नई दिल्ली। हरियाणा सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता लाने और आम नागरिकों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक बेहद बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को चंडीगढ़ स्थित ‘हरियाणा निवास’ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग (Revenue and Disaster Management Department) के कामकाज की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में राज्य में चल रहे डिजिटल गवर्नेंस, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया गया।
मुख्यमंत्री ने बैठक में उपस्थित सभी जिला उपायुक्तों (कलेक्टर्स), नगर निगम आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि राजस्व विभाग से जुड़ी हर एक सेवा को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और कानूनन तय समय सीमा के भीतर आम जनता के लिए उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को अपने जायज कामों के लिए बिना किसी वजह के दफ्तरों में इंतजार न करना पड़े और उन्हें बेहद सुगम तरीके से समयबद्ध सेवाएं प्राप्त हो सकें।
इन-हाउस आईटी प्रभाग की स्थापना से मिली डिजिटल बदलाव को गति
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) डॉ. सुमिता मिश्रा ने विभाग द्वारा की गई तकनीकी प्रगति का पूरा ब्योरा पेश किया। उन्होंने बताया कि विभाग ने मई 2025 में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपना खुद का पहला ‘इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग’ स्थापित किया है। इस प्रभाग की स्थापना का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि विभाग की अब बाहरी तकनीकी एजेंसियों पर निर्भरता लगभग समाप्त हो गई है। इसके साथ ही, खुद के डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास और उसकी देखरेख के काम में भी अभूतपूर्व तेजी आई है। डॉ. मिश्रा ने जानकारी दी कि विभाग की इस विशेष तकनीकी टीम में सॉफ्टवेयर डेवलपर, यूआई/यूएक्स डिजाइनर (UI/UX Designers), तकनीकी दस्तावेज विशेषज्ञ और सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर जैसे कुशल पेशेवरों के लिए कुल 16 पद स्वीकृत किए गए हैं।
इसी तकनीकी प्रगति के सिलसिले में मुख्यमंत्री ने राज्य के ‘एकीकृत राजस्व पोर्टल’ (इंटीग्रेटेड रेवेन्यू पोर्टल) की कार्यप्रणाली की भी गहराई से समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि यह पोर्टल आम नागरिकों और विभाग के अधिकारियों दोनों के लिए एक साझा एवं सशक्त डिजिटल मंच के रूप में कार्य कर रहा है। इसके जरिए राज्य के लोग घर बैठे ऑनलाइन राजस्व सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं। वहीं, विभागीय अधिकारियों के लिए इस पोर्टल पर ‘सिंगल साइन-ऑन’ (SSO) प्रणाली और पेंडिंग मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए एक बेहतरीन एकीकृत डैशबोर्ड की व्यवस्था की गई है, जिससे कार्यों की सुगमता कई गुना बढ़ गई है।
राजस्व शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के निर्देश
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आम जनता की शिकायतों को सुनने और उनके निपटारे की व्यवस्था (Grievance Redressal System) की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे और अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और आम जनता के अनुकूल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को पूरी ईमानदारी के साथ न्याय मिलना चाहिए। यदि किसी आवेदक का आवेदन किसी वजह से अस्वीकृत (रिजेक्ट) कर दिया जाता है और वह व्यक्ति उस निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो प्रशासनिक नियमों के तहत उसे अपनी बात दोबारा रखने और पुनर्विचार कराने का पूरा व उचित अवसर मिलना चाहिए।
शिकायत निवारण डैशबोर्ड की जांच करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि सभी प्रकार के आवेदनों के निपटारे की प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता बरती जाए। यदि कोई आवेदन निरस्त किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को उस पर अस्वीकृति का बिल्कुल स्पष्ट और वैध कारण दर्ज करना होगा। इसके साथ ही, उस पूरे मामले का एक समुचित डिजिटल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे रिजेक्ट किए गए मामलों की समय-समय पर अचानक (रैंडम) जांच करें। ऐसा इसलिए किया जाना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि कोई भी असली और पात्र व्यक्ति किसी प्रक्रियागत गलती या जांच अधिकारी की लापरवाही की वजह से अपने हक और सरकारी लाभ से वंचित न रह जाए।
