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पंजाब में AAP सरकार कर्मचारियों पर लाठी चला रही है, OPS का वादा पूरा नहीं किया: तरुण चुग

भाजपा सांसद तरुण चुग ने भगवंत मान सरकार पर आरोप लगाया कि AAP ने OPS का वादा तोड़ा। कर्मचारियों को लाठीचार्ज, DA एरियर लंबित। 27 अगस्त महाबंद का संकेत। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा निशाने पर।

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चंडीगढ़। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद तरुण चुग ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर सीधा आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी कर्मचारियों से किया OPS का वादा तोड़ रही है। सत्ता में आने से पहले पुरानी पेंशन योजना लागू करने का वादा किया गया था, 2022 में इसे दिवाली का तोहफा बताया गया, लेकिन चार साल बीत गए और वादा अधूरा है। अधिकार मांगने वाले कर्मचारियों को बातचीत की जगह पुलिस की लाठियां मिल रही हैं।

कर्मचारियों में फूट रहा आक्रोश

पिछले कुछ हफ्तों में पंजाब के कई विभागों के कर्मचारी सड़कों पर उतरे हैं। शिक्षक, सफाई कर्मचारी, बिजली निगम के कर्मचारी, मनरेगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़े कर्मचारी OPS के अलावा लंबित DA एरियर, राज्य वेतनमान, नियमितीकरण और अन्य सेवा संबंधी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। चुग का कहना है कि सरकार लगातार समस्याओं को टाल रही है। समाधान देने की बजाय आक्रोश बढ़ने दिया जा रहा है।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा निशाने पर

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा इन दिनों कर्मचारियों के गुस्से का मुख्य निशाना बने हुए हैं। वित्त विभाग ही कर्मचारियों से जुड़े ज्यादातर वित्तीय फैसले लेता है। कर्मचारी संगठन अब उनके आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। चुग ने सवाल उठाया कि विपक्ष में रहते हुए चीमा कर्मचारियों के धरनों में बैठते थे और 17 जुलाई 2020 की अधिसूचना सहित समस्याओं का हल निकालने का भरोसा देते थे। अब सरकार बनने के बाद उन्हीं कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए पुलिस बल क्यों इस्तेमाल हो रहा है?

सात लाख कर्मचारियों का मुद्दा सिर्फ उनका नहीं

पंजाब में करीब सात लाख सरकारी और विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके बीच बढ़ता असंतोष सिर्फ कर्मचारियों का मुद्दा नहीं रह गया है। इसका सीधा असर राज्य की शासन व्यवस्था और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक विश्वसनीयता पर पड़ रहा है। जब सरकार अपने कर्मचारियों से किए वादे पूरे नहीं कर पाती तो जनता के सामने किए गए बाकी वादों पर भी सवाल उठना लाजमी है।

वित्तीय संकट का बहाना नहीं चलेगा

चुग ने साफ कहा कि AAP सरकार वित्तीय संकट का बहाना बनाकर कर्मचारियों के हक को अनिश्चितकाल तक नहीं टाल सकती। पंजाब पर करीब 4.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, यह बात खुद सरकार मानती है। लेकिन यही संकट तब नजर नहीं आता जब राजनीतिक घोषणाओं और प्रचार पर संसाधन खर्च किए जाते हैं। कर्मचारियों से किया वादा पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। हर बार वित्तीय बाध्यता का नाम देकर टालना सही नहीं है।

DA एरियर में भी असंतोष

DA एरियर के मामले में भी स्थिति कर्मचारियों के अनुकूल नहीं है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में पंजाब के कर्मचारियों को कम DA मिल रहा है। बड़ी राशि का एरियर लंबित पड़ा है। चार साल से OPS के नाम पर इंतजार कर रहे कर्मचारियों को अब सिर्फ तारीख, आश्वासन और बैठकें नहीं बल्कि ठोस फैसला चाहिए।

27 अगस्त को महाबंद का संकेत

27 अगस्त को विभिन्न कर्मचारी संगठनों द्वारा प्रस्तावित महाबंद और राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि सरकार के प्रति कर्मचारियों का असंतोष गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। चुग ने भगवंत मान सरकार से कहा कि टकराव का रास्ता छोड़कर कर्मचारियों से तुरंत संवाद शुरू करें। OPS सहित सभी लंबित मांगों पर स्पष्ट और समयबद्ध फैसला लें।

कर्मचारी राजनीतिक दुश्मन नहीं

चुग ने जोर देकर कहा कि भगवंत मान सरकार को याद रखना चाहिए कि कर्मचारी कोई राजनीतिक विरोधी नहीं हैं। ये वही लोग हैं जो सरकार के हर विभाग को जमीन पर चलाते हैं। उनके अधिकारों की आवाज को लाठियों से दबाया जा सकता है, लेकिन उनकी नाराजगी खत्म नहीं की जा सकती। AAP ने कर्मचारियों को दिवाली का तोहफा देने का वादा किया था। चार साल बाद भी वह तोहफा गायब है। अब पंजाब के कर्मचारी इस वादाखिलाफी का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देंगे।

सरकार की विश्वसनीयता दांव पर

चुग के मुताबिक कर्मचारियों के साथ किया गया व्यवहार AAP सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रहा है। सत्ता में आने से पहले जो वादे किए गए थे, उन्हें पूरा करने की बजाय लाठीचार्ज का रास्ता अपनाया जा रहा है। यह सिर्फ पंजाब के कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे राज्य की शासन व्यवस्था को प्रभावित करने वाला मसला बन चुका है। कर्मचारियों का आक्रोश अगर और बढ़ता है तो प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।

क्या कहते हैं आंकड़े और हकीकत

पंजाब में सरकारी कर्मचारी और विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी संख्या में करीब सात लाख हैं। इनके बीच OPS, DA एरियर और नियमितीकरण जैसे मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। सरकार वित्तीय दबाव का हवाला देती है, लेकिन चुग का आरोप है कि राजनीतिक खर्च पर यह दबाव नजर नहीं आता। कर्मचारी संगठन लगातार आंदोलन कर रहे हैं और 27 अगस्त का महाबंद इसका बड़ा प्रमाण है।

आगे क्या हो सकता है

भाजपा नेता ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार कर्मचारियों से संवाद नहीं करती और ठोस फैसले नहीं लेती तो असंतोष और बढ़ेगा। लाठीचार्ज से आवाज दबाने की कोशिश से समस्या हल नहीं होगी। कर्मचारियों को उनके हक मिलने चाहिए। OPS का वादा पूरा करना अब सिर्फ कर्मचारियों की मांग नहीं बल्कि सरकार की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।

तरुण चुग ने कहा कि पंजाब की जनता और कर्मचारी दोनों ही इस वादाखिलाफी को याद रखेंगे। सरकार को अब तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए, नहीं तो राजनीतिक नुकसान भी हो सकता है। कर्मचारियों के हक पर डाका डालने का आरोप लगाते हुए उन्होंने AAP सरकार से जवाब मांगा है।

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