Kidney Health Tips: अमूमन लोग सेहत की बात आते ही दिल की देखभाल, फेफड़ों की स्थिति या वजन घटाने पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन शरीर के सबसे प्रमुख अंगों में शामिल किडनी की अनदेखी कर देते हैं। किडनी निरंतर शरीर के भीतर से जहरीले तत्वों को छानकर बाहर निकालने, खून की सफाई करने और रक्तचाप का संतुलन बनाए रखने जैसे बेहद अहम काम करती है। इसमें होने वाली खराबी की शुरुआत अक्सर बहुत धीमी होती है, जिसके लक्षण शुरुआती दौर में आसानी से पकड़ में नहीं आते। हालांकि, दिनचर्या में कुछ सरल और सकारात्मक बदलाव लाकर किडनी को लंबी उम्र तक निरोगी रखा जा सकता है।
1. पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन
किडनी की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने का सबसे प्राथमिक नियम शरीर में नमी का स्तर बनाए रखना है। जब शरीर में पानी का स्तर गिरता है, तो खून से अशुद्धियों को छानने में किडनी पर अनावश्यक जोर पड़ता है। उचित मात्रा में जल ग्रहण करने से मूत्र के माध्यम से विषैले तत्व आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
ध्यान रखने योग्य बात: पानी की दैनिक आवश्यकता हर इंसान की उम्र, शारीरिक परिश्रम, मौसम और स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से अलग होती है। अधिक गर्मी या पसीना बहाने वाले कार्यों में पानी की ज्यादा दरकार होती है, वहीं किसी चिकित्सकीय स्थिति में डॉक्टर पानी की सीमित मात्रा निर्धारित कर सकते हैं।
2. ब्लड प्रेशर का सटीक नियंत्रण
ब्लड प्रेशर का बढ़ा रहना सीधे तौर पर किडनी की बारीक नलिकाओं को क्षति पहुंचाता है, जिससे इसकी कार्यक्षमता घटने लगती है। चिकित्सकों का मानना है कि उच्च रक्तचाप और गुर्दे के रोग एक-दूसरे से सीधे तौर पर जुड़े हैं—असंतुलित बीपी किडनी को नुकसान पहुंचाता है और प्रभावित किडनी ब्लड प्रेशर को और अधिक बिगाड़ सकती है। इसलिए नियमित अंतराल पर रक्तचाप की जांच और डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।
3. संतुलित एवं पौष्टिक खानपान
आहार का सीधा असर किडनी की सेहत पर दिखता है। ज्यादा नमक, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, तैलीय व्यंजन और प्रिजर्वेटिव्स वाले प्रोसेस्ड फूड्स से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ती है। यह बढ़ा हुआ सोडियम बीपी और किडनी दोनों पर अतिरिक्त दबाव बनाता है।
किडनी के अनुकूल आहार तालिका:
- मौसमी ताजे फल और हरी सब्जियां
- साबुत अनाज का नियमित समावेश
- आवश्यकतानुसार सीमित प्रोटीन का सेवन
- प्रोसेस्ड और अतिरिक्त नमक वाले खाद्य पदार्थों से परहेज
4. शारीरिक रूप से सक्रिय रहना
प्रतिदिन हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करना गुर्दों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। रोज पैदल चलना, योग, साइकिल चलाना या तैराकी करने से शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और वजन नियंत्रण में रहता है। मोटापा, मधुमेह और हाई बीपी ही किडनी से जुड़ी बीमारियों की मुख्य जड़ हैं; ऐसे में एक एक्टिव जीवनशैली अपनाकर इन सभी जोखिमों से बचा जा सकता है।
5. बिना डॉक्टरी सलाह पेनकिलर्स (दर्द निवारक दवाएं) न लें
बहुत से लोग सिरदर्द, जोड़ों के दर्द या शरीर में ऐंठन होने पर बिना डॉक्टर से पूछे पेनकिलर्स (Painkillers) खाने लगते हैं। अक्सर ली जाने वाली दवाएं जैसे नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) किडनी में रक्त के प्रवाह को कम कर देती हैं। यदि इनका उपयोग लंबे समय तक या बार-बार किया जाए, तो यह धीरे-धीरे किडनी को स्थायी रूप से नुकसान पहुँचा सकती हैं। इसलिए किसी भी दर्द निवारक दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
किडनी की इन बुनियादी बातों का ध्यान रखकर गंभीर बीमारियों के शुरुआती खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है।
Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