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को यह भी आदेश दिए कि जिलों में जनता की समस्याओं को सुलझाने के लिए जो साप्ताहिक ‘समाधान शिविर’ लगाए जा रहे हैं, उनमें तहसीलदारों और राजस्व विभाग के अन्य संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति हर हाल में अनिवार्य की जाए। इन शिविरों में अधिकारियों की मौजूदगी से जनता की जमीनी और राजस्व से जुड़ी दिक्कतों का मौके पर ही निपटारा करना संभव हो सकेगा।
मिशन मोड में हो रहा है भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण
राज्य में भूमि रिकॉर्ड्स के रख-रखाव को बेहतर बनाने के लिए चल रहे ‘भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम’ (Land Records Modernization Programme) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री को विभाग द्वारा हासिल की गई बड़ी उपलब्धियों से अवगत कराया गया।
हरियाणा भूमि आधुनिकीकरण के प्रमुख आंकड़े:
- अभिलेखों का डिजिटलीकरण: राज्य में अब तक 40.20 करोड़ से भी अधिक पुराने राजस्व दस्तावेजों का पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिसके चलते हरियाणा में एक मजबूत डिजिटल भूमि रिकॉर्ड डेटाबेस तैयार हो चुका है।
- ड्रोन सर्वेक्षण का दायरा: आधुनिक ड्रोन तकनीक के माध्यम से राज्य के लगभग 44 हजार वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र को सर्वे के तहत कवर किया जा चुका है।
- जियो-रेफरेंसिंग और बुनियादी ढांचा: राज्य के भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (CORS) सफलतापूर्वक स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, हरियाणा के 99 प्रतिशत गांवों के नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।
बैठक में यह भी साझा किया गया कि प्रदेश में लगभग 60 लाख ततीमा नक्शों को नया रूप देते हुए अपडेट किया गया है, जबकि रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (अधिकार अभिलेख) का लगभग 60 प्रतिशत मानकीकरण भी संपन्न हो चुका है। जितने भी दस्तावेजों का डिजिटलीकरण किया गया है, उनमें से 99.5 प्रतिशत से अधिक का प्रथम स्तर (फर्स्ट लेवल) का प्रामाणिक सत्यापन भी पूरा हो चुका है। इन आंकड़ों पर संतोष जताते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बचे हुए काम को एक तय समय सीमा के भीतर पूरी मुस्तैदी के साथ खत्म करने के निर्देश दिए।
संपत्ति कार्डों का वितरण और 15 हजार करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व
बैठक में आगे बताया गया कि जनता की भलाई के लिए किए गए सुधारों के तहत अब तक हरियाणा के 6,761 गांवों में संपत्ति कार्ड (Property Cards) तैयार किए जा चुके हैं और लगभग 25.16 लाख से अधिक संपत्ति मालिकों को इनका वितरण भी किया जा चुका है। इसके साथ ही, लगभग 95 प्रतिशत गांवों के भू-नक्शों को ‘भू-नक्शा पोर्टल’ पर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है।
प्रशासनिक कार्यों की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और प्रामाणिकता को और अधिक बढ़ाने के लिए अब तक लगभग 42 लाख आधार नंबरों को पुराने राजस्व रिकॉर्ड्स के साथ सफलतापूर्वक लिंक किया जा चुका है। इसके अलावा, आम जनता की तकनीकी समस्याओं को दूर करने के लिए एक विशेष आईटी हेल्पडेस्क की भी स्थापना की गई है।
विभागीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को यह भी जानकारी दी कि राजस्व विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 लाख से अधिक समय से लंबित पड़े इंतकाल (म्यूटेशन) के मामलों का निपटारा करने में सफलता पाई है। सरकार के ‘सरल पोर्टल’ (Saral Portal) की लगभग 80 प्रतिशत लोक सेवाओं को ‘ऑटो अपील प्रणाली’ (AAS) से पूरी तरह जोड़ दिया गया है। इस आधुनिक प्रणाली की विशेषता यह है कि यदि कोई आवेदन तय समय सीमा से अधिक समय तक बिना किसी वजह के लंबित रहता है, तो वह स्वतः ही (ऑटोमैटिक) उच्च स्तर के अधिकारी के पास संज्ञान के लिए पहुंच जाता है, जिससे समयबद्ध सेवा वितरण सुनिश्चित होता है।
