HomeHealthएम्स नागपुर दीक्षांत समारोह, डॉक्टर मरीजों में आशा जगाएं, तकनीक करुणा की...

एम्स नागपुर दीक्षांत समारोह, डॉक्टर मरीजों में आशा जगाएं, तकनीक करुणा की जगह नहीं ले सकती – राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एम्स नागपुर के दीक्षांत समारोह में कहा कि तकनीक कभी भी करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती।

-Advertisement-
Join whatsapp channel Join Now
Join Telegram Group Join Now

नागपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एम्स नागपुर के दीक्षांत समारोह में कहा कि तकनीक कभी भी करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान नहीं ले सकती। बुधवार को महाराष्ट्र के नागपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने युवा डॉक्टरों को चिकित्सा पेशे में मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने जोर दिया कि डॉक्टर केवल बीमारी का इलाज नहीं करते, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों में आशा जगाते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में नई तकनीकों को अपनाने पर बल दिया, लेकिन साथ ही नैतिकता और संवेदनशीलता बनाए रखने की जरूरत बताई।

राष्ट्रपति मुर्मु का एम्स नागपुर पहुंचना और संबोधन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 15 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स नागपुर) के दूसरे दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने स्नातक छात्रों को संबोधित किया और चिकित्सा क्षेत्र की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं है, बल्कि संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का माध्यम है। एक डॉक्टर बीमारियों का इलाज करने के साथ-साथ मरीज के मन में उम्मीद भी भरता है।

उन्होंने डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली सहानुभूतिपूर्ण सलाह की तारीफ की। ऐसी सलाह न सिर्फ मरीज को बल्कि पूरे परिवार को ताकत देती है। राष्ट्रपति मुर्मु ने माना कि डॉक्टरों को अक्सर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इन हालात में भी उन्हें मरीज और परिवार के प्रति संवेदनशील बने रहना चाहिए। साथ ही, मरीजों और उनके परिजनों को भी डॉक्टरों के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। इससे डॉक्टर और रोगी के बीच विश्वास का मजबूत रिश्ता बना रहता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी प्रगति और मानवीय मूल्य

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्तमान समय को स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में तेज बदलाव का दौर बताया। दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं और उन्नत अनुसंधान जैसी नई तकनीकें चिकित्सा को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बदलावों को अपनाना चाहिए, ताकि ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं की असमानता दूर हो सके। गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करने में तकनीकी विकास की बड़ी भूमिका है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने खुशी जताते हुए बताया कि एम्स नागपुर स्थापना के कुछ ही वर्षों में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य न सिर्फ उनके व्यक्तिगत कल्याण के लिए जरूरी है, बल्कि देश की प्रगति के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। स्वस्थ नागरिक राष्ट्र निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान दे पाते हैं।

पिछले दस वर्षों में भारत सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कई बड़े कदम उठाए हैं। देश भर में नए एम्स की स्थापना से बेहतर इलाज और चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। एम्स नागपुर इन प्रयासों का एक अच्छा उदाहरण है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि ऐसी संस्थाएं स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएंगी।

डॉक्टरों की जिम्मेदारी और नैतिक कर्तव्य

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने डॉक्टरों के सामाजिक और नैतिक कर्तव्य पर विशेष जोर दिया। समाज में डॉक्टरों का स्थान बहुत ऊंचा है। लोग उन्हें अपना और अपनों का स्वास्थ्य सौंपते हैं। इसलिए डॉक्टरों को मरीजों के हितों को सबसे ऊपर रखना चाहिए। इस जिम्मेदारी को निभाने से न सिर्फ डॉक्टर की प्रतिष्ठा बढ़ती है, बल्कि पूरे चिकित्सा पेशे की इज्जत भी बढ़ती है।

उन्होंने युवा डॉक्टरों से आजीवन सीखने की आदत विकसित करने को कहा। जिज्ञासा प्रगति की बुनियाद है। चिकित्सा विज्ञान में नए समाधान ढूंढने की चाह उन्हें बेहतर डॉक्टर बनाएगी और सेवा के ज्यादा मौके देगी। राष्ट्रपति मुर्मु ने नवाचार, अनुसंधान और निरंतर सीखने की भावना को अपनाने की सलाह दी।

सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने यह कही कि प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण की जगह कभी नहीं ले सकती। डॉक्टरों को करुणा की भावना को हमेशा बनाए रखना चाहिए। चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग मानवता की सेवा का अनोखा मौका पाते हैं। उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व करना चाहिए और इसे संवेदनशीलता से निभाना चाहिए।

युवा डॉक्टरों के लिए संदेश और विकसित भारत का लक्ष्य

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्नातक छात्रों से कहा कि वे न सिर्फ अपने व्यक्तिगत जीवन में सफल हों, बल्कि साथी नागरिकों को स्वस्थ रखने में भी योगदान दें। ऐसे प्रयासों से देश स्वतंत्रता शताब्दी तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य को हासिल कर सकेगा। उन्होंने डॉक्टरों को सेवा भाव और नैतिक मूल्यों को हमेशा ध्यान में रखने की याद दिलाई।

एम्स नागपुर के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मु का यह संबोधन युवा चिकित्सकों के लिए प्रेरणादायक रहा। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया – जहां आधुनिक तकनीक हो, लेकिन मानवीय स्पर्श बना रहे।

यह कार्यक्रम स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की प्रगति और डॉक्टरों की भूमिका को रेखांकित करता है। राष्ट्रपति के विचार चिकित्सा शिक्षा और सेवा दोनों को मजबूत बनाने में मददगार साबित होंगे।

Breaking News in Hindi और Latest News in Hindi सबसे पहले मिलेगी आपको सिर्फ Women Express पर. Hindi News और India News in Hindi  से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर ज्वॉइन करें, Twitter पर फॉलो करें और Youtube Channel सब्सक्राइब करे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Related News

Delhi epaper

Prayagraj epaper

Kurukshetra epaper

Ujjain epaper

Latest News