लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल शुरू कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) ने 13 प्रमुख विभागों के साथ मिलकर मिशन मोड में काम शुरू किया है। इसका मकसद प्रदेश को देश का सबसे बड़ा स्किल हब बनाना है।
युवाओं को उद्योग की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने का लक्ष्य है। यह योजना शहरी-ग्रामीण युवाओं, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, निर्माण मजदूरों और जेल में बंद युवाओं तक पहुंचेगी।
युवा शक्ति को हुनर का साथ, UP बनेगा देश का बड़ा स्किल हब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में यूपीएसडीएम ने 13 विभागों को प्रस्ताव भेज दिए हैं। आगामी तीन महीनों में बड़े स्तर पर युवाओं को ट्रेनिंग शुरू हो जाएगी।
सरकार का फोकस सिर्फ ट्रेनिंग पर नहीं है। ट्रेनिंग के बाद युवाओं को नौकरी, खुद का काम या छोटा उद्योग शुरू करने में मदद करना है। इससे युवा आर्थिक रूप से मजबूत होंगे और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
हर वर्ग तक पहुंचेगा कौशल विकास अभियान
इस योजना में शामिल किए गए युवा वर्ग बहुत व्यापक हैं। शहरी गरीब परिवार, गांव के युवा, महिला स्वयं सहायता समूह, अल्पसंख्यक समुदाय, निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों के परिवार, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी और जेलों में बंद युवा भी इसमें शामिल हैं।
सरकार की कोशिश है कि कोई भी युवा कौशल ट्रेनिंग से वंचित न रहे। उनकी रुचि और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर ट्रेनिंग दी जाएगी। यह सामाजिक समावेशन की दिशा में एक अच्छा कदम माना जा रहा है।
प्रदेश के हर जिले में तैयार होंगे हुनरमंद युवा
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ युवाओं की आत्मनिर्भरता को बहुत महत्व देते हैं। कौशल विकास को उन्होंने युवाओं की प्रगति का मुख्य जरिया बनाया है।
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने सभी संबंधित विभागों को पत्र लिखकर ट्रेनिंग लक्ष्य और कार्ययोजना मांगी है। जून महीने के पहले सप्ताह में लक्ष्य आवंटित किए जाने की संभावना है। हर विभाग से नोडल अधिकारी भी नामित किए जा रहे हैं ताकि काम तेजी से हो सके।
जेलों में भी शुरू होगा कौशल प्रशिक्षण
एक खास बात यह है कि कारागार प्रशासन विभाग के जरिए जेलों में बंद युवाओं को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। मकसद है कि वे बाहर आने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में अच्छा योगदान दें।
इसके अलावा सूडा, ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला कल्याण, समाज कल्याण, ग्राम्य विकास, पर्यटन और हथकरघा-वस्त्रोद्योग जैसे विभागों के युवाओं को भी आधुनिक उद्योगों के हिसाब से ट्रेनिंग मिलेगी।
राष्ट्रीय मानकों के अनुसार होगा प्रशिक्षण
यूपीएसडीएम को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनसीवीईटी) से अवार्डिंग बॉडी का दर्जा मिला हुआ है। इससे ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट की विश्वसनीयता बनी रहेगी।
ट्रेनिंग राजकीय संस्थानों, निजी ट्रेनिंग पार्टनर्स और उद्योगों के साथ मिलकर दी जाएगी। सभी कार्यक्रम भारत सरकार के कॉस्ट कॉमन नॉर्म्स (CCN) के अनुसार चलाए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता और बेहतर गुणवत्ता बनी रहे।
अब तक 8 लाख से ज्यादा युवाओं को मिला लाभ
पिछले 9 वर्षों में यूपीएसडीएम ने 8,09,494 युवाओं को ट्रेनिंग दी है। इनमें से 3,04,810 युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार के अवसर मिल चुके हैं।
मिशन का मुख्य लक्ष्य 14 से 35 साल के युवाओं को छोटी अवधि की, उद्योग-उपयोगी ट्रेनिंग देना है। सरकार चाहती है कि उत्तर प्रदेश न सिर्फ जनसंख्या में, बल्कि प्रशिक्षित युवाओं और रोजगार सृजन में भी देश में आगे रहे।
इन 13 विभागों के साथ चलेगा अभियान
यूपीएसडीएम ने निम्न विभागों को प्रस्ताव भेजे हैं:
- माध्यमिक शिक्षा विभाग
- अल्पसंख्यक कल्याण विभाग
- राज्य नगरीय विकास अभिकरण (सूडा)
- संयुक्त आयुक्त उद्योग कार्यालय
- राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन
- उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन
- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड
- कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं विभाग
- महिला कल्याण विभाग
- समाज कल्याण विभाग
- ग्राम्य विकास विभाग
- पर्यटन विभाग
- हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग निदेशालय
विभागों के बीच बेहतर समन्वय से लाखों युवाओं को फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा
यह पहल उत्तर प्रदेश को स्किल हब बनाने की बड़ी कोशिश है। अगर योजना सही तरीके से लागू हुई तो युवाओं के पास बेहतर अवसर आएंगे। सरकार का जोर गुणवत्ता, पारदर्शिता और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग पर है।
युवा इस योजना का फायदा उठाकर अपना भविष्य संवार सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के संबंधित विभाग या यूपीएसडीएम कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
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