नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन किया है। उन्होंने इस कानून को ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया। इस अधिनियम के तहत संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। पूर्व राष्ट्रपति ने इसे लैंगिक समानता की दिशा में मजबूत पहल बताया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूर्व राष्ट्रपति का समर्थन
मोदी सरकार द्वारा लाए गए महिला आरक्षण बिल यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अब देश की पहली महिला राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल का समर्थन मिल गया है। 11 अप्रैल को लिखे गए पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की सराहना की। उन्होंने लिखा कि यह संवैधानिक संशोधन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
प्रतिभा पाटिल ने कहा कि यह विधेयक संसद और विधानसभाओं जैसी उच्च विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। इससे नीति निर्माण में महिलाओं के अनुभव और दृष्टिकोण शामिल होंगे, जो फैसलों को अधिक संतुलित और संवेदनशील बनाएंगे।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रावधान
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी अलग प्रावधान है। पूर्व राष्ट्रपति ने इसे लैंगिक समानता हासिल करने के भारत के संकल्प की पुष्टि बताया।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह कदम खासकर ग्रामीण और वंचित इलाकों की महिलाओं को नई प्रेरणा देगा। इससे महिलाएं आगे बढ़कर नेतृत्व की भूमिका निभा सकेंगी। प्रतिभा पाटिल ने पत्र में लिखा कि यह लंबे समय से देखा जा रहा सपना साकार होने की दिशा में निर्णायक कदम है। इससे समाज में पुरानी असमानताएं कम होंगी और एक अधिक समावेशी भारत बनेगा।
पूर्व राष्ट्रपति ने सभी संबंधित पक्षों की सराहना की जो इस कानून को लागू करने में जुटे हैं। उन्होंने इसे भारत की प्रगति के लिए सकारात्मक पहल करार दिया। इस पत्र को राजनीतिक स्तर पर महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।
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