लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मंगलवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के संशोधन विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के खिलाफ ‘जन आक्रोश पदयात्रा’ निकाली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हजारों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर विपक्ष की नीतियों का विरोध किया। उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य समेत कई नेता भी इस पदयात्रा में शामिल हुए।
17 अप्रैल 2026 को संसद में इस संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ, लेकिन जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने से यह पास नहीं हो सका। विपक्ष ने इसका विरोध किया और मतदान के बाद खुशी जाहिर की, जिसे भाजपा ने महिलाओं के अधिकारों का हनन बताया। इस घटना के विरोध में लखनऊ में महिलाएं सड़क पर आईं और कहा कि 2027 के चुनाव में सपा-कांग्रेस को महिला वोटों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर क्या हुआ
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में संसद ने पास किया था, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। यह आरक्षण परिसीमन (delimitation) के बाद लागू होना था। अप्रैल 2026 में सरकार ने संविधान के 131वें संशोधन सहित संबंधित विधेयक लाए, ताकि महिला आरक्षण को जल्दी लागू किया जा सके।
लेकिन 17 अप्रैल को लोकसभा में मतदान के दौरान विधेयक पास नहीं हो सका। सरकार की ओर से 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट गए। दो-तिहाई बहुमत की जरूरत पूरी नहीं हुई। विपक्षी दलों ने कहा कि बिल में परिसीमन और सीटों के विस्तार से उत्तर-दक्षिण भारत में असंतुलन हो सकता है। कुछ सदस्यों ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की मांग भी रखी। सरकार ने इन आपत्तियों का जवाब दिया, लेकिन बहुमत नहीं जुट सका।
लखनऊ में जन आक्रोश पदयात्रा का आयोजन
इस घटना के बाद भाजपा ने उत्तर प्रदेश में महिला आक्रोश को सड़कों पर उतारा। लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास से विधानसभा तक पदयात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्यसभा सांसद अरुण सिंह और केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी शामिल हुए।
हजारों महिलाएं इस मार्च में चलीं। उन्होंने नारेबाजी की और कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के हितों को नजरअंदाज किया है। गर्मी के बावजूद महिलाओं का उत्साह देखा गया। पदयात्रा का मकसद महिला आरक्षण के समर्थन में जनमत जुटाना और विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाना था।
बृजेश पाठक का बयान
उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश की बहनें सड़क पर निकलकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का विरोध कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों दलों की संकीर्ण सोच के कारण विधेयक को रोका गया। पाठक ने कहा कि सपा शासन में गुंडागर्दी बढ़ती है, जिससे महिलाएं परेशान होती हैं। उन्होंने अपील की कि महिलाएं एकजुट होकर विपक्ष को सबक सिखाएं।
केशव प्रसाद मौर्य का संकल्प
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिलाओं को आरक्षण दिलाने के लिए प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने पूछा कि क्या महिलाओं के बिना कोई चुनाव जीता जा सकता है। मौर्य ने कहा कि अगर सपा-कांग्रेस ने महिलाओं को आरक्षण नहीं दिलाने दिया, तो 2027 के चुनाव में उन्हें वोट नहीं मिलेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि हिम्मत नहीं हारेंगे और महिलाओं का हक दिलाएंगे।
अरुण सिंह ने विपक्ष की मानसिकता पर सवाल उठाए
राज्यसभा सांसद अरुण सिंह ने कहा कि 17 अप्रैल को महिलाओं में उम्मीद थी कि यह दिन उनके लिए खास होगा। लेकिन कांग्रेस और सपा ने विधेयक का विरोध किया और मतदान के बाद तालियां बजाईं। सिंह ने इसे नारी अधिकारों का हनन बताया और कहा कि पूरे देश में जन आक्रोश है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाएं इस रवैये को कभी माफ नहीं करेंगी।
पंकज चौधरी का आरोप
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा महिलाओं के उत्थान और सम्मान की बात करती है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नारी सशक्तीकरण के कई कदम उठाए गए। चौधरी ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक महिलाओं के नाम पर 80 प्रतिशत बहुसंख्यक महिलाओं के हितों को नुकसान पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इंडी एलाइंस अब एंटी-वुमेन एलाइंस साबित हो गया है।
विपक्ष पर राजनीतिक आरोप
भाजपा नेताओं ने एक स्वर में कहा कि विपक्ष मोदी विरोध में इतना अंधा हो गया है कि वह अच्छी पहलों का भी विरोध कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि सपा-कांग्रेस की इस भूमिका का असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दिखेगा। महिलाओं से अपील की गई कि वे अपनी ताकत दिखाएं और वोट बैंक की राजनीति का जवाब दें।
पदयात्रा में शामिल महिलाओं ने कहा कि वे नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में हैं। उनका मानना था कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण बेहतर होगा।
यह घटना महिला आरक्षण, परिसीमन और क्षेत्रीय संतुलन जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस को फिर से सामने लाई है। सरकार ने कहा कि वह महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए आगे भी प्रयास करेगी। वहीं विपक्ष ने अपने स्टैंड को संवैधानिक और संघीय सिद्धांतों से जोड़ा।
लखनऊ की यह पदयात्रा दिखाती है कि महिला आरक्षण अब सिर्फ कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि चुनावी एजेंडा भी बन गया है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है।
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