सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सहारनपुर के विकास क्षेत्र पुंवारका स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय इस्माइलपुर (कंपोजिट) से पूरे राज्य में चलाए जाने वाले ‘स्कूल चलो अभियान’ के द्वितीय चरण (1 से 15 जुलाई 2026) का एक भव्य और ऐतिहासिक समारोह में शुभारंभ किया। इस विशेष अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के हर जागरूक वर्ग से बच्चों को स्कूल भेजने की भावुक अपील की।
उन्होंने अपने संबोधन में जोर देते हुए कहा कि शिक्षा केवल साक्षर होने का जरिया नहीं है, बल्कि यह किसी भी व्यक्ति, समाज और संपूर्ण राष्ट्र के निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है। एक अच्छी, गुणवत्तापूर्ण और संस्कारित शिक्षा ही देश को सभ्य नागरिक देती है। यही नागरिक आगे चलकर समाज सेवक, शिक्षक, प्रधानाचार्य, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कुशल उद्यमी, इंजीनियर, चिकित्सक और न्यायिक अधिकारी के रूप में राष्ट्र के विकास में अपनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं। देश के भविष्य को संवारने वाली हमारी भावी पीढ़ी जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़ेगी, वह शिक्षा के कारण ही आत्मविश्वास से भरपूर होकर समाज व देश के नवनिर्माण में अपना योगदान दे सकेगी।
साफ नीयत से बदले सरकारी स्कूलों के हालात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 के दौर को याद करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने जब पहली बार इस अभियान को शुरू किया था, तब राज्य की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति काफी चिंताजनक थी। साल 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले केवल 36 प्रतिशत स्कूलों को ही बुनियादी तौर पर पूरी तरह संतृप्त यानी ठीक माना जा रहा था। उस दौर में सरकारी स्कूलों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, स्वच्छ पीने का पानी, बैठने के लिए फर्नीचर, पढ़ने के लिए लाइब्रेरी, बिजली की लाइट और मिड डे मील जैसी प्राथमिक व समुचित व्यवस्थाओं का भारी अभाव था।
इस गंभीर समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरुआत की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने खुद सभी जनप्रतिनिधियों, बड़े उद्यमियों, समाजसेवियों और प्रशासनिक अधिकारियों से अपील की थी कि वे बेसिक शिक्षा परिषद के इन स्कूलों को गोद लें और वहाँ व्यापक रूप से बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराकर संतृप्तिकरण के लक्ष्य को पूरा करें। इसके लिए सरकार की तरफ से कड़े पैरामीटर भी तय किए गए थे, ताकि काम की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। सरकार की नीति स्पष्ट थी और नीयत पूरी तरह साफ थी, जिसके कारण इसके परिणाम भी उम्मीद से कहीं बेहतर और ठोस आए।
5 वर्षों में हासिल किया 96% से अधिक का संतृप्तिकरण लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने सरकार के प्रयासों और उनके ठोस नतीजों को जनता के सामने रखते हुए कहा कि हमने यह पूरी तरह तय किया था कि हर सरकारी स्कूल में छात्र और छात्राओं के लिए पूरी तरह से अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था हो, पीने के साफ पानी का प्रबंध हो और मिड डे मील योजना के तहत प्रतिदिन का पौष्टिक भोजन पहले से निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही आधुनिक समय की मांग को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों को भी स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधाओं से लैस करने का काम शुरू किया गया।
सरकार की ओर से हर जरूरतमंद बच्चे को मुफ्त में यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते-मोजे, स्वेटर और किताबें देकर सभी जरूरी सुविधाओं से आच्छादित करने का प्रयास किया गया। स्कूलों में विद्यार्थियों व शिक्षकों के अनुपात को भी सुधारा गया। इन सभी प्रयासों का जमीनी असर यह हुआ कि बेसिक शिक्षा विद्यालयों का जो संतृप्तिकरण 2017 में मात्र 36 प्रतिशत था, वह अगले पांच वर्षों के भीतर ही बढ़कर 96 प्रतिशत से अधिक के आंकड़े को पार कर गया।
