला हेल्पलाइन 1091 और आपातकालीन नंबर 112 हर समय उपलब्ध रहते हैं।
‘शिष्टाचार’ अभियान से छेड़छाड़ पर नियंत्रण
महिलाओं के खिलाफ सड़क पर होने वाली छेड़छाड़ और स्टॉकिंग की घटनाओं को रोकने के लिए ‘शिष्टाचार’ अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी, जागरूकता कार्यक्रम और तेज कार्रवाई की जाती है। इससे सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं के लिए बेहतर वातावरण बनाने में मदद मिल रही है।
सशक्ति कार्यक्रम: तीन करोड़ महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण
दिल्ली पुलिस का सशक्ति कार्यक्रम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा अभियान है। अब तक तीन करोड़ से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि यह दुनिया के सबसे बड़े सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग कार्यक्रमों में से एक है।
भविष्य की योजना: हर जिले में महिला थाना
स्पेशल सीपी देवेश श्रीवास्तव के अनुसार, दिल्ली पुलिस राजधानी के सभी 15 जिलों में महिला थाने खोलने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्ताव तैयार किए जा चुके हैं। अगर यह योजना लागू हो गई तो हर जिले में महिलाओं से जुड़े मामलों की अलग व्यवस्था हो जाएगी।
महिलाओं में भरोसा बढ़ाने की दिशा में प्रयास
ये सभी पहलें – महिला थाना, पिंक बूथ, रानी झांसी स्क्वाड, वामिका, ऑल-वुमन पीसीआर वैन – केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य महिलाओं के मन में भरोसा पैदा करना है। पुलिस अधिकारी मानते हैं कि सुरक्षा तभी पूरी होती है जब महिलाएं बिना किसी डर के शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन में पूरी भागीदारी कर सकें।
दिल्ली पुलिस इन प्रयासों के जरिए एक संवेदनशील, सुलभ और भरोसेमंद पुलिसिंग व्यवस्था विकसित करने की ओर लगातार आगे बढ़ रही है।
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