Heart Attack Symptoms in women: दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और हार्ट अटैक के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक कई बार अचानक आता है, लेकिन शरीर पहले से कुछ संकेत देता है। इन लक्षणों को समय पर पहचानकर तुरंत डॉक्टर की मदद ली जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। हाथ में दर्द, सीने में जकड़न और चेहरे का पीला पड़ना जैसे संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
हार्ट अटैक के सामान्य लक्षण
हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण सीने में दर्द, दबाव या जकड़न है। यह दर्द अक्सर केवल सीने तक सीमित नहीं रहता। यह बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या कोहनी तक फैल सकता है। कई लोगों को सांस लेने में तकलीफ या अचानक सांस फूलने की शिकायत होती है।
मतली, उल्टी, पेट में बेचैनी और बिना वजह थकान महसूस होना भी हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चक्कर आना, शरीर में कमजोरी, ठंडा पसीना और चेहरे का पीला पड़ना गंभीर संकेत हैं। अगर ये परेशानियां पांच मिनट से ज्यादा समय तक बनी रहें तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
महिलाओं और बुजुर्गों में अलग लक्षण
महिलाओं और बुजुर्गों में हार्ट अटैक के लक्षण अक्सर सामान्य नहीं दिखते। उनमें सीने का दर्द कम महसूस हो सकता है और थकान, सांस की तकलीफ या पेट की समस्या ज्यादा दिख सकती है। इसलिए इन लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी लोगों को हार्ट अटैक के शुरुआती संकेतों के बारे में जागरूक रहने की सलाह देता है।
हार्ट अटैक आने पर तुरंत क्या करें
अगर आपको या किसी को हाथ में दर्द, सीने में दबाव या चेहरा पीला पड़ने जैसे लक्षण दिखें तो देर न करें। नजदीकी अस्पताल पहुंचें या एंबुलेंस को कॉल करें। समय पर इलाज से खतरा कम किया जा सकता है। घर पर खुद दवा लेकर समस्या हल करने की कोशिश न करें।
हार्ट अटैक से बचाव के आसान उपाय
हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या तेज चलना फायदेमंद है। भोजन में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम चर्बी वाले खाने को शामिल करें। तला-भुना, ज्यादा नमक और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थ कम करें।
धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें। शराब का सेवन सीमित रखें। वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की नियमित जांच करवाएं। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान और अच्छी नींद लें। खासकर 30 साल की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बहुत फायदेमंद होता है।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर दिल को मजबूत रखा जा सकता है। छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से बड़ी समस्या से बचा जा सकता है। अगर आपको कोई भी लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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