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योगी सरकार ने 9 वर्षों में UP की महिलाओं को कैसे बनाया सशक्त? बीसी सखी से 42 हजार करोड़ का लेन-देन

योगी सरकार ने महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, लखपति दीदी योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के शुरू से ही महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा तथा सम्मान को प्राथमिकता दी है। पिछले नौ वर्षों में सरकार की विभिन्न योजनाओं से एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है।

इन प्रयासों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, ग्रामीण क्षेत्रों में बीसी सखी योजना के तहत 42,711 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेन-देन हुआ है और महिला श्रम बल की भागीदारी 13 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, लखपति दीदी योजना और अन्य कार्यक्रमों ने लाखों महिलाओं को लाभ पहुंचाया है।

योगी सरकार की महिलाओं के उत्थान के लिए निरंतर प्रतिबद्धता

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिलाओं के उत्थान के लिए कार्यकाल के पहले दिन से ही ठोस कदम उठाए हैं। सरकार का मानना है कि महिलाओं-बालिकाओं के सशक्तीकरण, सम्मान और सुरक्षा में कोई समझौता नहीं किया जा सकता। पिछले नौ वर्षों के आंकड़ों से साफ है कि सुरक्षा, सम्मान, सशक्तिकरण, स्वावलंबन और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर लगातार ध्यान दिया गया।

सरकार ने इन वर्षों में एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। मुख्यमंत्री ने लोकसभा और विधानसभा में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का समर्थन किया है।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने वाली योजनाएं

योगी सरकार ने महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं। इनमें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, लखपति दीदी योजना, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, महिला उद्यमी उत्पाद विपणन योजना और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। इन कार्यक्रमों से आधी आबादी का ध्यान रखा गया है।

लखपति दीदी योजना के तहत 35 लाख महिलाओं को चिह्नित किया गया और 18.55 लाख महिलाएं अब लखपति की श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है। पीएम स्वनिधि योजना के माध्यम से भी 2 लाख से ज्यादा महिलाओं को लाभ मिला है।

बीसी सखी योजना से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण

ग्रामीण इलाकों में बीसी सखी योजना ने महिलाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी है। इस योजना के तहत महिलाओं ने 42,711 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेन-देन किया है। साथ ही उन्होंने 116 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभांश भी अर्जित किया है।

इसके अलावा, 15,409 विद्युत सखियों ने 3,207 करोड़ रुपये के बिजली बिल संग्रह का काम किया और अपने लिए 41.3 करोड़ रुपये का कमीशन प्राप्त किया। यह योजना गांवों में बैंकिंग सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने में मदद कर रही है और महिलाओं को आय का नया जरिया उपलब्ध करा रही है।

बेटियों पर विशेष ध्यान और शिक्षा-विवाह में सहायता

सरकार ने बेटियों की सुरक्षा और विकास पर खास जोर दिया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत 2 करोड़ 85 लाख महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक किया गया। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से 5 लाख 20 हजार से ज्यादा बेटियों का विवाह कराया गया है।

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित हुई हैं। यह योजना जन्म से लेकर शिक्षा तक बेटियों को आर्थिक सहारा देती है। सरकार के इन प्रयासों ने ‘सबल नारी, प्रगति हमारी’ जैसे नारों को जमीनी स्तर पर साकार किया है।

महिलाओं को काम करने की आजादी और सुरक्षा

योगी सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी है। सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है। वर्ष 2017 से पहले जहां महिला श्रम बल की भागीदारी करीब 13 प्रतिशत थी, वह अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है।

निराश्रित महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी की गई। मासिक पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दी गई है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन राशि में पिछले नौ वर्षों में पांच गुना तक वृद्धि हुई है। अनुपूरक पुष्टाहार योजना से 2 करोड़ 12 लाख बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को पोषण संबंधी लाभ मिला है।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम

महिलाओं की सुरक्षा सरकार की प्रमुख प्राथमिकता रही है। 181 महिला हेल्पलाइन के जरिए 8.42 लाख से ज्यादा महिलाओं को मदद पहुंचाई गई। जघन्य अपराधों से पीड़ित महिलाओं और बालिकाओं के लिए ‘रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष’ स्थापित किया गया।

इस कोष से 14 हजार से ज्यादा पीड़िताओं को 511 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षतिपूर्ति दी जा चुकी है। इन उपायों से महिलाओं में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।

योगी सरकार के इन प्रयासों से उत्तर प्रदेश की महिलाएं आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। योजनाओं का लाभ लाखों परिवारों तक पहुंचा है। सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं न सिर्फ घर-परिवार बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था में भी अपनी भूमिका मजबूती से निभाएं। ये कदम महिलाओं के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

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