शेखपुरा। बिहार के शेखपुरा जिले के रहने वाले सुमन कुमार की कहानी आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। आर्थिक तंगी से जूझते हुए मुंबई में नौकरी करने वाले सुमन ने जब वापस अपने गांव लौटकर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) का सहारा लिया, तो उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई।
आर्थिक तंगी से मुंबई तक का संघर्षपूर्ण सफर
शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड अंतर्गत कोइरीबीघा गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे सुमन कुमार का शुरुआती जीवन काफी अभावों में बीता। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी, तो उन्होंने रोजगार की तलाश शुरू की।
स्थानीय स्तर पर बेहतर अवसर न मिलने के कारण उन्हें भारी मन से मुंबई की ओर रुख करना पड़ा। मुंबई में उन्होंने करीब पांच वर्षों तक एक निजी कंपनी में नौकरी की। हालांकि, अच्छी मेहनत के बावजूद उनका मन हमेशा अपने परिवार और गांव की मिट्टी में ही अटका रहा।
गांव वापसी और सीमित संसाधनों की चुनौती
मुंबई की जिंदगी को अलविदा कहकर सुमन अपने गांव लौट आए। उन्होंने बरबीघा बाजार में फर्नीचर की एक छोटी सी दुकान खोलकर अपने आत्मनिर्भर बनने के सफर की शुरुआत की।
शुरुआती दिनों में संसाधनों की भारी कमी थी। दुकान से होने वाली मामूली आमदनी से परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना बेहद कठिन साबित हो रहा था। कारोबार को बड़ा आकार देने के लिए पूंजी की सख्त जरूरत थी, लेकिन बिना किसी वित्तीय मदद के यह संभव नहीं दिख रहा था।
PMEGP योजना बनी टर्निंग पॉइंट
सुमन के जीवन में असली बदलाव तब आया जब उनके एक करीबी मित्र ने उन्हें जिला उद्योग केंद्र जाने की सलाह दी। दोस्त की बात मानकर सुमन शेखपुरा स्थित उद्योग विभाग के कार्यालय पहुंचे।
वहां मौजूद अधिकारियों ने उन्हें केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (PMEGP) योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों के मार्गदर्शन में सुमन ने आवश्यक कागजात जमा कर लोन के लिए आवेदन किया। सरकारी प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें सब्सिडी के साथ लोन की राशि स्वीकृत हो गई।
आधुनिक मशीनों से कारोबार को दिया नया रूप
लोन की राशि मिलते ही सुमन ने अपने फर्नीचर व्यवसाय को आधुनिक रूप देना शुरू किया। उन्होंने लकड़ी के काम के लिए नई और आधुनिक मशीनें खरीदीं। बेहतर गुणवत्ता और तेज काम की बदौलत उनके फर्नीचर की मांग बाजार में तेजी से बढ़ने लगी।
कुछ ही समय में उनका छोटा सा कारोबार एक बड़े और सफल वर्कशॉप में तब्दील हो गया। आज उनकी आमदनी इतनी बेहतर हो चुकी है कि वे न केवल अपने परिवार की सभी जरूरतें आसानी से पूरी कर रहे हैं, बल्कि उनके बच्चों की शिक्षा भी बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से चल रही है।
खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों को दिया रोजगार
आज सुमन कुमार का फर्नीचर कारोबार बहुत बढ़िया चल रहा है। इससे होने वाली आमदनी से उनके परिवार का जीवनस्तर सुधरा है और बच्चों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के पूरी हो रही है।
सुमन कुमार केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हुए कहते हैं कि PMEGP योजना देश के बेरोजगार और संघर्षशील युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यदि सही समय पर सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं की जानकारी मिल जाए, तो कोई भी युवा अपनी किस्मत खुद लिख सकता है।
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