जब हर बच्चे को स्कूल आने के लिए बैग, किताबें, जूते-मोजे, स्वेटर और यूनिफॉर्म मिलना शुरू हुआ, तो इसका सीधा असर स्कूलों में बच्चों के नए नामांकन (Enrollment) पर पड़ा। मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि पिछले 9 वर्षों के दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में 60 लाख से अधिक नए बच्चे बढ़े हैं। इससे भी बड़ी कामयाबी यह रही कि प्राथमिक स्तर पर पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने वाले बच्चों की दर (ड्रॉपआउट रेट) जो कभी 19-20 प्रतिशत के खतरनाक स्तर पर थी, वह अब ऐतिहासिक रूप से घटकर मात्र 3 से 4 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर आ गई है।
बच्चा स्कूल नहीं गया तो यह समाज व राष्ट्र की अपूर्णीय क्षति
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के महत्व को समझाते हुए कहा कि एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज के लिए यह बेहद आवश्यक है कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे। यदि देश का कोई भी बच्चा शिक्षा की मुख्यधारा से अलग रह जाता है, तो यह केवल उसके परिवार की व्यक्तिगत हानि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज और राष्ट्र की एक बहुत बड़ी क्षति है। इन्हीं नौनिहालों को भविष्य में समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर देश का नेतृत्व करना है।
सीएम योगी ने मंच पर उपस्थित अधिकारियों और शिक्षकों का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ बैठे सभी राजनेता, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और शिक्षक भी कभी न कभी छात्र थे। जब इन सभी ने अच्छे से पढ़ाई की, तभी आज इस सम्मानित स्तर तक पहुँच पाए हैं। यदि आज की पीढ़ी का कोई बच्चा अनपढ़ या अशिक्षित रह जाता है, तो वह आगे चलकर दिग्भ्रमित हो जाएगा और समाज व राष्ट्र को एक अपूर्णीय क्षति पहुंचाएगा। हमें एक ऐसी मजबूत पीढ़ी खड़ी करनी है, जो राष्ट्र के प्रति कर्तव्यशील नागरिक के रूप में अपने सभी सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन कर सके।
हर तबके का दायित्व: इस अभियान को जनांदोलन का हिस्सा बनाएं
विकसित भारत की संकल्पना को पूरा करने और एक समृद्ध समाज के निर्माण के लिए मुख्यमंत्री ने समाज के हर जागरूक नागरिक से एक विशेष अपील की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों को स्कूल पहुँचाने का यह दायित्व केवल उन्हीं परिवारों का नहीं है, जिन परिवारों में स्कूल जाने योग्य बच्चे हैं। बल्कि समाज के हर प्रभावशाली वर्ग—चाहे वे राजनेता हों, सांसद हों, विधायक हों, पार्षद हों, ब्लॉक प्रमुख हों, ग्राम प्रधान हों, जिला पंचायत अध्यक्ष हों, प्रशासनिक अधिकारी हों, शिक्षक हों, अधिवक्ता हों, व्यापारी हों या फिर चिकित्सक हों—हर तबके का यह सामाजिक दायित्व और राष्ट्रीय कर्तव्य है कि वे अपने आसपास के माहौल का अवलोकन करें।
यदि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित दिखाई दे, तो उसे तुरंत स्कूल पहुँचाने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी राष्ट्रीय कर्तव्य का निर्वहन पूरी सामूहिकता और एकजुटता के साथ होता है, तभी कोई राष्ट्र तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। उन्होंने इस अभियान को एक अच्छी शुरुआत बताते हुए समाज के हर वर्ग से इसे एक जन-आंदोलन का रूप देने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने बेसिक शिक्षा परिषद के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों को निर्देशित किया कि जिन भी नए बच्चों का एडमिशन हुआ है, उन्हें समय पर यूनिफॉर्म की धनराशि, बैग, बुक्स और जूते-मोजे प्राप्त हो जाएं और स्कूलों में पठन-पाठन का एक बेहतरीन व खुनुमा माहौल तैयार किया जाए।
दिव्यांग बच्चों और संविदा कर्मियों के लिए सरकार के विशेष प्रयास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी दृष्टिकोण अपनाते हुए सरकार द्वारा किए जा रहे अन्य विशेष कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार राज्य के हर विद्यालय में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी और शिक्षकों को हाई-टेक बनाने के लिए टैबलेट जैसी तमाम आधुनिक सुविधाएं लगातार उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही, बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत डेढ़ लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को उनकी सुगमता के लिए आवश्यक सहायक उपकरण मुफ्त में दिए गए हैं।
