नई दिल्ली। शहरी क्षेत्रों में रहने वाली युवा और कामकाजी महिलाओं के बीच यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) और वैजाइनल इन्फेक्शन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अब केवल कभी-कभार होने वाली बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि कई महिलाओं को साल में कई बार इस संक्रमण का सामना करना पड़ रहा है। लंबे ऑफिस आवर्स, यूरिन रोकने की आदत, साफ-सफाई में छोटी गलतियां, बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन, तनाव और जीवनशैली से जुड़ी कई आदतें इस समस्या को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
क्या होता है UTI और क्यों बढ़ रही है इसकी समस्या?
यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी UTI मूत्र मार्ग में होने वाला एक बैक्टीरियल संक्रमण है। यह संक्रमण किडनी, ब्लैडर, यूरेटर या यूरेथ्रा जैसे हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है क्योंकि उनकी शारीरिक संरचना के कारण बैक्टीरिया के संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है।
डॉक्टरों का कहना है कि शहरी जीवनशैली में आए बदलावों के कारण युवा महिलाओं में UTI के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है। कई मामलों में संक्रमण बार-बार लौटकर आता है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ती है।
लंबे समय तक यूरिन रोकना बन रहा बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, कामकाजी महिलाओं में UTI बढ़ने का एक प्रमुख कारण लंबे समय तक यूरिन रोककर रखना है। ऑफिस में लगातार मीटिंग्स, व्यस्त कार्यशैली या साफ टॉयलेट की कमी के कारण कई महिलाएं समय पर वॉशरूम नहीं जातीं।
जब यूरिन लंबे समय तक ब्लैडर में जमा रहता है, तो बैक्टीरिया को बढ़ने का अधिक मौका मिलता है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि यूरिन को लंबे समय तक रोककर नहीं रखना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए।
इंटीमेट हाइजीन में छोटी गलतियां बढ़ा सकती हैं जोखिम
महिलाओं के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इंटीमेट हाइजीन से जुड़ी गलतियां भी संक्रमण का कारण बन सकती हैं। कई महिलाएं खुशबूदार या अधिक केमिकल वाले उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे शरीर के प्राकृतिक बैक्टीरिया संतुलन पर असर पड़ता है।
इसके अलावा, साफ-सफाई के गलत तरीके और अत्यधिक रासायनिक उत्पादों का उपयोग भी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि सामान्य और सुरक्षित हाइजीन प्रैक्टिस अपनाना संक्रमण से बचाव में मददगार हो सकता है।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि UTI के शुरुआती लक्षण दिखने पर कई महिलाएं डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय खुद ही एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देती हैं। कुछ दिनों में आराम मिलने पर दवा का पूरा कोर्स भी नहीं करतीं।
यह आदत संक्रमण को पूरी तरह खत्म नहीं होने देती और शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या पैदा कर सकती है। इसका मतलब यह है कि भविष्य में वही दवाएं कम असरदार हो सकती हैं और संक्रमण बार-बार लौट सकता है। इसलिए किसी भी संक्रमण की स्थिति में डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना जरूरी है।
टाइट कपड़े और नमी भी बढ़ाते हैं संक्रमण का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से इंटीमेट एरिया में हवा का प्रवाह कम हो जाता है। इससे नमी बढ़ सकती है, जो बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है।
आरामदायक और सांस लेने योग्य कपड़े पहनने से इस तरह की समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। विशेष रूप से गर्मी और नमी वाले मौसम में कपड़ों का चुनाव स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
तनाव भी कर सकता है इम्यूनिटी को प्रभावित
डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ता मानसिक तनाव भी संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकता है। ऑफिस और घर की जिम्मेदारियों के बीच लगातार तनाव लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है।
जब इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, तो शरीर संक्रमणों से प्रभावी तरीके से लड़ नहीं पाता। इसलिए पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन भी महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
कैसे करें बचाव?
विशेषज्ञ महिलाओं को पर्याप्त पानी पीने, समय पर वॉशरूम जाने, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखने, डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं न लेने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हैं। शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना संक्रमण को गंभीर होने से रोक सकता है।
डिस्क्लेमर: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें।
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