नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन लोकसभा में विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा किए गए भारी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बुरी तरह प्रभावित रही। विपक्ष के कड़े विरोध और नारेबाजी के चलते संसद का महत्वपूर्ण समय माने जाने वाले प्रश्नकाल (Question Hour) और शून्यकाल (Zero Hour) सुचारू रूप से नहीं चलाए जा सके। बार-बार होते हंगामे को देखते हुए लोकसभा की बैठक को तीन बार के स्थगन के बाद अंततः अपराह्न 1:00 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
मौन श्रद्धांजलि के तुरंत बाद शुरू हुआ हंगामा
सोमवार पूर्वाह्न 11:00 बजे जब लोकसभा की बैठक शुरू हुई, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के छह पूर्व सदस्यों तथा कतर के पूर्व अमीर के निधन पर गहरा दुख जताया। इसके बाद सभी सदस्यों ने कुछ क्षणों का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
हालांकि, श्रद्धांजलि सभा समाप्त होते ही विपक्षी सांसद अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस के कई सदस्यों को नीट परीक्षा (NEET Exam) में कथित धांधली, पेपर लीक और इससे परेशान होकर कुछ छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामलों को उठाने की मांग करते देखा गया। विपक्षी सदस्य मांग कर रहे थे कि इन पीड़ित छात्रों को भी सदन में श्रद्धांजलि दी जाए।
विरोध के बीच खेल मंत्री ने दिया उत्तर
हंगामे और शोर-शराबे के बीच ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल चलाने का पूरा प्रयास किया। इस दौरान युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ही एक सदस्य द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्न का उत्तर भी दिया।
परंतु, कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के सांसद वेल (आसन के समीप) में आकर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए सदस्यों से शांत रहने की अपील की।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का संदेश:
“सदन की महान परंपरा और मर्यादा को बनाए रखें। केवल नारेबाजी करने से संसद की गरिमा नहीं बढ़ती, सांसदों को तर्कों के साथ चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।”
अध्यक्ष की अपील का विपक्षी सांसदों पर कोई असर नहीं पड़ा, जिसके कारण महज 12 मिनट के भीतर ही बैठक को दोपहर 12:00 बजे तक के लिए पहली बार स्थगित करना पड़ा।
‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के लगे नारे, कानून मंत्री ने पेश किया अहम विधेयक
दोपहर 12:00 बजे जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो विपक्षी सांसद फिर से वेल में पहुंचकर ‘न्याय दो’ और केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लक्षित करते हुए ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के जोरदार नारे लगाने लगे। पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर जाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में बाढ़ की गंभीर समस्या बनी हुई है, जिस पर सांसदों को चर्चा करनी चाहिए।
इसी गहमागहमी के बीच केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ सदन के पटल पर पेश किया। इस विधेयक में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित जजों की कुल स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 38 करने का अहम प्रावधान है। हंगामे के न थमने पर सभापति ने 12:06 बजे बैठक को 12:30 बजे तक के लिए दूसरी बार स्थगित कर दिया।
तीन बार के स्थगन के बाद 1:00 बजे तक रुकी कार्यवाही
दोपहर 12:30 बजे जब सदन दोबारा जुड़ा, तो पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने विपक्षी सांसदों से कम से कम शून्यकाल चलने देने की गुजारिश की। उन्होंने याद दिलाया कि आज सत्र का पहला दिन है और जनता को सकारात्मक संदेश जाना चाहिए। लेकिन हंगामा शांत न होने पर महज 5 मिनट के भीतर ही बैठक को तीसरी बार अपराह्न 1:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संसद का यह महत्वपूर्ण मॉनसून सत्र 13 अगस्त 2026 तक जारी रहेगा।
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