गत वर्ष के कार्यों का विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि 13 हजार से अधिक गंभीर और बहुदिव्यांग बच्चों की सहायता के लिए ₹6,000 प्रतिवर्ष ‘एस्कॉर्ट अलाउंस’ (सहायक भत्ता) दिया गया है, जबकि 23 हजार से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए ₹2,000 प्रतिवर्ष का विशेष स्टाइपेंड भी उपलब्ध कराया गया है।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों की जानकारी देते हुए सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लागू की है, जो पूरे 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद घोषित की गई थी। इसके अंतर्गत ‘लर्निंग बाई डूइंग’ (करके सीखना) कार्यक्रम के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ कौशल आधारित (Skill-based) शिक्षा देना प्रारंभ किया गया है।
इसके साथ ही, शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले संविदा कर्मियों को राहत देते हुए प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मासिक मानदेय को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 कर दिया है, और अनुदेशकों के मानदेय को ₹9,000 प्रति माह से बढ़ाकर ₹17,000 प्रति माह किया है। यही नहीं, सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए हर शिक्षामित्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य, रसोइया और अनुदेशक के लिए ₹5 लाख वार्षिक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की भी घोषणा की है।
शिक्षकों को दिया 15 दिन का विशेष टारगेट
मुख्यमंत्री ने उपस्थित शिक्षक समुदाय से सीधे मुखातिब होते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “अगले 15 दिन (1 से 15 जुलाई) आप सभी को जमकर मेहनत करनी है। आप सभी शिक्षक अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों में जाकर हर परिवार से व्यक्तिगत रूप से मिलें। स्कूलों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए कि किस स्कूल में अधिक से अधिक बच्चों का नामांकन कराया जा सकता है।”
उन्होंने शिक्षकों को नया मंत्र देते हुए कहा कि स्कूलों में बच्चों के लिए एक ऐसा बेहतरीन और आकर्षक माहौल तैयार करें, जहां बच्चे डरकर नहीं बल्कि खुशी-खुशी आएं। बच्चों को प्यार से कविताओं, मधुर गानों, ज्ञानवर्धक मुहावरों और स्थानीय लोकोक्तियों के माध्यम से खेल-खेल में सिखाने की एक नई पद्धती को जन्म देना होगा। इस तरह के रचनात्मक माहौल में ली गई व्यावहारिक शिक्षा बच्चों को जीवन भर याद रहेगी और उनके व्यक्तित्व का सही विकास करेगी।
सहारनपुर पर मां शाकंभरी की बरस रही विशेष कृपा
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के मौसम का जिक्र करते हुए कहा कि ‘स्कूल चलो अभियान’ के इस द्वितीय चरण का शुभारंभ मां शाकंभरी की पावन और ऐतिहासिक धरा पर हो रहा है। उन्होंने इसे एक ईश्वरीय संकेत और विशेष कृपा बताते हुए कहा कि देर रात से ही यहाँ जो झमाझम बारिश हो रही है, वह किसानों के लिए अन्न का भंडारण करने में बेहद मददगार साबित होगी और आम जनता को भी पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी से बड़ी राहत दिलाएगी। यह मां शाकंभरी का इस पुण्य कार्य के लिए विशेष आशीर्वाद है।
इस ऐतिहासिक और गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान मंच पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी, कुंवर बृजेश सिंह, विधायक मुकेश चौधरी, राजीव गुंबर, देवेंद्र कुमार निम, पूर्व सांसद राघव लखनपाल, प्रदीप चौधरी, सिडको के अध्यक्ष वाईपी सिंह और भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत राणा समेत कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और भारी संख्या में गणमान्य नागरिक व स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।
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