नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन बढ़ाने के लिए जन अभियान शुरू किया है। दिल्ली प्रदेश भाजपा की महिला सांसदों ने पार्टी कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन कर लोगों से अपील की कि वे 9667173333 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर अपनी सहमति दर्ज कराएं। साथ ही #नारीशक्तिवंदन हैशटैग का इस्तेमाल कर अभियान को फैलाएं।
संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी केवल 13.6 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 27 प्रतिशत के आसपास है। भाजपा का प्रयास है कि विशेष सत्र में इस अधिनियम को जल्द लागू किया जाए ताकि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिल सके।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन: भाजपा का जन अभियान
दिल्ली प्रदेश भाजपा की महामंत्री और सांसद कमलजीत सहरावत तथा सांसद बांसुरी स्वराज ने सोमवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में फोन नंबर 9667173333 जारी किया। लोगों से कहा गया कि इस नंबर पर मिस्ड कॉल देकर वे अपनी राय दर्ज करा सकते हैं। साथ ही #नारीशक्तिवंदन हैशटैग से सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ाने की अपील की गई।
यह अभियान इसलिए शुरू किया गया है क्योंकि 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। इस सत्र में अधिनियम को तुरंत लागू करने संबंधी जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं। भाजपा ने अन्य राजनीतिक दलों से भी अपील की है कि वे राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर सहमति दें।
प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और महिलाओं का सशक्तिकरण
कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा दिया था। उसी सोच के तहत नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास किया गया। उन्होंने बताया कि आज महिलाएं नौसेना, वायुसेना और अन्य क्षेत्रों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। सरकार की नीतियों से महिलाओं का नेतृत्व वाला विकास हो रहा है।
सहरावत ने उम्मीद जताई कि अन्य पार्टियां भी अधिनियम को तुरंत लागू करने में सहयोग देंगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संसद में महिलाओं की संख्या 13.63 प्रतिशत है। अधिनियम लागू होने के बाद यह 33 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे राजनीतिक क्षेत्र के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।
भारतीय संस्कृति और महिलाओं की भागीदारी
बांसुरी स्वराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अर्धनारीश्वर की अवधारणा है, यानी समानता यहां नई बात नहीं है। फिर भी राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम है। उन्होंने 2024 के चुनाव के आंकड़े दिए। महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत 65.8 था, जबकि पुरुषों का 65.7 प्रतिशत। इसके बावजूद संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ 13.6 प्रतिशत है।
स्वराज ने बताया कि वैश्विक औसत 27 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से अधिनियम पास कराया था। उन्होंने कहा था कि 18वीं लोकसभा अंतिम ऐसी होगी जिसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम होगा। 2029 से 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। उन्होंने सभी दलों से अनुरोध किया कि इस सामाजिक उत्थान वाली नीति को राजनीति से अलग रखकर समर्थन दें, ताकि महिलाएं नीति निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व में बदलाव की जरूरत
भारत में पंचायत और नगरपालिका स्तर पर महिलाओं की भागीदारी अच्छी है, लेकिन संसद और विधानसभाओं में अभी भी कमी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 इसी कमी को दूर करने का प्रयास है। अधिनियम लागू होने के बाद लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। यह आरक्षण अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी लागू होगा।
भाजपा का यह अभियान देशभर में महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ने का हिस्सा है। मिस्ड कॉल और हैशटैग के जरिए आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य है। पार्टी उम्मीद करती है कि विशेष सत्र में सभी दलों का सहयोग मिलेगा और महिलाओं को उनका हक मिलेगा।
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