लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित न होने देने के विरोध में जन आक्रोश महिला पदयात्रा का नेतृत्व किया। हजारों महिलाओं ने मुख्यमंत्री आवास से सिविल हॉस्पिटल होते हुए विधान भवन तक पदयात्रा में हिस्सा लिया। इस दौरान सीएम योगी के साथ पूरा मंत्रिमंडल, दोनों उपमुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और सहयोगी दलों के नेता भी शामिल हुए। पदयात्रा का उद्देश्य विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर बाधा डालने का आरोप लगाना था।
महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष का रुख
नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। हाल ही में संसद के विशेष सत्र में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक (131वां संशोधन) लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके सहित इंडी गठबंधन के दलों का आचरण महिलाओं के अधिकारों के प्रति अनुचित रहा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दलों को अपनी छवि सुधारने का अवसर दिया था, लेकिन उन्होंने इसका दुरुपयोग किया।
पदयात्रा में शामिल महिलाओं ने तेज धूप के बावजूद उत्साह दिखाया। हाथों में तख्तियां थामे वे नारेबाजी कर रही थीं, जैसे “बहन-बेटियों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” और “महिला अधिकारों पर वार-सपा-कांग्रेस जिम्मेदार”। यह आयोजन विपक्ष की नीतियों के खिलाफ महिलाओं के आक्रोश को व्यक्त करने का माध्यम बना।

मुख्यमंत्री योगी का संबोधन
विधान भवन के सामने महिलाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने वाला है। यह व्यवस्था वर्ष 2029 तक लागू होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने इस बारे में आश्वासन भी दिया था। फिर भी विपक्ष का रवैया नारी गरिमा के प्रतिकूल रहा।
सीएम योगी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने ‘महिला, गरीब, युवा और किसान’ इन चार वर्गों को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई हैं। इनमें बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसी योजनाएं शामिल हैं। स्वच्छ भारत मिशन ने महिलाओं की गरिमा की रक्षा में मदद की है, जबकि उज्ज्वला योजना ने उनके स्वास्थ्य और स्वावलंबन को बढ़ावा दिया है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया, जैसे मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना। उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के लिए प्रतिबद्ध है।
पदयात्रा का विवरण और जन भागीदारी
पदयात्रा सुबह लगभग 10 बजे मुख्यमंत्री आवास से शुरू हुई। मार्ग पर चुभने वाली धूप थी, लेकिन महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ। युवा, बुजुर्ग, छात्राएं और कामकाजी महिलाएं सभी वर्गों की भागीदारी देखी गई। रैली में अनुशासन और उत्साह का माहौल रहा। आम जनता ने भी तालियां बजाकर और नारों से समर्थन जताया।

पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक तथा सहयोगी दलों के नेता शामिल थे। पूरी सरकार सड़क पर उतरी, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। महिलाओं ने सपा और कांग्रेस की पुरानी बीमारी—आधी आबादी से गद्दारी—का जिक्र करते हुए नारेबाजी की।
विपक्ष पर आरोप और सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण पर दोहरा चरित्र दिखाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के साथ अन्याय किया। देशभर में महिलाएं इस अन्याय के खिलाफ सड़कों पर उतर रही हैं। लखनऊ में हुई यह पदयात्रा प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के प्रति जनसमर्थन का प्रतीक है।
सीएम योगी ने सभी महिलाओं का आभार व्यक्त किया और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर काम करती रहेगी। उनके अधिकारों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

महिलाओं का आक्रोश और सामाजिक प्रभाव
पदयात्रा में शामिल महिलाओं ने कहा कि सपा-कांग्रेस की राजनीति महिलाओं के खिलाफ रही है। उन्होंने विपक्ष की कुत्सित राजनीति की निंदा की। यह आयोजन साबित करता है कि आधी आबादी अपने अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगी।
भारत में महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में मूल रूप से पारित हुआ था, लेकिन हालिया संशोधन पर विवाद हुआ। भाजपा इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का हिस्सा बताती है, जबकि विपक्ष परिसीमन और अन्य मुद्दों पर अपना पक्ष रखता है। इस पदयात्रा ने राजनीतिक बहस को नए सिरे से उजागर किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यह जन आक्रोश पदयात्रा उत्तर प्रदेश में महिला अधिकारों पर हो रहे चर्चा को मजबूत करती है। हजारों महिलाओं की भागीदारी ने दिखाया कि समाज इस मुद्दे पर संवेदनशील है। सरकार का दावा है कि वह महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए योजनाओं के माध्यम से काम कर रही है।
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