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तेज दिमाग और मजबूत सेहत! 6 महीने के बच्चे की डाइट में तुरंत शामिल करें ये 3 सुपरफूड्स।

Infant Nutrition Brain Foods After 6 Months: 6 महीने के बच्चे के दिमागी विकास के लिए डाइट में शामिल करें अखरोट पाउडर, अंडा और राजगीरा। जानिए सही तरीका और पोषण से जुड़े तथ्य।

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Baby Brain Development Food: छह महीने की उम्र के बाद शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को गति देने के लिए मां के दूध के साथ तीन प्रमुख पोषक तत्वों—अखरोट पाउडर, उबला अंडा और राजगीरा—को पूरक आहार में शामिल करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सही उम्र में सही पोषण बच्चे के न्यूरोलॉजिकल डेवलपमेंट (मस्तिष्क विकास) का आधार बनता है।

शिशु के छह माह पूरे होते ही केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसकी थाली में ऐसे खाद्य पदार्थों का होना आवश्यक है जो शरीर और मस्तिष्क दोनों को ऊर्जा प्रदान करें। बच्चे का दिमागी विकास खान-पान, नींद, खेलकूद, आपसी संवाद और आसपास के माहौल पर निर्भर करता है, लेकिन सही पोषण इस प्रक्रिया को रफ्तार देता है।

6 महीने के शिशु के लिए ब्रेन बूस्टर आहार

  • अखरोट पाउडर: ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट (मस्तिष्क विकास)
  • उबला अंडा: कोलीन एवं प्रोटीन (तंत्रिका तंत्र व शारीरिक वृद्धि)
  • पका हुआ राजगीरा: आयरन, मैग्नीशियम और प्रोटीन (हीमोग्लोबिन व ऊतक निर्माण)
  • अनिवार्य नियम: मां का दूध जारी रखें, भोजन को पूरी तरह मैश करके दें

1. अखरोट का बारीक पाउडर: ओमेगा-3 और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

अखरोट को नवजात शिशुओं के आहार में सीधे देने के बजाय अत्यंत सावधानी से शामिल किया जाना चाहिए। अखरोट में प्लांट-बेस्ड ओमेगा-3 फैटी एसिड, हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मस्तिष्क कोशिकाओं के निर्माण और सामान्य विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

सावधानी और परोसने का तरीका: छह महीने के बच्चे को कभी भी साबुत या बड़े टुकड़ों में सूखे मेवे नहीं देने चाहिए, क्योंकि इससे सांस की नली में फंसने (चोकिंग) का गंभीर जोखिम रहता है। अखरोट को हल्का भूनकर उसका महीन पाउडर बना लें। इस पाउडर को बच्चे के दलिए, ताजे दही या फलों की प्यूरी में चुटकी भर मिलाकर दें। पहली बार देते समय एलर्जिक रिएक्शन पर भी नजर रखें।

2. उबला हुआ अंडा: कोलीन और प्रोटीन का स्रोत

अंडा छोटे बच्चों के आहार के लिए एक संपूर्ण और सुपाच्य विकल्प माना जाता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं। विशेष रूप से अंडे की जर्दी (पीले भाग) में मौजूद ‘कोलीन’ नामक पोषक तत्व शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) के समुचित विकास के लिए अनिवार्य माना गया है।

पकाने की विधि: छह माह बाद बच्चे को केवल अच्छी तरह पका हुआ अंडा ही देना चाहिए। उबले हुए अंडे को चम्मच से अच्छी तरह मैश कर लें। इसे अधिक सुपाच्य और स्वादिष्ट बनाने के लिए मैश किए हुए एवोकाडो या अन्य किसी नरम खाद्य पदार्थ के साथ मिलाकर बच्चे को खिलाया जा सकता है।

3. राजगीरा (रामदाना): आयरन और मैग्नीशियम का खजाना

पारंपरिक अनाज राजगीरा शिशु के शुरुआती ठोस आहार का एक बेहतरीन हिस्सा बन सकता है। इसमें आयरन, मैग्नीशियम और प्रोटीन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। आयरन शिशु के शरीर में हीमोग्लोबिन और सामान्य वृद्धि के लिए जरूरी है, जबकि प्रोटीन ऊतकों (टिश्यूज) के निर्माण में मदद करता है।

तैयारी का तरीका: राजगीरा को तब तक अच्छी तरह पकाएं जब तक वह पूरी तरह मुलायम न हो जाए। इसे पकी हुई सब्जियों के साथ मैश करके या शकरकंद और सेब की प्यूरी मिलाकर हल्का मीठा बनाकर दिया जा सकता है, जिससे स्वाद और पोषण दोनों बढ़ते हैं।

स्तनपान के साथ पूरक आहार का संतुलन

विशेषज्ञों का कहना है कि ठोस आहार शुरू करने के बाद भी छह महीने से अधिक उम्र के बच्चों के लिए मां का दूध अत्यंत महत्वपूर्ण बना रहता है। नए पूरक खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे और कम मात्रा में शुरू करना चाहिए ताकि बच्चा अलग-अलग स्वादों का अभ्यस्त हो सके और पाचन तंत्र पर दबाव न पड़े।

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