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‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ से चमका सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन! कांवरियों के लिए सजी भगवा वस्त्रों की विशेष दुकान

Indian Railways OSOP Scheme: सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' के तहत श्रावणी मेले के लिए विशेष भगवा वस्त्रों की दुकान सजी। कांवरियों के लिए उपलब्ध हैं विशेष परिधान

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भागलपुर (बिहार)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी पहल ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ (OSOP) की खूबसूरत झलक ऐतिहासिक भागलपुर के विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में भी देखने को मिल रही है। इस योजना के तहत सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर एक विशेष स्टॉल स्थापित किया गया है, जहाँ अजगैवीनाथ धाम आने वाले शिवभक्त कांवरियों के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए भगवा और केसरिया वस्त्रों की प्रदर्शनी तथा बिक्री की जा रही है।

स्टॉल संचालक अनिल सिंघानिया ने बताया कि ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ योजना के माध्यम से उन्हें स्टेशन पर कपड़े की दुकान लगाने का अवसर प्राप्त हुआ है। देश के विभिन्न राज्यों और जिलों से श्रद्धालु सुल्तानगंज पहुँचकर उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरते हैं और बाबा बैजनाथ धाम (देवघर) के लिए पैदल यात्रा प्रारंभ करते हैं।

श्रावणी मेले के विशेष परिधानों की विशाल श्रृंखला उपलब्ध

कांवर यात्रा के दौरान भक्तिमय वातावरण को ध्यान में रखते हुए सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर लगे इस स्टॉल पर कांवरियों की आवश्यकताओं के अनुसार विशेष वस्त्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं:

  • उपलब्ध सामग्री: श्रावणी मेले से जुड़े विशेष झोले, टी-शर्ट, हाफ पैंट और बनियान की विस्तृत रेंज उपलब्ध कराई गई है।
  • केसरिया रंग की बढ़ती मांग: अजगैवी धाम से गंगाजल लेकर बाबा धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के बीच इन दिनों केसरिया और भगवा परिधानों की मांग अत्यधिक बढ़ गई है, जिससे पूरा सुल्तानगंज क्षेत्र भक्तिमय और केसरियामय नजर आ रहा है।

स्थानीय शिल्प और आजीविका को बढ़ावा देने की पहल

रेल मंत्रालय की ‘वन स्टेशन वन प्रोडक्ट’ योजना का मुख्य ध्येय देश भर के रेलवे स्टेशनों पर स्थानीय स्वदेशी और विशिष्ट हस्तशिल्प, वस्त्र एवं खाद्य उत्पादों की बिक्री व प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करना है।

भारतीय रेलवे द्वारा प्रत्येक क्षेत्र के विशिष्ट स्वदेशी उत्पादों—जैसे हथकरघा वस्त्र, लकड़ी की नक्काशी, जनजातीय कलाकृतियां, हस्तशिल्प और स्थानीय कृषि उत्पादों के प्रचार-प्रसार के लिए स्टॉल और कियोस्क आवंटित किए जा रहे हैं। इससे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे व्यवसायियों के कौशल का विकास हो रहा है तथा उनकी आजीविका में प्रत्यक्ष सुधार आ रहा है।

उल्लेखनीय है कि 25 मार्च 2022 से प्रत्येक क्षेत्रीय रेलवे में प्रायोगिक (पायलट) तौर पर शुरू की गई इस योजना से स्थानीय कारीगरों को एक मजबूत वैश्विक और राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।

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