नई दिल्ली। भारत की राजधानी नई दिल्ली शनिवार से शुरू हो रहे दो दिवसीय ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। वैश्विक व्यापार में जारी उथल-पुथल के बीच भारत इस महासम्मेलन के जरिए ब्रिक्स को आर्थिक प्रगति का मुख्य केंद्र बनाने और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की प्राथमिकताओं जैसे खाद्य, ऊर्जा और सप्लाई चेन सुरक्षा को मजबूती से उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में भाग लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत यात्रा पर आ रहे हैं, जिसकी आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।
नई दिल्ली पहुंच रहे हैं दुनिया के ताकतवर नेता
इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के कई बड़े चेहरे एक मंच पर नज़र आएंगे। सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों में:
- शी जिनपिंग (राष्ट्रपति, चीन)
- व्लादिमीर पुतिन (राष्ट्रपति, रूस)
- मसूद पेजेशकियन (राष्ट्रपति, ईरान)
- सिरिल रामफोसा (राष्ट्रपति, दक्षिण अफ्रीका)
- प्रबोवो सुबियांतो (राष्ट्रपति, इंडोनेशिया)
भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, यह सम्मेलन वैश्विक व्यापारिक तनावों, टैरिफ युद्ध और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर में उभरती अर्थव्यवस्थाओं के हितों की रक्षा करने के लिए एक पूरक मंच साबित होगा।
वैश्विक मंदी और पश्चिम एशिया संकट के बीच बड़ा सम्मेलन
नई दिल्ली में यह शिखर सम्मेलन एक ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व (West Asia) में तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और अमेरिकी प्रशासन की सख्त व्यापार नीतियों का असर झेल रही है।
सम्मेलन शुरू होने में महज दो दिन बचे हैं, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सभी सदस्य देश साझा घोषणापत्र (Joint Declaration) पर सर्वसम्मति बना पाते हैं या नहीं। दरअसल, पश्चिम एशिया संकट के रुख को लेकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच मतभेद बरकरार हैं, और चूंकि ब्रिक्स समूह के सभी फैसले सर्वसम्मति (Consensus) से लिए जाते हैं, इसलिए साझा बयान तैयार करना एक बड़ी चुनौती है।
ब्रिक्स की वैश्विक ताकत और भारत की थीम
ब्रिक्स दुनिया की 11 बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ जोड़ता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह समूह:
- दुनिया की 49.5% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।
- वैश्विक GDP में करीब 40% का योगदान देता है।
- वैश्विक व्यापार के 26% हिस्से पर नियंत्रण रखता है।
भारत 1 जनवरी 2026 से चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाल रहा है (इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में कमान संभाल चुका है)। इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का मुख्य थीम ‘मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए निर्माण’ रखा गया है, जो ‘मानवता सबसे पहले’ के सिद्धांत पर केंद्रित है। इस सम्मेलन की तैयारी के सिलसिले में भारत के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं।
ब्रिक्स का विस्तार: 5 देशों से 11 देशों तक का सफर
साल 2006 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान BRIC का गठन हुआ था और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में इसका पहला शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से यह BRICS बना।
2024 में समूह का विस्तार करते हुए मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इस परिवार का हिस्सा बना। इसके अतिरिक्त पिछले साल बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम को ब्रिक्स के पार्टनर देशों का दर्जा दिया गया है।
मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम: बंद कमरे की बैठक से लेकर ‘फैमिली फोटो’ तक
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक शेड्यूल के अनुसार, दो दिवसीय कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार रहेगी:
पहला दिन (शनिवार):
- दोपहर 2:35 बजे: ब्रिक्स सदस्यों के लिए ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर बंद कमरे में (Closed-door) बैठक।
- शाम 4:25 बजे: नेता ‘भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’ (Bharat Innovates Exhibition) का अवलोकन करेंगे।
- शाम 5:05 बजे: भारत मंडपम के लॉन में आधिकारिक ‘फैमिली फोटो’ और संयुक्त वृक्षारोपण समारोह।
- शाम 7:30 बजे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज (Gala Dinner)।
दूसरा दिन (रविवार):
- सुबह 9:55 बजे: भारत मंडपम में मेहमानों का आगमन।
- सुबह 10:35 बजे: आधिकारिक समूह तस्वीर (Group Photo)।
- सुबह 10:50 बजे: ‘रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी: शेपिंग द फ्यूचर फॉर इंक्लूसिव ग्लोबल ग्रोथ’ विषय पर मुख्य सत्र।
- समापन: ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) के आधिकारिक ऐलान के साथ सम्मेलन का समापन होगा।

