लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों का ठोस परिणाम सामने आया है। निपुण भारत मिशन के तहत हालिया आकलन में प्रदेश के 32,480 प्राथमिक विद्यालयों को ‘निपुण’ घोषित किया गया है। इन स्कूलों में कक्षा 1 और 2 के कम से कम 80 प्रतिशत बच्चों ने भाषा और गणित में अपेक्षित दक्षता हासिल की है।
योगी सरकार इन निपुण विद्यालयों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी और अच्छा काम करने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेगी। यह आकलन डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा पारदर्शी तरीके से किया गया, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की तस्वीर उभरकर आई है।
निपुण भारत मिशन में उत्तर प्रदेश की उपलब्धि
निपुण भारत मिशन केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य कक्षा 3 तक के बच्चों में पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी समझ विकसित करना है। उत्तर प्रदेश में इस मिशन के तहत 2025-26 सत्र के दौरान करीब 1.07 लाख परिषदीय विद्यालयों का आकलन किया गया। कड़े मानकों के बावजूद 32,480 विद्यालय निपुण श्रेणी में शामिल हुए। इनमें कक्षा 1 और 2 के बच्चों की सीखने की क्षमता का जमीनी स्तर पर परीक्षण किया गया, जिसमें भाषा और गणित दोनों विषयों में अच्छा प्रदर्शन दर्ज हुआ।
यह परिणाम बेसिक शिक्षा विभाग के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है। सरकार का फोकस अब सिर्फ बच्चों के नामांकन पर नहीं, बल्कि उनके सीखने के नतीजों पर है।
निपुण विद्यालयों को मिलने वाली सुविधाएं
निपुण घोषित होने वाले प्रत्येक विद्यालय को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस राशि का उपयोग शैक्षणिक सामग्री खरीदने, बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने और क्लासरूम को आकर्षक बनाने में किया जाएगा।
इसके अलावा, उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को जिला और ब्लॉक स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय परिसर में ‘निपुण विद्यालय’ का लोगो भी लगाया जाएगा, जिससे इन स्कूलों की अलग पहचान बनेगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोत्साहन शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा।
टॉप प्रदर्शन करने वाले जिले
निपुण रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा काम किया है। सबसे अधिक निपुण विद्यालय वाले जिलों में शामिल हैं:
- हरदोई: 1002 विद्यालय
- अलीगढ़: 969 विद्यालय
- शाहजहांपुर: 916 विद्यालय
- महाराजगंज: 874 विद्यालय
- खीरी: 830 विद्यालय
ये आंकड़े बताते हैं कि इन जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग और स्थानीय अधिकारियों ने प्रभावी तरीके से काम किया। हालांकि, कुछ जिलों में प्रदर्शन अभी औसत से कम है, इसलिए वहां विशेष प्रयास किए जाएंगे।
पारदर्शी आकलन प्रक्रिया और डीएलएड प्रशिक्षुओं की भूमिका
इस बार आकलन को और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) के प्रशिक्षुओं को जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने खुद विद्यालयों में जाकर कक्षा 1 और 2 के बच्चों का परीक्षण किया।
निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर के जरिए पूरी रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों के पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है। इससे जवाबदेही बढ़ी है और कमजोर पहलुओं को आसानी से पहचाना जा सकता है।
गुणवत्ता सुधार के लिए किए गए अन्य प्रयास
निपुण विद्यालयों की संख्या बढ़ाने के पीछे कई बड़े कदम उठाए गए हैं। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों को फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (पढ़ना, लिखना और गणित) पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास और आईसीटी लैब विकसित की गईं। करीब 2.61 लाख शिक्षकों को टैबलेट वितरित किए गए, जिससे डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा मिला। ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.32 लाख विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया गया।
स्कूल चलो अभियान के जरिए 2024-25 में 13.22 लाख और 2025-26 में 15.84 लाख बच्चों का नामांकन कराया गया। साथ ही 7.73 लाख आउट ऑफ स्कूल बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ा गया।
आगे की योजना और चुनौतियां
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि कम प्रदर्शन वाले विद्यालयों को चिन्हित कर उन्हें निपुण श्रेणी में लाने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं। आने वाले समय में और अधिक स्कूलों को इस स्तर तक पहुंचाने की तैयारी है।
निपुण भारत मिशन के ये परिणाम दिखाते हैं कि नीति, प्रशिक्षण और नियमित निगरानी का सही समन्वय शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार ला सकता है। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा अब नामांकन से आगे बढ़कर सीखने के परिणामों पर केंद्रित हो रही है।
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