लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक ही जगह पर त्वरित न्याय और सहायता मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए वन स्टॉप सेंटर योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
इन केंद्रों पर पीड़ित महिलाओं को चिकित्सीय मदद, कानूनी सहायता, पुलिस सहयोग, अस्थायी आवास और परामर्श जैसी पांच प्रमुख सेवाएं एक छत के नीचे उपलब्ध हैं। 181 महिला हेल्पलाइन से जुड़े इन 24×7 सक्रिय केंद्रों ने महिलाओं के लिए भरोसे का सहारा बनाया है।
वन स्टॉप सेंटर योजना क्या है और यह कैसे काम करती है
वन स्टॉप सेंटर योजना भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही है। उत्तर प्रदेश में इसे महिला कल्याण निदेशालय के माध्यम से लागू किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य हिंसा का शिकार हुई महिलाओं को भटकने से बचाना और एक ही स्थान पर जरूरी मदद पहुंचाना है।
यह योजना साल 2015 में शुरू हुई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में 2017 से इसे सक्रिय रूप से लागू किया गया। वर्तमान में प्रदेश के सभी 75 जिलों में ये केंद्र काम कर रहे हैं। हालिया जानकारी के अनुसार, राज्य में करीब 96 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं और अप्रैल 2026 में 25 नए केंद्र शुरू होने वाले हैं, जिससे कुल संख्या 121 हो जाएगी। कुछ बड़े जिलों जैसे लखनऊ, लखीमपुर खीरी, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में एक से ज्यादा केंद्र बनाए गए हैं ताकि ज्यादा महिलाओं तक पहुंच बन सके।
एक छत के नीचे मिलने वाली पांच प्रमुख सेवाएं
हिंसा से पीड़ित महिलाओं को इन केंद्रों पर पांच तरह की मदद एक साथ मिलती है।
- पहला, चिकित्सीय सहायता जिसमें फर्स्ट एड और जरूरी मेडिकल चेकअप शामिल है।
- दूसरा, कानूनी मदद जहां विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ता पीड़िता को कानूनी राय और केस लड़ने में सहायता करते हैं।
- तीसरा, पुलिस सहयोग जिसमें एसओ स्तर के अधिकारियों से सीधा समन्वय होता है, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है।
- चौथा, अस्थायी आवास की व्यवस्था है ताकि पीड़िता को सुरक्षित जगह मिल सके। पांचवां, परामर्श सेवा जिसमें मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाती है। ये सभी सेवाएं बिना किसी देरी के उपलब्ध कराई जाती हैं।
181 महिला हेल्पलाइन से तुरंत जुड़ाव और कार्रवाई
महिलाओं की समस्याओं के लिए 181 हेल्पलाइन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस हेल्पलाइन पर आने वाली किसी भी शिकायत को तुरंत संबंधित वन स्टॉप सेंटर को भेज दिया जाता है। हर केंद्र पर तैनात महिला कर्मचारी पीड़िता से संपर्क करती हैं, उनकी बात सुनती हैं और जरूरी मदद का इंतजाम करती हैं। यह सिस्टम सुनिश्चित करता है कि मदद में कोई देरी न हो।
सभी वन स्टॉप सेंटर 24 घंटे खुले रहते हैं। तीन शिफ्ट में महिला स्टाफ की ड्यूटी लगाई गई है। इससे रात के समय या आपात स्थिति में भी सहायता मिल सकती है। लखनऊ में चार केंद्र, लखीमपुर खीरी में तीन केंद्र और अन्य जिलों में भी जरूरत के हिसाब से व्यवस्था की गई है।
योगी सरकार के प्रयासों से योजना का विस्तार
शुरू में यह योजना कुछ जिलों तक सीमित थी, लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे पूरे प्रदेश में फैलाया। 2020 तक लगभग सभी 75 जिलों में केंद्र स्थापित हो गए। महिला कल्याण निदेशालय ने जागरूकता अभियान चलाए, जिससे महिलाओं को इन सेवाओं की जानकारी मिली। अब ज्यादा महिलाएं खुद आगे आकर मदद मांग रही हैं।
पुलिस और कानूनी विभागों के साथ बेहतर समन्वय की वजह से पीड़िताओं को त्वरित न्याय मिल रहा है। केंद्रों पर डैशबोर्ड सिस्टम से हर शिकायत की निगरानी होती है।
महिला कल्याण निदेशालय की भूमिका और भविष्य की दिशा
महिला कल्याण निदेशालय की डायरेक्टर डॉ. वंदना वर्मा के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। वन स्टॉप सेंटर योजना के जरिए हिंसा से पीड़ित महिलाओं को एक जगह पर समग्र मदद मिल रही है। सरकार का फोकस हर महिला को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाना है।
जागरूकता बढ़ने से मदद लेने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है, जो सकारात्मक बदलाव दिखाता है। आने वाले समय में नए केंद्रों के शुरू होने से और ज्यादा महिलाओं तक पहुंच बढ़ेगी। हर केंद्र में समर्पित वाहन की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि आपात स्थिति में तुरंत पहुंचा जा सके।
यह व्यवस्था महिलाओं के लिए राहत की वजह बन रही है। हिंसा से प्रभावित महिलाएं अब भटकने के बजाय सीधे इन केंद्रों से जुड़ सकती हैं। योगी सरकार महिला सुरक्षा को लेकर लगातार ठोस कदम उठा रही है, जिससे प्रदेश में महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है।
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