नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में आज से महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन बिल पर चर्चा शुरू हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे, जबकि गृह मंत्री अमित शाह चर्चा का जवाब देंगे। इस बिल के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की तैयारी है। साथ ही लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने और नए परिसीमन का प्रस्ताव रखा गया है, जो 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू होने की उम्मीद है।
महिला आरक्षण संशोधन बिल पर संसद में आज से चर्चा
16 और 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर कुल 18 घंटे की चर्चा तय की गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान सरकार के फैसले की विस्तृत जानकारी देंगे। गृह मंत्री अमित शाह चर्चा के अंत में जवाब देंगे। चर्चा पूरी होने के बाद वोटिंग भी कराई जाएगी। यह बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संशोधन करके महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण देने का रास्ता साफ करेगा।
लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव
संशोधित बिल के मुताबिक, लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रावधान है। इसमें राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें रखी जाएंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए यह बदलाव लाया जा रहा है। परिसीमन के बाद असल संख्या तय होगी, लेकिन ऊपरी सीमा 850 रखी गई है।
परिसीमन और जनगणना से जुड़े प्रावधान
बिल में साफ किया गया है कि परिसीमन के लिए जनसंख्या का मतलब उसी जनगणना से लिया जाएगा, जिसके आंकड़े आधिकारिक रूप से प्रकाशित हो चुके हैं। फिलहाल 2011 की जनगणना के आंकड़े उपलब्ध हैं, इसलिए उन्हीं के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण होगा। परिसीमन विधेयक 2026 पुराने 2002 के कानून को निरस्त करके नया परिसीमन आयोग गठित करने का प्रावधान करता है। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। रिपोर्ट पर जनता से सुझाव मांगे जाएंगे और फिर गजट अधिसूचना के बाद लागू किया जाएगा।
2029 से लागू होगा महिला आरक्षण
2023 में पास हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अब संशोधित करके 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने की तैयारी है। लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। यह आरक्षण 15 साल यानी 2029, 2034 और 2039 के चुनावों तक चलेगा। हर चुनाव में आरक्षित सीटें घुमाई जाएंगी ताकि अलग-अलग इलाकों की महिलाओं को मौका मिले। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान रखा गया है।
राज्यसभा में 18 अप्रैल को चर्चा और वोटिंग
लोकसभा में चर्चा के बाद 18 अप्रैल को राज्यसभा में इस बिल पर 10 घंटे की चर्चा और वोटिंग होगी। उसी दिन राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भी कराया जाएगा। केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया जाएगा, जिसे गृह मंत्री अमित शाह पेश कर सकते हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अन्य बिल पेश करेंगे।
परिसीमन आयोग का होगा गठन
बिल पास होने के बाद परिसीमन आयोग गठित किया जाएगा। यह आयोग लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों का नए सिरे से बंटवारा करेगा। रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी और मंजूरी के बाद लागू होगी। सरकार का लक्ष्य है कि पूरा प्रक्रिया पूरा करके 2029 के चुनाव से महिला आरक्षण प्रभावी हो जाए।
यह संशोधन बिल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। चर्चा के दौरान सभी दलों के सांसद अपने विचार रखेंगे। बिल को दो तिहाई बहुमत से पास करना होगा।
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