इन सभी डिजिटल पंजीकरण सुधारों का एक बड़ा आर्थिक लाभ भी राज्य को मिला है और सरकार ने इसके माध्यम से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड राजस्व संग्रह (Revenue Collection) किया है। मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे इस पूरी कागज रहित (एंड-टू-एंड पेपरलेस) दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था की हर हफ्ते नियमित रूप से खुद मॉनिटरिंग करें और इसके लिए उपलब्ध सार्वजनिक लाइव डैशबोर्ड का पूरा उपयोग करें।
सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं
आम जनता की सुविधा को सर्वोपरि बताते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि राज्य के सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों (तहसीलों और सब-तहसीलों) में आने वाले नागरिकों के लिए पर्याप्त और उच्च स्तरीय सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय परिसर में आने वाले लोगों के बैठने के लिए एक उचित और सर्वसुविधायुक्त वेटिंग रूम (प्रतीक्षा कक्ष) होना चाहिए, जिसमें पानी, बिजली और शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतें मौजूद हों।
इसके साथ ही, कार्यालयों में भीड़भाड़ को रोकने और अव्यवस्था को समाप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से ‘क्यू मैनेजमेंट सिस्टम’ (टोकन प्रणाली) को लागू किया जाए। तहसीलों में बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगाई जाएं, जिन पर आवेदकों के टोकन नंबर प्रदर्शित हों ताकि नागरिकों को पूरी तरह व्यवस्थित और सुविधाजनक माहौल में सरकारी सेवाएं प्राप्त हो सकें।
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (CMGGA) के परियोजना निदेशक डॉ. यशपाल ने बैठक में बताया कि इस पूरी पेपरलेस व्यवस्था के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 12,300 से अधिक विभिन्न आवेदन प्राप्त हुए हैं। जियो-रेफरेंस किए गए गांवों के डेटा की प्रामाणिकता जांचने के लिए जिला स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि भविष्य में लैंड डिमार्केशन (जमीन के सीमांकन) के कार्य को अधिक सटीक, विवाद रहित और पारदर्शी बनाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने इस दिशा में त्वरित और बेहतरीन काम करने के लिए सिरसा जिले के प्रशासनिक अमले की खुलकर सराहना की और राज्य के अन्य सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे भी सिरसा जिले की इस सफल कार्यप्रणाली को अपने-अपने क्षेत्रों में तुरंत लागू करें।
25% राजस्व अभिलेखों की आधार सीडिंग पूरी, फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
बैठक में यह एक और बड़ी जानकारी सामने आई कि राज्य के कुल 1.69 करोड़ भूमि अभिलेखों में से अब तक 42.55 लाख से अधिक महत्वपूर्ण अभिलेखों को आधार नंबर से पूरी तरह जोड़ दिया गया है। यह कुल रिकॉर्ड्स का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा है और बाकी बचे काम को भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आधार सीडिंग (Aadhar Seeding) की इस प्रक्रिया से राज्य के भूमि रिकॉर्ड्स अत्यधिक सटीक और त्रुटिहीन हो जाएंगे। इससे एक ही जमीन की बार-बार होने वाली डुप्लीकेट प्रविष्टियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी, आम जनता को मिलने वाली सेवाओं की रफ्तार तेज होगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य में होने वाले किसी भी प्रकार के फर्जी भूमि लेन-देन और धोखाधड़ी पर पूरी तरह से प्रभावी रोक लग जाएगी।
15 अगस्त तक एग्री स्टैक पंजीकरण बढ़ाने के निर्देश
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैठक में ‘एग्री स्टैक किसान रजिस्ट्री’ (AgriStack Farmer Registry) कार्यक्रम की प्रगति की भी व्यापक समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश जारी किए कि किसानों की विशिष्ट ‘एग्री स्टैक आईडी’ (AgriStack ID) बनवाने के कार्य को गति देने के लिए पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर एक व्यापक जन जागरूकता अभियान (Mass Awareness Campaign) चलाया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को एक स्पष्ट डेडलाइन देते हुए कहा कि आगामी 15 अगस्त तक राज्य के किसान पंजीकरण के आंकड़ों में एक उल्लेखनीय और बड़ी वृद्धि हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस डिजिटल आईडी के बनने से राज्य के अधिक से अधिक किसान भविष्य में शुरू होने वाली आधुनिक डिजिटल कृषि पहलों और विभिन्न कल्याणकारी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी बिचौलिये के उठा सकेंगे।