लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने आयुष्मान भारत योजना के बेहतर क्रियान्वयन में देश में अग्रणी स्थान हासिल किया है। नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी (एनएचए) ने पुणे में 17 और 18 अप्रैल 2026 को आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में प्रदेश को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के उत्कृष्ट संचालन के लिए सम्मानित किया।
उत्तर प्रदेश को विशेष रूप से पीएम-जेएवाई से जुड़े अस्पतालों में एबीडीएम-इनेबल्ड हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) और स्वास्थ्य रिकॉर्ड लिंकेज की सबसे अधिक संख्या के लिए पुरस्कार मिला है। यह उपलब्धि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण और आम लोगों तक बेहतर पहुंच बनाने के प्रयासों का नतीजा है।
आयुष्मान भारत योजना में उत्तर प्रदेश की उपलब्धि
योगी सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है। नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने योजना के तहत लाभार्थियों को शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाने और योजना को धरातल पर उतारने में अच्छा प्रदर्शन किया है। स्वास्थ्य विभाग की सचिव रितु माहेश्वरी और साचीज (सोशल असिस्टेंस कमिश्नरेट) की सीईओ अर्चना वर्मा ने इस सम्मान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पुरस्कार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और डिजिटल प्रक्रियाओं को अपनाने का परिणाम है।
उत्तर प्रदेश में आयुष्मान कार्ड अस्पतालों की संख्या
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल लगभग 6,313 अस्पताल सूचीबद्ध हैं। इनमें निजी और सरकारी दोनों प्रकार के अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान हैं जहां एबीडीएम-इनेबल्ड हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम की सुविधा उपलब्ध है। इससे मरीजों को डिजिटल रिकॉर्ड, पारदर्शी प्रक्रिया और आसान इलाज की सुविधा मिल रही है। पिछले एक वर्ष में प्रदेश ने उच्च गुणवत्ता वाले अस्पतालों को प्राथमिकता देकर सूचीबद्ध करने की नीति अपनाई है, जिससे योजना की विश्वसनीयता बढ़ी है।
गंभीर बीमारियों के इलाज में सुधार
हाल ही में 100 या उससे अधिक बेड वाले 55 बड़े अस्पतालों को योजना से जोड़ा गया है। इन अस्पतालों के शामिल होने से द्वितीयक और तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हुई हैं। न्यूरोसर्जरी, नियोनेटल केयर, ऑन्कोलॉजी, रेडियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी और बर्न मैनेजमेंट जैसी विशेष सेवाओं पर ध्यान दिया गया है।
इससे गंभीर और जटिल बीमारियों के मरीजों को अब स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज मिल रहा है। पहले ऐसे मरीजों को बड़े शहरों या अन्य प्रदेशों में जाना पड़ता था, लेकिन अब ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सुविधा आसानी से उपलब्ध हो रही है। इससे गरीब परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।
डिजिटलीकरण से मरीजों को फायदा
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत उत्तर प्रदेश ने अच्छा काम किया है। एबीडीएम-इनेबल्ड अस्पतालों में मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जा रहे हैं। इससे दोहराव कम होता है, समय बचता है और इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती है।
प्रदेश में एबीडीएम के जरिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इससे लाभार्थी आसानी से अपना आयुष्मान कार्ड इस्तेमाल कर सकते हैं और अस्पतालों में कैशलेस इलाज की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। योगी सरकार ने अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर भी ध्यान दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण इलाकों के लोगों को मिल रहा है। जहां पहले उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, वहां अब आयुष्मान भारत के तहत बेहतर इलाज उपलब्ध हो गया है। सरकार ने केवल अस्पताल जोड़ने पर ही नहीं, बल्कि विशेष सेवाओं को मजबूत करने पर भी काम किया है।
परिणामस्वरूप, गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को बिना आर्थिक चिंता के इलाज मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल नेटवर्क और व्यापक अस्पताल नेटवर्क से मरीजों को समय पर और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।
यह सम्मान उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में निरंतर सुधार का प्रमाण है। नेशनल हेल्थ ऑथॉरिटी द्वारा दिए गए इस पुरस्कार से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और बढ़ गई है।
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