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Saturday, September 18, 2021
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किसान आंदोलन के 6 महीने पूरे, 26 मई को मनाएंगे काला दिवस

नई दिल्ली, साधना मिश्रा: एक तरफ जहां पूरा देश कोरोना (Corona) और ब्लैक फंगस जैसी महामारी से जूझ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दवाई और वैक्सीन की भारी कमी के चलते वैक्सीनेशन सेंटर बंद करने पड़ रहे है। ऐसे में वही दूसरी तरफ तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 6 महीने से किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। किसानों के आंदोलन को 26 मई को 6 महीने पूरे हो जाएंगे। इस मौके पर किसान नेताओं ने 26 मई को ‘काला दिवस’ के रुप में मनाने का ऐलान किया है।

भारतीय किसान संघ ने ‘काला दिवस’ को समर्थन देने से किया इंकार
बता दें कि भारतीय किसान संघ ने इसे समर्थन देने से इंकार कर दिया है। संघ ने कुछ किसान संगठनो पर आरोप लगाते हुए कहा कि काले दिवस की आड़ में ये लोग देश में आतंक पैदा करना चाहते है। इस बीच पंजाब के विधायक नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) ने किसानों के समर्थन में पटियाला और अमृतसर के अपने आवास पर काला झंडा लगाया है।

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इस तरह करेंगे किसान विरोध प्रदर्शन
संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य और पंजाब के क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष डॉ दर्शन पाल (Dr. Darshan Pal) ने कहा कि किसान अपना विरोध प्रदर्शन गांवो, शहरों और दिल्ली बॉर्डर (Delhi border) पर करेंगे। इस दौरान प्रदर्शनकारी काली पगड़ियां पहनेंगे, काले दुपट्टे ओढेंगे और काले कपड़े पहनकर विरोध दर्शाएंगे। किसान अपने घरों की छतों पर, अपने टैक्टरों पर काले झंड़े लगाएंगे। जगह-जगह मोदी सरकार के पुतले जलाए जाएंगे।

विरोध का उद्येश्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं
उन्होंने आगे कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि ये एक आंदोलन होगा, लेकिन इसमें लोगों को एकत्रित करने या संख्या बल बढ़ाने पर जोर नहीं होगा। किसान अलग-अलग स्थानों पर धरना देंगे। इसका उद्येश्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपना विरोध दर्ज करवाना होगा।”

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आंदोलन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग व कोविड प्रोटोकॉल का होगा पालन
देश इस समय कोरोना वायरस की दूसरी लहर और ब्लैक फंगस के साथ-साथ इसके नए-नए वैरियंट से भी जूझ रहा है। ऐसे में किसानों का यह आंदोलन काफी खतरनाक साबित हो सकता है। लेकिन किसानों का कहना है कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनकी दुर्दशा की जिम्मेदारी लेने के कोई भी तैयार नहीं है, और उन्हें अपनी जायज मांगों के लिए महामारी के काल में अपनी जान खतरे में डालकर आंदोलन करना पड़ रहा है। हालांकि किसान मोर्चा की तरफ से कहा गया है कि किसानों के इस आंदोलन में सोशल डिस्टेंसिंग व कोविड प्रोटोकॉल का भी पालन किया जाएगा।

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