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Thursday, January 21, 2021

अकाली बनाम ‘अकाली’ हुई दिल्ली की सिख सियासत

सांसद ढींढसा के घर आज होगी मंजीत सिंह जीके की बैठक, ढींढसा हुए सस्पेंड
–दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले बागी अकाली हुए एकजुट
–अकाली दल की शताब्दी मनाने 18 जनवरी को दिल्ली में होगा बड़ा जलसा
— ढींढसा की अगुवाई में होगा राष्ट्रीय जलसा, जीके व सरना देंगे साथ
–भाजपा के करीब हो रहे हैं सभी बागी अकाली दिग्गज

(खुशबू पाण्डेय)

नई दिल्ली/टीम डिजिटल : शिरोमणि अकाली दल ने बादल परिवार के खिलाफ बगावत का झंडा उठाने पर ढींढसा पिता-पुत्र को आज पार्टी से निष्कासित कर दिया। अकाली दल की कोर कमेटी के चंडीगढ़ में हुए इस फैसले का एक कनेक्शन दिल्ली विधानसभा चुनाव से भी जुड़ा है। शिरोमणि अकाली दल से बागी हो चुके नेताओं ने दिल्ली में 18 जनवरी को अकाली दल की स्थापना के शताब्दी वर्ष को मनाने के लिए बड़ा जलसा करने की तैयारी की है। सफर-ए-अकाली लहर के नाम से होने वाले इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक राज्य सभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढ़सा होंगे। उनकी मदद के लिए पूर्व अकाली अध्यक्ष एवं जागो पार्टी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके, और शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना इस कार्यक्रम को कामयाब बनाने में योगदान डालेंगे।

 

दिल्ली के अकाली परिवारों की तरफ से आयोजित किये जा रहे इस कार्यक्रम में शिरोमणि अकाली दल (बादल) को छोड़कर दिल्ली के सभी अकाली दलों, सेवक जत्थों, तथा अन्य पंथक प्रतिनिधियों को बुलाया गया है। इस संबंध में रविवार को मंजीत सिंह जीके के द्वारा समर्थकों की एक बड़ी बैठक राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा के दिल्ली के पंत मार्ग स्थित सरकारी आवास पर बुलाई गई है। इस मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं केा अधिक से अधिक लोगों को कार्यक्रम में लाने की जिम्मेदारियां दी जाएंगी। साथ ही 2021 में दिल्ली में प्रस्तावित दिल्ली गुरुद्वारा कमेटी चुनाव में अकाली दल (बादल) के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनाने की भी इस कार्यक्रम में नींव रखी जाएगी।

शिरो​मणि व दिल्ली कमेटी को आजाद करवाने हुए एकजुट

सूत्रों के मुताबिक बादल परिवार के शिकंजे से शिरोमणि कमेटी (एसजीपीसी) व दिल्ली कमेटी (डीएसजीएमसी) को आजाद करवाने के लिए दिल्ली की  पंथक समूह आपस से सिर जोड़ कर बैठने का मन बना चुके हैं। पिछले लंबे समय से सुखदेव सिंह ढींढसा, अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर बादल के खिलाफ बगावती तेवर अपनाए हुए थे। अब उनके विधायक पुत्र एवं पंजाब के पूर्व कैबिनेट मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा भी पिता की राह पर चल पड़े हैं।

दोनों ढींढसा पिता-पुत्र के दिल्ली में होने वाले बड़े जलसे में हाजिरी भरने वाले हैं। साथ ही शिरोमणि अकाली दल टकसाली, सिख स्टूडेंट फेडरेशन, तथा अन्य संगठनों के बड़े नेता भी इस मौके पर पहुंच सकते हैं। हालांकि, आधिकारिक रूप से मंजीत सिंह जीके और परमजीत सिंह सरना के द्वारा इस संबंध में जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन सूत्रों की माने तो आने वाले दो-तीन दिन में दिल्ली कमेटी के दोनों पूर्व अध्यक्षों के द्वारा इस बारे में संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस करने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस वजह से लगता है कि अकाली दल में इस बात को लेकर चिंता बन गई है। सूत्रों की माने तो दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की आखिरी तारीख 21 जनवरी है। चुनाव में अकाली दल (बादल) भाजपा से इस बार 8 सीटें मांग रहा है। अगर बादल विरोधी नेता दिल्ली में 18 जनवरी को दिल्ली में बड़ा जलसा करने में कामयाब हो जाते हैं तो कहीं न कहीं भाजपा के लिए अकाली दल को कम सीटें देने पर भी सोचना पड़ सकता है।

भाजपा के लिए ‘संजीवनी’ का काम करेंगे ढींढसा

वर्ष 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले शिरोमणि अकाली दल से निष्कासित हुए ढींढसा पिता-पुत्र भाजपा के लिए संजीवनी का काम कर सकते हैं। हो सकता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में पंजाब भाजपा में परमिंदर सिंह ढींढसा को बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है। अगर ऐसा भी हो जाएं तो बड़ी बात नहीं होगी। साथ ही अकाली दल द्वारा दोनों के निष्कासन के बाद दोनों का क्रमश: सांसद एवं विधायक बने रहने में भी अब कोई परेशानी नहीं होगी। बता दें कि पंजाब में हमेशा परंपरागत तरीके से जाट सिख चेहरे को ही आगे रखकर पार्टियां चुनाव लड़ती हैं। उस लिहाज से परमिंदर ढींढसा भाजपा के लिए तुरुक का इक्का साबित हो सकते हैं।

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