हापुड़। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के गढ़ इलाके में बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचीं जिलाधिकारी कविता मीना ने एक बुजुर्ग महिला से कहा—“देखती हूँ, मेरे पास दवाई होगी।” गढ़मुक्तेश्वर के गंगा तटीय इलाके में जलभराव के बीच यह संवेदनशील बात हर किसी का दिल छू गई। औपचारिकता छोड़कर जनता के दुख में शामिल होने का यह अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
ग्राउंड पर पहुंचीं डीएम, सीधा संवाद
गढ़मुक्तेश्वर तहसील के चठ लटीरा गांव में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचीं जिलाधिकारी कविता मीना ग्रामीणों से लगातार बात कर रही थीं। तभी एक बुजुर्ग महिला ने अपना हाल सुनाया—“डीएम साहब, बुखार आ रहा है।” किसी प्रशासनिक रौब के बिना डीएम ने बड़े सहज अंदाज में जवाब दिया—“देखती हूँ, मेरे पास दवाई होगी।” उन्होंने महिला को तसल्ली दी और तुरंत मदद का भरोसा दिलाया। मौके पर मौजूद लोग भावुक हो गए। एक जिला प्रमुख का इतना सादा और अपनापन भरा रवैया देखकर गांव वाले प्रभावित हुए।
राहत कार्यों की खुद संभाली कमान
डीएम ने चठ लटीरा सहित बाढ़ प्रभावित कई गांवों में पानी के बीच पहुंचकर राहत शिविरों का निरीक्षण किया। राशन सामग्री और साफ पीने के पानी की सप्लाई चेक की। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि कोई भी पीड़ित बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे। बुजुर्ग महिला से बात के तुरंत बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों को आदेश दिए कि प्रभावित इलाकों में लगातार मोबाइल मेडिकल कैंप लगाए जाएं और घर-घर जरूरी दवाइयां पहुंचाई जाएं।
सोशल मीडिया पर वायरल, लोग कर रहे तारीफ
इस पूरे प्रसंग का वीडियो किसी स्थानीय व्यक्ति ने रिकॉर्ड कर लिया। अब यह क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रही है। लोग जिलाधिकारी कविता मीना के इस सहज और संवेदनशील रवैये की जमकर सराहना कर रहे हैं। आम राय है कि जब अधिकारी इस तरह जनता के सुख-दुख में अभिभावक बनकर खड़े होते हैं तो मुश्किल हालात से निपटना आसान हो जाता है। सरकारी तंत्र के प्रति भरोसा भी बढ़ता है।
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IAS कविता मीना की पृष्ठभूमि
IAS कविता मीना मूल रूप से राजस्थान के दौसा जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने 2015 में यूपीएससी परीक्षा पहले ही अटेम्प्ट में पास की थी। उन्हें 50वीं रैंक मिली थी। इसके बाद उन्हें यूपी कैडर आवंटित किया गया। बाढ़ जैसे संकट में उनका यह रवैया उनकी संवेदनशीलता को दिखाता है।
प्रशासनिक अधिकारियों के लिए मिसाल
बाढ़ जैसी आपदा में जब शीर्ष अधिकारी खुद मैदान में उतरते हैं और आम लोगों के दर्द को समझते हैं तो राहत कार्य ज्यादा प्रभावी होते हैं। कविता मीना का यह रवैया सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल बन गया है। गांव वाले अब कह रहे हैं कि ऐसी अधिकारी से काम आसान लगता है। स्वास्थ्य टीमें भी उनके निर्देश पर सक्रिय हो गई हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अभी भी कई चुनौतियां बाकी हैं। लेकिन डीएम के इस अंदाज ने लोगों में भरोसा बढ़ाया है। वीडियो देखकर दूर-दूर से लोग कमेंट कर रहे हैं कि ऐसे अधिकारी चाहिए जो कागजी काम से आगे बढ़कर इंसानियत दिखाएं। हापुड़ प्रशासन बाढ़ राहत पर फोकस किए हुए है और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि संकट के समय संवेदनशीलता ही सबसे बड़ा राहत उपाय बन सकती है। बुजुर्ग महिला की बात सुनकर तुरंत दवा की पेशकश करने वाला यह पल अब कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।
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