महिलाओं की आम हार्मोनल समस्या PCOS का नाम बदलकर अब PMOS कर दिया गया है। इस बदलाव से बीमारी की सही पहचान और बेहतर इलाज में मदद मिलने की उम्मीद है। पुराना नाम पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) सिर्फ ओवरी में सिस्ट की ओर इशारा करता था, जबकि यह समस्या पूरे शरीर को प्रभावित करती है। नया नाम पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome – PMOS) है। यह बदलाव 14 साल की वैश्विक कोशिश के बाद हुआ है।
PCOS क्या था और नाम क्यों बदला गया?
पहले इस बीमारी को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) कहा जाता था। नाम से लगता था कि यह सिर्फ ओवरी में सिस्ट बनने की समस्या है। लेकिन हकीकत यह है कि कई महिलाओं में PCOS के लक्षण होते हैं, फिर भी ओवरी में सिस्ट नहीं दिखते। इस वजह से बीमारी को ठीक से समझना मुश्किल हो जाता था।
दुनिया भर के डॉक्टरों, रिसर्चर्स और हजारों महिलाओं की राय के बाद नाम बदलने का फैसला लिया गया। इस प्रक्रिया में करीब 14 साल लगे। नया नाम PMOS बीमारी की असली प्रकृति को बेहतर तरीके से बताता है।
PMOS की खासियत क्या है?
नए नाम पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) में हर शब्द का मतलब साफ है:
- पॉलीएंडोक्राइन: शरीर के कई हार्मोन्स प्रभावित होते हैं।
- मेटाबोलिक: वजन, ब्लड शुगर और इंसुलिन पर असर पड़ता है।
- ओवेरियन: ओव्यूलेशन और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या।
- सिंड्रोम: कई लक्षण एक साथ दिखना।
यह नाम बताता है कि PMOS सिर्फ पीरियड्स की समस्या नहीं, बल्कि पूरे शरीर की मेटाबॉलिक और हार्मोनल स्थिति है।
PMOS के आम लक्षण
इस समस्या से ग्रस्त महिलाओं में ये लक्षण दिख सकते हैं:
- पीरियड्स अनियमित होना या रुक जाना
- चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल बढ़ना
- मुंहासे की समस्या
- तेजी से वजन बढ़ना
- प्रेग्नेंसी में दिक्कत
- एंग्जायटी या डिप्रेशन
- लंबे समय में डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ना
ये लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं।
नाम बदलाव क्यों जरूरी है?
पहले PCOS को ज्यादातर सिर्फ पीरियड्स या फर्टिलिटी की समस्या माना जाता था। इससे कई महिलाओं की बीमारी समय पर पकड़ में नहीं आती थी और इलाज में देरी होती थी। नया नाम PMOS डॉक्टरों और आम लोगों दोनों को यह समझाने में मदद करेगा कि यह पूरी बॉडी की समस्या है। इससे सही समय पर जांच, सही इलाज और जरूरी लाइफस्टाइल बदलाव आसान होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से जागरुकता बढ़ेगी, रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। नाम बदलने की प्रक्रिया में 22,000 से ज्यादा लोगों की राय ली गई और 56 संगठनों ने इसमें हिस्सा लिया।
यह बदलाव धीरे-धीरे दुनिया भर के मेडिकल गाइडलाइंस में लागू किया जाएगा। महिलाओं को सलाह है कि अगर उन्हें ऊपर बताए लक्षण महसूस हों तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें। स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और समय पर जांच से इस समस्या को अच्छे से मैनेज किया जा सकता है।
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