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य में आगामी ‘डिजिटल फसल सर्वेक्षण’ (Digital Crop Survey) की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि आने वाले फसल सीजन के दौरान राज्य के सभी गांवों को इस डिजिटल सर्वे के तहत शत-प्रतिशत कवर करने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। इस महा-सर्वेक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए डेटा का गहन सत्यापन, मास्टर ट्रेनरों की विशेष ट्रेनिंग, जिला स्तर पर कर्मचारियों की क्षमता निर्माण, एक अत्याधुनिक मोबाइल एप्लिकेशन की तैयारी और मॉक सर्वे जैसे प्रारंभिक कार्य किए जा रहे हैं।
यह राज्यव्यापी फसल सर्वेक्षण अगस्त महीने के मध्य से पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा और इस वर्ष के अंत तक पूरे सर्वे का काम खत्म करके उसका स्वतंत्र ऑडिट भी संपन्न करा लिया जाएगा। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने ऑफलाइन जमाबंदी के लंबित पड़े मामलों और पटवार सर्किलों के युक्तिकरण (रेशनलाइजेशन) की प्रगति पर भी अधिकारियों से जवाब-तलब किया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि विभाग ने पूरे राज्य में नियमों की एकरूपता बनाए रखने के लिए आधार सीडिंग, ऑटो म्यूटेशन, प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने, भूमि सीमांकन, बैंक ऋण प्रविष्टियों और उपयोगकर्ता पंजीकरण (User Registration) सहित सभी डिजिटल मॉड्यूल के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और यूजर मैनुअल पुस्तिकाएं तैयार की हैं, ताकि पूरे हरियाणा में एक समान व्यवस्था लागू हो सके।
आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की समीक्षा: सरकारी अस्पतालों का होगा कायाकल्प
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (CMGGA) की व्यापक समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राज्य सरकार की सबसे बड़ी स्वास्थ्य पहलों— ‘आयुष्मान भारत’ और ‘चिरायु हरियाणा योजना’ की प्रगति की भी गहन समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला उपायुक्तों को सख्त निर्देश दिए कि राज्य के प्रत्येक पात्र और जरूरतमंद लाभार्थी को इन दोनों स्वास्थ्य योजनाओं के साथ अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि हरियाणा का कोई भी गरीब या जरूरतमंद परिवार पैसों की तंगी की वजह से कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से वंचित न रहने पाए।
स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को ऊपर उठाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा विजन साझा करते हुए कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में कम से कम एक सरकारी अस्पताल (Government Hospital) को सर्वसुविधायुक्त बनाया जाए। इन चयनित अस्पतालों को सभी आधुनिक सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं और आवश्यक जीवन रक्षक चिकित्सा संसाधनों से इस तरह सुसज्जित किया जाए कि वे किसी भी बड़े प्राइवेट अस्पताल के समकक्ष खड़े नजर आएं।
उन्होंने कहा कि हमारे सरकारी अस्पतालों को स्वच्छता, मरीजों की बेहतर देखभाल और सेवा वितरण के क्षेत्र में समाज के सामने एक सर्वोच्च और अनुकरणीय मानक स्थापित करना होगा। मुख्यमंत्री ने सभी जिला उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने जिलों के सरकारी अस्पतालों का समय-समय पर नियमित रूप से औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) करें। वे स्वयं अस्पतालों में जाकर डॉक्टरों की उपस्थिति, पर्याप्त दवाइयों के स्टॉक और जांच सुविधाओं (एक्स-रे, लैब टेस्ट आदि) की उपलब्धता की व्यक्तिगत रूप से पूरी मॉनिटरिंग करें।
इस अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव श्री विजय सिंह दहिया, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री अशोक कुमार मीणा सहित विभिन्न विभागों के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, नगर निगमों के आयुक्त और वर्चुअली सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
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