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राष्ट्रपति भवन में रचा गया इतिहास! ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का हुआ विशेष अभिनंदन, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने खुद परोसा भोजन

Bastar Pandum 2026 Winners Honored: राष्ट्रपति भवन में रचा गया इतिहास! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 'बस्तर पंडुम-2026' के विजेता 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को खुद परोसा भोजन। जानिए झिटकू-मिटकी कलाकृति की खास बातें।

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नई दिल्ली। देश के सर्वोच्च संवैधानिक परिसर राष्ट्रपति भवन में एक नया इतिहास रचा गया। पहली बार यहाँ बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं और पारंपरिक वेशभूषा का अनूठा वैभव देखने को मिला। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिल्ली पहुँचे बस्तर के 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में अभूतपूर्व और आत्मीय स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने न केवल स्वयं आगे बढ़कर सभी अतिथियों को भोजन परोसा, बल्कि बस्तर की समृद्ध लोककलाओं, सामाजिक ताने-बाने और परंपराओं की दिल खोलकर तारीफ की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 साल पुरानी प्रसिद्ध ‘झिटकू-मिटकी’ कलाकृति भेंट की, जिसे देखकर राष्ट्रपति भावविभोर नजर आईं।

इस ऐतिहासिक प्रतिनिधिमंडल में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री श्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, ‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेता कलाकार, पारंपरिक सामाजिक नेतृत्व प्रणाली के प्रतिनिधि (परगना मांझी, मांझी व चालकी), पद्मश्री से सम्मानित हस्तियां, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

'बस्तर पंडुम-2026' के विजेताओं का हुआ विशेष अभिनंदन; बस्तर की जनजातीय संस्कृति से अभिभूत नजर आईं राष्ट्रपति
‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का हुआ विशेष अभिनंदन; बस्तर की जनजातीय संस्कृति से अभिभूत नजर आईं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति ने खुद परोसा भोजन, बस्तर आने की जताई उत्कट इच्छा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं, पारम्परिक जन-नायकों और कलाकारों के सम्मान में विशेष स्नेह भोज का आयोजन किया था। भोज के दौरान राष्ट्रपति ने स्वयं सभी सदस्यों को भोजन परोसकर अद्वितीय वात्सल्य और आत्मीयता का परिचय दिया।

भोज के उपरांत उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से अनौपचारिक चर्चा करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था और ‘बस्तर पंडुम’ के अनुभवों की विस्तार से जानकारी ली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष निमंत्रण पर राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की उत्कट इच्छा जताई।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का उद्गार:

  • हृदय को छूता है बस्तर दशहरा: “बस्तर दशहरा मेरे हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा और बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं से मेरा गहरा आत्मीय जुड़ाव रहा है।”
  • पारिवारिक नाता: “मांझी और चालकी हमारे परिवार का ही हिस्सा हैं। मेरे पिताजी भी स्वयं मांझी थे। मांझी और चालकी समाज तथा प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य कर रहे हैं।”

विकास, शांति और समृद्धि के नए युग में बस्तर

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि ‘बस्तर पंडुम’ छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, जनजातीय अस्मिता और सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत उत्सव है, जिसने बस्तर की वास्तविक एवं सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्स्थापित किया है। ऐसे आयोजनों से जहाँ युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिल रहा है, वहीं स्थानीय पर्यटन और स्वरोजगार को भी नई गति प्राप्त हो रही है।

राष्ट्रपति ने बस्तर में शिक्षा, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेजी से हो रहे विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी प्रयासों और जनभागीदारी से आज बस्तर शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में अग्रसर है।

‘बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा से महका राष्ट्रपति भवन’: अमित शाह

इस अवसर पर उपस्थित केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में कई कार्यक्रमों में शिरकत की है, लेकिन बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतने बड़े जनजातीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन की शान बढ़ाते देखना एक अत्यंत सुखद और विशेष अनुभव है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस भेंट को छत्तीसगढ़ और बस्तर अंचल के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जी का जनजातीय समाज और संस्कृति से बहुत गहरा व स्वाभाविक लगाव रहा है। उनके मार्गदर्शन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और क्षेत्र के समग्र विकास को एक नई प्रेरणा तथा राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

'बस्तर पंडुम-2026' के विजेताओं का हुआ विशेष अभिनंदन; बस्तर की जनजातीय संस्कृति से अभिभूत नजर आईं राष्ट्रपति
‘बस्तर पंडुम-2026’ के विजेताओं का हुआ विशेष अभिनंदन; बस्तर की जनजातीय संस्कृति से अभिभूत नजर आईं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति को भेंट की गई 300 साल पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की कलाकृति

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की महान लोक-आस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक ‘झिटकू-मिटकी’ स्मृति-चिह्न भेंट किया।

झिटकू-मिटकी की अमर प्रेमगाथा:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी एक अमर प्रेमगाथा का प्रतीक है।
  • लोक मान्यता: जनश्रुति के अनुसार, एक कठिन अकाल के समय झिटकू और मिटकी ने अपने त्याग, प्रेम और समर्पण की अद्वितीय मिसाल पेश की थी, जिसके बाद समाज ने उन्हें देवतुल्य स्थान दिया।
  • धार्मिक स्थान: आज भी बस्तर में झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ और मिटकी को ‘गप्पा देई’ के रूप में पूजा जाता है। यह कलाकृति बस्तर की लोक-संस्कृति, त्याग और सामाजिक सौहार्द की अनुपम प्रतीक मानी जाती है।

लोकतांत्रिक विरासत से रूबरू हुआ प्रतिनिधिमंडल

कार्यक्रम के अंत में बस्तर से आए इस पूरे प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक परिसरों का भ्रमण किया और देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, संस्कृति सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग आयुक्त डोमन सिंह और संस्कृति संचालक संजय कन्नौजे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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