नई दिल्ली। पीएम स्वनिधि योजना ने छोटे रेहड़ी-पटरी वाले व्यापारियों को आर्थिक मदद पहुंचाकर उनके जीवन में स्थिरता लाई है। योजना शुरू हुए छह साल पूरे हो चुके हैं। इस दौरान कई लाभार्थियों ने योजना के तहत मिले ऋण का सही उपयोग करके अपना व्यवसाय बढ़ाया और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़े। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की बबिता और वाराणसी के सारनाथ निवासी विष्णु शंकर भारद्वाज इनमें शामिल हैं, जिन्होंने योजना की मदद से अपनी दुकानें स्थायी बनाईं।
पीएम स्वनिधि योजना क्या है और कैसे काम करती है
पीएम स्वनिधि योजना मुख्य रूप से स्ट्रीट वेंडर्स और रेहड़ी-पटरी वाले छोटे व्यापारियों के लिए शुरू की गई थी। योजना के तहत उन्हें बिना गारंटी के छोटा ऋण मिलता है, जिसे वे अपने कारोबार में लगा सकते हैं। समय पर चुकाने पर अगली किस्त आसानी से मिल जाती है। इस योजना ने कोविड-19 महामारी के बाद कई लोगों को आर्थिक संकट से उबारने में मदद की।
बबिता की कहानी: सड़क किनारे से पक्की दुकान तक
गाजियाबाद की बबिता पहले सड़क किनारे पटरी लगाकर पूजा सामग्री बेचती थीं। अगरबत्ती, दीये, फूल, नारियल और अन्य पूजा की चीजें उनकी मुख्य वस्तुएं थीं। कोविड-19 के समय उनके कारोबार पर बुरा असर पड़ा। आय कम हो गई और भविष्य अनिश्चित लगने लगा।
एक रिश्तेदार की सलाह पर उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लिए आवेदन किया। योजना से उन्हें ऋण मिला। पहले किस्त का समय पर भुगतान करने के बाद दूसरी किस्त भी आसानी से हासिल हुई। कुल 50 हजार रुपये तक का ऋण लेकर उन्होंने अपनी दुकान को स्थायी जगह पर बना लिया।
बबिता बताती हैं कि पहले सड़क पर दुकान लगाने में जगह की कमी, बारिश और अन्य परेशानियां होती थीं। अब पक्की दुकान होने से व्यवसाय सुव्यवस्थित हो गया है। वे रोजाना दो से तीन हजार रुपये तक की कमाई कर रही हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है।
विष्णु शंकर भारद्वाज: सामाजिक सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ा
वाराणसी के सारनाथ में रहने वाले विष्णु शंकर भारद्वाज पत्थर की मूर्तियां, मालाएं और उपहार सामग्री बेचते हैं। उन्होंने बताया कि पहले बैंक से ऋण लेना बहुत मुश्किल था। छोटे कारोबारियों को कई कागजी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं।
पीएम स्वनिधि योजना ने आसान प्रक्रिया से ऋण उपलब्ध कराया। इससे न सिर्फ उनका कारोबार बढ़ा, बल्कि आत्मविश्वास और समाज में सम्मान भी बढ़ा। विष्णु जी अन्य सरकारी योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना का भी लाभ ले चुके हैं।
योजना से जुड़ी अन्य सुविधाएं और पारदर्शिता
दोनों लाभार्थियों ने केंद्र सरकार की अन्य योजनाओं की भी सराहना की। बीमा सुरक्षा, प्रधानमंत्री आवास योजना और राशन कार्ड जैसी सुविधाओं से उनका जीवन स्तर सुधरा। वे कहते हैं कि अब योजनाओं का लाभ सीधे बैंक खातों में पहुंचता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलिए कम हो गए हैं।
महंगाई और विकास पर लाभार्थियों का नजरिया
बबिता और विष्णु दोनों ने कहा कि विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। महंगाई के साथ आय में भी वृद्धि हुई है। वे मानते हैं कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं आम लोगों तक पहुंच रही हैं।
योजना का बड़ा प्रभाव
छह साल में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना ने देशभर में लाखों छोटे व्यापारियों को सहारा दिया। यह आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा बनकर काम कर रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत कई लाभार्थियों ने अपना कारोबार विस्तार किया और नियमित आय हासिल की।
यह योजना विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुई है जो पहले औपचारिक बैंकिंग सुविधाओं से दूर थे। समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज में छूट और अगली किस्त आसानी से मिलने की व्यवस्था ने कई लोगों को प्रोत्साहित किया।
पीएम स्वनिधि योजना छोटे कारोबारियों के लिए मजबूत सहारा बनकर उभरी है। बबिता और विष्णु शंकर भारद्वाज जैसे लाभार्थी इसके जीवंत उदाहरण हैं। योजना ने न सिर्फ आर्थिक मदद दी, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान भी बढ़ाया। सरकार की ऐसी योजनाएं आगे भी जारी रहें, यही आम लोगों की अपेक्षा है।
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