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Wednesday, May 12, 2021

महिलाओं के खिलाफ अपराध व यौन हिंसा पर सख्त कार्रवाई जरूरी

–MHA ने सभी राज्यों को जारी की एडवाइजरी, दिए निर्देश
–मुख्य सचिवों को निर्देश, राज्यों में नियमों का सख्ती से करें पालन
-सभी डीजीपी एवं पुलिस आयुक्तों को भी एडवाइजरी जारी
– महिलाओं के खिलाफ अपराध के हर मामले में हो अनिवार्य कार्रवाई
-नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर सजा का प्रावधान
–हाथरस सहित अन्य राज्यों की घटनाओं पर गृहमंत्रालय गंभीर

नई दिल्ली / टीम डिजिटल : देशभर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध विशेष रूप से यौन हिंसा की घटनाओं को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। साथ ही गृह मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के हर मामले में सभी नियमों का पालन करते हुए अनिवार्य कार्रवाई की जानी चाहिए। उत्तर प्रदेश के हाथरस में पिछले महीने एक युवती की मौत और उसके साथ कथित बलात्कार की घटना तथा देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय के
महिला सुरक्षा विभाग ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नियम कानून के तहत कार्रवाई करने को कहा है। एडवाइजरी की प्रति सभी पुलिस महानिदेशकों तथा पुलिस आयुक्तों को भी भेजी गई है
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि वह इससे पहले भी समय-समय पर इस तरह के परामर्श जारी कर चुका है और फिर से यह परामर्श दिया जाता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और विशेष रूप से यौन हिंसा के मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई किया जाना अनिवार्य है।

यौन अपराध के मामलों में प्राथमिकी या जीरो प्राथमिकी दर्ज किया जाना जरूरी है। कानून में प्रावधान किया गया है कि यौन अपराध के मामलों की जांच 2 महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए। गृह मंत्रालय ने यह भी याद दिलाया है कि कानून में यह भी प्रावधान है कि इन नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सजा तथा अन्य कार्यवाही भी का भी प्रावधान है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय ने कहा कि यौन अपराधों के मामलों में यह नियम है कि पुलिस को सूचना मिलने के बाद पीडि़ता की सहमति से पंजीकृत चिकित्सक से उसकी जांच करानी चाहिए। इसके अलावा पीडि़त के मरने से पहले दिए गए लिखित या मौखिक बयान को भी तथ्य के रूप में माना जाना चाहिए। साथ ही इन मामलों में फॉरेंसिक सबूत भी दिशा निर्देशों के अनुरूप एकत्र किए जाने चाहिए। इसके लिए विशेष रूप से उपलब्ध किट का इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य है।

लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी :MHA

गृह मंत्रालय ने कहा है कि यदि इन मामलों की जांच में निर्धारित नियमों कानूनों का पालन नहीं किया जाता है तो यह न्याय में बाधा पहुंचाने के समान है। मंत्रालय के मुताबिक नियमों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी प्रावधान है। गृह मंत्रालय ने सभी मुख्य सचिवों से कहा है कि वे अपने-अपने राज्यों में इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और इस तरह के मामलों की निगरानी भी करें।

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