नई दिल्ली। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कुरुक्षेत्र के पिहोवा स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को भारत की सनातन आस्था, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय स्वाभिमान का अमर प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का सीधा प्रसारण देखा गया। मुख्यमंत्री ने युवाओं से सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की अपील की और 8 जून को सोमनाथ के लिए विशेष ट्रेन चलाने की जानकारी दी। यह पर्व सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है।
सोमनाथ मंदिर: सनातन आस्था और राष्ट्रीय स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को पिहोवा पहुंचकर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। पिहोवा का श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय वैदिक नदियों अरुणाय और सरस्वती के संगम पर स्थित है, जो खुद में बड़ी आध्यात्मिक महत्ता रखता है। मुख्यमंत्री ने यहां पहुंचकर मंदिर कमेटी और संत समाज का सम्मान लिया और श्रद्धालुओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ मंदिर से दिए गए संबोधन को देखा।
मुख्यमंत्री ने “हर-हर महादेव” के जयकारे के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर सिर्फ एक धार्मिक जगह नहीं है। यह पूरे भारत की हजारों साल पुरानी सनातन परंपरा, अटूट आस्था और राष्ट्र के स्वाभिमान का प्रतीक है। हर बार जब विदेशी आक्रमणकारियों ने इसे नुकसान पहुंचाया, तब भी यह मंदिर फिर से खड़ा हो गया और राष्ट्र को नई ताकत दी।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व और कार्यक्रम की रूपरेखा
‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ 11 जनवरी 2026 से शुरू होकर 11 जनवरी 2027 तक चलेगा। यह पर्व सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने और पहले प्रमुख आक्रमण के 1000 साल पूरे होने के अवसर पर मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि देशभर से लाखों श्रद्धालु इस दौरान सोमनाथ पहुंच रहे हैं। हरियाणा सरकार भी अपनी तरफ से योगदान दे रही है।
मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत 8 जून 2026 को हरियाणा से सोमनाथ के लिए एक विशेष ट्रेन रवाना की जाएगी। इस ट्रेन से आर्थिक रूप से कमजोर परिवार और वरिष्ठ नागरिक आसानी से तीर्थ यात्रा कर सकेंगे। यह योजना आम लोगों को धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने के लिए चलाई जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विरासत और विकास साथ-साथ
नायब सिंह सैनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में नया भारत विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। पूरे देश में उस समय राममय माहौल था।
उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ धाम के विकास का जिक्र किया। चारधाम परियोजना, प्रसाद योजना और अन्य प्रयासों से प्राचीन तीर्थ स्थलों को नई पहचान मिली है। मुख्यमंत्री ने योग, आयुर्वेद और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ जैसे भारतीय मूल्यों को विश्व स्तर पर पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। हरियाणा में भी कुरुक्षेत्र के अनुभव केंद्र और करतारपुर साहिब कॉरिडोर जैसे प्रयासों का उन्होंने जिक्र किया।
सोमनाथ मंदिर का ऐतिहासिक महत्व और बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम स्थान
सनातन परंपरा में सोमनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले स्थान पर है। पुराणों के अनुसार चंद्रदेव ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी। शिव जी ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए और जगह का नाम सोमनाथ पड़ा।
मंदिर का इतिहास संघर्ष और पुनरुत्थान की कहानी है। साल 1026 में महमूद गजनवी ने आक्रमण किया था। उसके बाद भी कई बार मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन हर बार श्रद्धालुओं और समाज ने इसे फिर से बनाया। स्वतंत्र भारत में सरदार वल्लभभाई पटेल ने पुनर्निर्माण का संकल्प लिया। 1951 में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उद्घाटन किया। आज यह 75 साल पूरे होने पर गर्व का विषय है।
युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी से खास अपील की। उन्होंने कहा कि भारत सिर्फ भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना है। युवाओं को अपने इतिहास, परंपराओं और मूल्यों से जुड़ना चाहिए। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का अभियान है। अभिभावकों और समाज को नई पीढ़ी को इन गौरवशाली कहानियों से परिचित कराना चाहिए।
हरियाणा सरकार की सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की पहल
नायब सिंह सैनी ने बताया कि हरियाणा सरकार राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए लगातार काम कर रही है। कुरुक्षेत्र की 48 कोस भूमि में 367 तीर्थ स्थल हैं। समय के साथ कई लुप्त हो गए थे। सरकार ने सर्वेक्षण कर 182 तीर्थ स्थलों का दस्तावेजीकरण किया है। 18 नए स्थलों को सूची में जोड़ा गया।
स्वदेश दर्शन योजना के तहत कुरुक्षेत्र को श्रीकृष्ण सर्किट में शामिल किया गया। 134 स्थानों को पर्यटन और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। ज्योतिसर अनुभव केंद्र महाभारत की कहानी को आधुनिक तकनीक से जीवंत कर रहा है। सरस्वती और दृषद्वती नदियों के किनारे स्थित इन स्थलों का विकास धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा।
संतों का संदेश: सोमनाथ भारत की अटूट शक्ति का प्रतीक
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। आक्रमणकारी इतिहास में गुम हो गए, लेकिन सोमनाथ की ध्वजा आज भी शक्ति का संदेश दे रही है। उन्होंने धैर्य और संघर्ष की सीख दी।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पूरी, संत बंसीपुरी, पंडित सतपाल महाराज समेत कई संतों ने कार्यक्रम में शिरकत की। मुख्यमंत्री ने सभी संतों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। मंदिर कमेटी के प्रधान गौतम भूषण और अन्य गणमान्य लोगों ने भी उपस्थिति दर्ज की।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का जन-जन तक पहुंचाना जरूरी
मुख्यमंत्री ने संतों, धार्मिक संगठनों, युवाओं और सामाजिक संस्थाओं से अपील की कि वे इस पर्व का संदेश हर गांव और हर घर तक पहुंचाएं। भारत को आधुनिकता और विकास के रास्ते पर चलते हुए अपनी जड़ों से भी जुड़े रहना होगा।
यह कार्यक्रम साधारण श्रद्धालुओं से लेकर बड़े-बड़े संतों तक सबको एक मंच पर लाया। वैदिक संगम स्थल पर आयोजित यह आयोजन आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहा।
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