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नारी शक्ति को PM मोदी का खास पत्र, महिलाओं के आरक्षण नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर दोहराई प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नारी शक्ति' को समर्पित इस पत्र में महिलाओं का धन्यवाद किया कि वे विधायी निकायों में आरक्षण की पहल का स्वागत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम लंबे समय से लंबित था और अब इसे लागू करने का समय आ गया है।

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नयी दिल्ली/खुशबू पाण्डेय। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत विधायी निकायों में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की पहल पर मिल रहे समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने सरकार की इस दशकों पुरानी मांग को जल्द पूरा करने की पूरी प्रतिबद्धता दोहराई। पत्र अप्रैल के इस ऐतिहासिक समय में लिखा गया, जब डॉ. बीआर अंबेडकर की जयंती मनाई जा रही है।

नारी शक्ति को प्रधानमंत्री का संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नारी शक्ति’ को समर्पित इस पत्र में महिलाओं का धन्यवाद किया कि वे विधायी निकायों में आरक्षण की पहल का स्वागत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम लंबे समय से लंबित था और अब इसे लागू करने का समय आ गया है। पत्र में प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि संसद में इस संबंधी संवैधानिक संशोधन को जल्द पारित किया जाना चाहिए, ताकि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं का आरक्षण लागू हो सके।

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अंबेडकर जयंती पर विशेष उल्लेख

पत्र की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने अप्रैल माह को यादगार बताया क्योंकि यह बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का समय है। उन्होंने अंबेडकर जी के संविधान निर्माण में दिए योगदान को याद किया और कहा कि उनके विचार आज भी देश को सही दिशा दिखा रहे हैं। इस संवैधानिक मूल्य के आधार पर ही महिलाओं को समान अधिकार और प्रतिनिधित्व देने की दिशा में काम हो रहा है।

महिलाओं की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में लिखा कि आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। स्टार्टअप्स, विज्ञान, शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति में उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खासकर खेल के मैदान पर छोटे शहरों से निकलकर महिलाएं नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं, जो युवा पीढ़ी को प्रेरणा दे रही हैं।

जमीनी स्तर पर स्वयं सहायता समूह और लखपति दीदी कार्यक्रम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सामूहिक प्रयास से समाज में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने इतिहास का जिक्र करते हुए बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने अहमदाबाद नगरपालिका में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की पहल की थी। आजादी के बाद भारत ने पुरुषों और महिलाओं को समान मताधिकार दिया, जबकि कई देशों में इसके लिए लंबा संघर्ष चला।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम की जरूरत

पिछले कई दशकों में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के प्रयास हुए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय की मांग है कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी आजादी का 100वां वर्ष मनाएगा, तब ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी बहुत जरूरी है। जब महिलाएं नीति बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल होंगी, तो देश की प्रगति और तेज होगी।

इसी सोच के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाया गया, जो लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करता है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि संसद का विशेष सत्र (16 अप्रैल से) इस संशोधन को पारित कर इतिहास रचेगा।

महिलाओं से अपील और शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री मोदी ने सभी महिलाओं से अपील की कि वे अपने सांसदों को पत्र लिखकर इस विधेयक के समर्थन में आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि यह कदम आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बेहतर बनाएगा। पत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं दीं और सभी महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य, सुख तथा समृद्धि की कामना की।

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