नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को संसद में ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ की प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि देश भर में अब तक 39.72 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर (RTS) सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। फरवरी 2024 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक ग्रामीण क्षेत्रों सहित कुल 48.02 लाख से अधिक परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
राज्यसभा में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने बताया कि केवल वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही 18.71 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जिससे देश में 6.7 गीगावाट (GW) की अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता जुड़ी। इस एक वर्ष में 22.71 लाख परिवारों को योजना से जोड़ा गया।
18.93 लाख से अधिक परिवारों का बिजली बिल हुआ शून्य
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सोलर सिस्टम लगाने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। विभिन्न राज्यों के डिस्कॉम (विद्युत वितरण कंपनियों) की रिपोर्ट के अनुसार:
- शून्य बिजली बिल: ग्रामीण परिवारों सहित 18.93 लाख से अधिक लाभार्थियों को कम से कम एक बिलिंग अवधि के दौरान बिल्कुल शून्य (Zero) बिजली बिल प्राप्त हुआ है।
- आवेदन की प्रक्रिया: यह पूरी तरह डिमांड-ड्रिवन (मांग पर आधारित) योजना है। ग्रिड से जुड़े बिजली कनेक्शन वाले सभी आवासीय उपभोक्ता राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
व्यावसायिक और सरकारी संस्थानों के लिए भी प्रावधान
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल आवासीय घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी भवनों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य केंद्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी रूफटॉप सोलर लगाने की व्यवस्था है। हालांकि, व्यावसायिक और सरकारी श्रेणियों को केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA/सब्सिडी) नहीं दी जाती, क्योंकि इनके लिए ये परियोजनाएं बिना सब्सिडी के भी आर्थिक रूप से लाभदायक हैं।
2030 तक सौर ऊर्जा की भूमिका
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि वर्ष 2030 तक भारत में बढ़ने वाली बिजली की कुल अतिरिक्त मांग का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले सौर ऊर्जा से पूरा होगा। वहीं, शेष 25 प्रतिशत मांग पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे कम-कार्बन उत्सर्जन वाले स्रोतों से पूरी होने का अनुमान है।
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